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अमित शाह के मास्टर प्लान से कर्नाटक में बढ़ सकता है कांग्रेस का सिर दर्द

Wed, 11 Apr 2018 11:00 PM IST
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, नई दिल्ली Updated Wed, 11 Apr 2018 11:00 PM IST
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Amit Shah Master Plan may increase trouble for Congress in Karnataka elections
Amit Shah
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के नेतृत्व में पार्टी ने रिकार्ड तोड़ सफलता के झंडे गाड़े हैं। अपनी इस मुहिम को कर्नाटक विधानसभा चुनाव में जारी रखने के लिए भाजपा अध्यक्ष ने एक बार फिर पूरा जोर लगा दिया है। 20 अप्रैल के बाद शाह के इस मास्टर प्लान का असर दिखने लगेगा। शाह के इस प्लान को लेकर कर्नाटक के प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर भी पूरी तरह से आस्वस्त हैं। राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले शाह की इस मुहिम के बाद राज्य में कांग्रेस और उसके मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार सिद्धारमैया की मुश्किलें तय मानी जा रही हैं। 
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भाजपा ने एक बार फिर कर्नाटक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चेहरे के साथ-साथ जमीनी तैयारी, जातिगत समीकरण और त्रिकोणीय राजनीति के फार्मूले पर जोर दिया है। इसके साथ-साथ राज्य और केन्द्र स्तर के नेताओं के जोरदार प्रचार अभियान के जरिए विधानसभा चुनाव में सफलता पाने का रास्ता बनाया जा रहा है। फिलहाल पार्टी का मुख्य फोकस बूथ प्रबंधन और पन्ना प्रमुखों की सक्रियता पर है। 
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प्रधानमंत्री फूकेंगे प्रचार में जान 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राज्य में चार जनसभा कर चुके हैं। कर्नाटक प्रदेश भाजपा नेताओं के अनुसार 30 जिलों वाले राज्य में प्रधानमंत्री की 15 जनसभाओं से मतदाताओं को तेजी से पार्टी के पक्ष में मोड़ा जा सकता है। इसे ध्यान में रखकर प्रधानमंत्री 10-12 जनसभाओं का कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है। इसी तरह से भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का भी कार्यक्रम तैयार हो रहा है। शाह लगातार राज्य में चुनावी गतिविधियों को लेकर सक्रियता बनाए हैं। पार्टी ने कर्नाटक में बाजी पलटने के लिए महासचिव राम माधव को भी भेजा है। कर्नाटक में भाजपा ने विभिन्न स्तरों से फीडबैक लिया है। 72 उम्मीदवारों की पहली सूची में 21 लिंगायत उम्मीदवार उतारकर भी एक संदेश देने की कोशिश की है। हलांकि उम्मीदवारों में दूसरे दल को छोड़कर आए नेताओं को भी पर्याप्त जगह दी गई है। 
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बीजेपी का प्लान बी

Amit Shah Master Plan may increase trouble for Congress in Karnataka elections
amit shah
भाजपा इसके साथ प्लान बी पर भी काम कर रही है। कर्नाटक से जुड़े सूत्र के अनुसार उनकी पहली कोशिश किसी भी सूरत में कांग्रेस को सत्ता में आने से रोकना और राज्य में भाजपा की सरकार लाना है। समझा जा रहा है कि इस योजना के तहत भाजपा राज्य में त्रिकोणीय मुकाबले की अधिक पक्षधर है। ऐसा होने पर जहां न केवल भाजपा के उम्मीदवारों की जीत की संभावना बढ़ेगी, वहीं कांग्रेस को बहुमत पाने में काफी परेशानी उठानी पड़ेगी। जद(एस) के एचडी कुमारस्वामी से भाजपा नेताओं की नजदीकी को भी इससे जोड़ा जा रहा है। इस संभावना को देखकर कांग्रेस ने भी जद(एस) पर भाजपा की टीम बी होने का आरोप लगाया है।

भाजपा की मुश्किल 

भाजपा ने अपने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा पर बड़ा दांव लगाया। उन्हें काफी पहले मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया। इसके पीछे की बड़ी वजह राज्य में करीब 90 सीटों पर राज्य के 18 फीसदी लिंगायतों का प्रभाव है। लिंगायत गुजरात के पटेल समाज की तरह राज्य में प्रभावी हैं। येदियुरप्पा खुद भी लिंगायत है और कर्नाटक में दो सौ से अधिक प्रभावी लिंगायत मठ हैं।

लेकिन मुख्यमंत्री सिद्धारमैय्या ने वीर शैव लिंगायतो को अलग अल्पसंख्यक धर्म का दर्जा दे दिया था। लिंगायत मठों ने केन्द्र सरकार से राज्य सरकार के सिफारिश लागू करने की अपील की थी। इस धर्म संकट की स्थिति को देखकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने धर्म गुरुओं की इस बात को मानने से इनकार कर दिया था। माना जा रहा है कि इसके बाद से लिंगायतों का साथ मिलने की संभावना कमजोर हो रही है। पार्टी के नेताओं को भी लग रहा है कि उसकी ताकत बने येदियुरप्पा अब लिंगायतों में कमजोर हो रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि इस स्थिति से निबटने की भी तैयारी हो रही है।

कांग्रेस की कमजोर नस बनेगी ताकत 

कांग्रेस अभी कर्नाटक में सिद्धारमैया को आगे करके इतरा रही है। हालांकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पांच बार राज्य का दौरा करके करीब 28 जिलों में घूम आए हैं। कई मठों में भी मत्था टेक आए हैं, लेकिन भाजपा को बस कांग्रेस की कमजोर का नस का इंतजार है। पार्टी के रणनीतिकारों को भरोसा है कि चुनाव प्रचार के पीक पर आते-आते भाजपा के पक्ष में माहौल दिखाई देने लगेगा। इसके लिए पार्टी नए मुद्दों, प्रचार के तरीकों को बदलने समेत सभी उपायों की तैयारी कर रही है। 
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