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तीन करोड़ घुसपैठियों के मुद्दे पर घमासान: कांग्रेस ने मांगे दस्तावेज, पूछा- सरकार ने अब तक क्या कार्रवाई की?
Tue, 03 Nov 2026 04:49 PM IST
अमन मौर्या
आईएएनएस, नई दिल्ली
आईएएनएस, नई दिल्ली
Published by: अमन मौर्या
Updated Tue, 03 Nov 2026 04:49 PM IST
सार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के तीन करोड़ बांग्लादेशी घुसपैठियों वाले दावे पर सियासत गरमा गई है। भाजपा ने झारखंड की जनसांख्यिकी बदलाव का हवाला देकर समर्थन किया है, वहीं विपक्ष ने सबूत मांगते हुए सरकार को घेरा है।
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गृह मंत्री अमित शाह
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के तीन करोड़ बांग्लादेशी घुसपैठियों वाले दावे पर सियासी घमासान तेज हो गया है। भाजपा और विपक्ष के बीच लगातार आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया है कि विपक्ष अवैध प्रवासियों को बचाने के लिए एसआईआर का विरोध कर रहा है। वहीं, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने शाह से पूछा है कि अगर देश में इतनी बड़ी संख्या में घुसपैठिये हैं तो सरकार ने अब तक उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की है।
कांग्रेस ने अमित शाह से मांगे दस्तावेज
कांग्रेस नेता उदित राज ने गृह मंत्री को अपने दावे के समर्थन में दस्तावेजी सबूत पेश करने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि अगर तीन करोड़ घुसपैठिये हैं तो उनकी सूची को डिजिटल रूप में सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि केंद्र में करीब साढ़े 12 साल से सत्ता में रहने के बावजूद सरकार कथित घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें देश से बाहर क्यों नहीं कर पाई।
सपा ने क्या कहा?
समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने भी शाह के दावे पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री को शायद इस बात की सही जानकारी नहीं है कि घुसपैठिया कौन है। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के लिए कई लोगों ने संघर्ष किया और कई ऐसे लोग हैं जिनके पूर्वजों को इसी देश में दफनाया गया है। ऐसे लोगों को घुसपैठिया बताने से पहले तथ्यों को समझना जरूरी है।
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शाह के दावे के समर्थन में भाजपा ने क्या तर्क दिया?
भाजपा के झारखंड प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने अमित शाह के बयान का बचाव करते हुए आरोप लगाया कि अवैध घुसपैठ ने झारखंड के कुछ इलाकों की जनसांख्यिकी को प्रभावित किया है। आईएएनएस से बातचीत में उन्होंने कहा कि देश में पिछली जनगणना 2011 में हुई थी और पिछले कई दशकों में जनसंख्या संरचना में बड़े बदलाव दर्ज किए गए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र में लंबे समय तक सत्ता में रही कांग्रेस ने बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्याओं को अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने दिया। प्रतुल शाह देव ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के नेताओं पर भी घुसपैठियों को राजनीतिक समर्थन के लिए प्रोत्साहित करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि राज्य के अधिकारियों की मदद से अवैध प्रवासियों ने आधार और मतदाता पहचान पत्र भी बनवा लिए हैं।
जनसांख्यिकी के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि झारखंड में संथाल आदिवासी समुदाय की आबादी जहां 1951 में 44 प्रतिशत थी, वो 2011 में घटकर 28 प्रतिशत रह गई। वहीं, इसी अवधि में मुस्लिम आबादी नौ प्रतिशत से बढ़कर 23 प्रतिशत हो गई। उन्होंने इन बदलावों को कथित घुसपैठ का असर बताया।
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कांग्रेस ने अमित शाह से मांगे दस्तावेज
कांग्रेस नेता उदित राज ने गृह मंत्री को अपने दावे के समर्थन में दस्तावेजी सबूत पेश करने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि अगर तीन करोड़ घुसपैठिये हैं तो उनकी सूची को डिजिटल रूप में सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि केंद्र में करीब साढ़े 12 साल से सत्ता में रहने के बावजूद सरकार कथित घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें देश से बाहर क्यों नहीं कर पाई।
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सपा ने क्या कहा?
समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने भी शाह के दावे पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री को शायद इस बात की सही जानकारी नहीं है कि घुसपैठिया कौन है। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के लिए कई लोगों ने संघर्ष किया और कई ऐसे लोग हैं जिनके पूर्वजों को इसी देश में दफनाया गया है। ऐसे लोगों को घुसपैठिया बताने से पहले तथ्यों को समझना जरूरी है।
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शाह के दावे के समर्थन में भाजपा ने क्या तर्क दिया?
भाजपा के झारखंड प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने अमित शाह के बयान का बचाव करते हुए आरोप लगाया कि अवैध घुसपैठ ने झारखंड के कुछ इलाकों की जनसांख्यिकी को प्रभावित किया है। आईएएनएस से बातचीत में उन्होंने कहा कि देश में पिछली जनगणना 2011 में हुई थी और पिछले कई दशकों में जनसंख्या संरचना में बड़े बदलाव दर्ज किए गए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र में लंबे समय तक सत्ता में रही कांग्रेस ने बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्याओं को अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने दिया। प्रतुल शाह देव ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के नेताओं पर भी घुसपैठियों को राजनीतिक समर्थन के लिए प्रोत्साहित करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि राज्य के अधिकारियों की मदद से अवैध प्रवासियों ने आधार और मतदाता पहचान पत्र भी बनवा लिए हैं।
जनसांख्यिकी के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि झारखंड में संथाल आदिवासी समुदाय की आबादी जहां 1951 में 44 प्रतिशत थी, वो 2011 में घटकर 28 प्रतिशत रह गई। वहीं, इसी अवधि में मुस्लिम आबादी नौ प्रतिशत से बढ़कर 23 प्रतिशत हो गई। उन्होंने इन बदलावों को कथित घुसपैठ का असर बताया।