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Assam: असम में सीएए के तहत अब तक 70 आवेदन, छह लोगों को मिली भारतीय नागरिकता; कितने हुए निर्वासित?

Wed, 08 Jul 2026 12:52 AM IST
एन अर्जुन अमर उजाला ब्यूरो, गुवाहाटी
अमर उजाला ब्यूरो, गुवाहाटी Published by: एन अर्जुन Updated Wed, 08 Jul 2026 12:52 AM IST
सार

असम सरकार ने विधानसभा में बताया कि नागरिकता संशोधन अधिनियम लागू होने के बाद राज्य में 70 लोगों ने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया है, जिनमें से छह को मंजूरी मिल चुकी है। सरकार ने यह भी बताया कि राज्य में बड़ी संख्या में विदेशियों की पहचान की गई है और हजारों लोगों को देश से बाहर भेजा जा चुका है। मई 2025 से अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई तेज हुई है।

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असम के सीएम हिमंत बिस्व सरमा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

असम में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत अब तक 70 प्रवासियों ने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया है, जिनमें से छह लोगों को नागरिकता प्रदान की जा चुकी है। राज्य सरकार ने मंगलवार को विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन यह जानकारी दी। सरकार ने बताया कि इन आवेदनों का निपटारा नागरिकता संशोधन अधिनियम-2019 के तहत किया जा रहा है।
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संसद से पारित यह कानून मार्च 2024 में केंद्र सरकार द्वारा नियम अधिसूचित किए जाने के बाद लागू हुआ था। इसके तहत बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने का प्रावधान है।
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1.72 लाख विदेशी चिह्नित, 31 हजार से अधिक निर्वासित 
विधानसभा में सरकार ने एक अन्य जवाब में बताया कि असम में अब तक 1,72,673 विदेशियों की पहचान की गई है। इनमें से 31,786 लोगों को निर्वासित (डिपोर्ट) किया जा चुका है। सरकार ने यह भी बताया कि असम से अवैध प्रवासियों की निष्कासन अधिनियम, 1950 के तहत 2 मई 2025 से अब तक 1,572 अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस (पुश बैक) भेजा गया है। इनमें श्रीभूमि जिले के 866, कछार जिले के 357 और रेलवे पुलिस द्वारा पकड़े गए 68 अवैध प्रवासी भी शामिल हैं।
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असम में राजनीतिक रूप से संवेदनशील है सीएए
असम में सीएए का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील रहा है। कानून पारित होने से पहले और बाद में राज्य में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिनमें कई लोगों की मौत भी हुई थी। हाल ही में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा था कि असम में संदिग्ध मतदाताओं (डी-वोटर) के रूप में चिन्हित बंगाली हिंदुओं की संख्या एक लाख से कम है और वर्तमान में उनमें से कोई भी निरुद्ध केंद्र (डिटेंशन सेंटर) में नहीं है।


मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के 2019 मसौदे को अंतिम रूप दिए जाने के बाद यह संख्या बढ़ सकती है। एनआरसी से बाहर रह जाने वाले पात्र बंगाली हिंदुओं को बाद में सीएए के तहत भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करना होगा।

एक नजर में
  • 70 लोगों ने सीएए के तहत नागरिकता के लिए आवेदन किया।
  • 6 आवेदकों को अब तक भारतीय नागरिकता मिली।
  • 1,72,673 विदेशियों की असम में पहचान की गई।
  • 31,786 विदेशियों को अब तक निर्वासित किया गया।
  • 1,572 अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को मई 2025 से अब तक पुश बैक किया गया।
  • 866 श्रीभूमि और 357 कछार जिले से वापस भेजे गए।
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