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बंगाल में सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक: 72 घंटे का नियम, किन दिनों नहीं देख सकेंगे निजी मरीज?

Tue, 25 Aug 2026 12:33 AM IST
निर्मल कांत पीटीआई, सूरत (गुजरात)।
पीटीआई, सूरत (गुजरात)। Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 25 Aug 2026 12:33 AM IST
सार

बंगाल में सरकारी मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों के निजी मरीज देखने पर नई पाबंदी लागू हुई है। मरीज के भर्ती होने वाले दिन से 48 घंटे बाद तक डॉक्टर निजी मरीज नहीं देख सकेंगे। सरकार ने यह फैसला क्यों लिया और इसका मरीजों पर क्या असर होगा? पढ़िए रिपोर्ट-

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Bengal govt doctors barred from private practice for 72 hours after patient admission
डॉक्टर (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/फ्रीपिक

विस्तार

पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ा फैसला लिया है। विभाग ने पश्चिम बंगाल चिकित्सा शिक्षा सेवा में काम करने वाले डॉक्टरों के निजी तौर पर मरीज देखने पर रोक लगा दी है। यह रोक उस दिन से लागू होगी, जिस दिन कोई मरीज सरकारी अस्पताल में भर्ती होगा। इसके बाद अगले 48 घंटे तक भी डॉक्टर निजी तौर पर मरीज नहीं देख सकेंगे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।
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उन्होंने बताया कि यह रोक तुरंत लागू कर दी गई है। इस तरह कुल 72 घंटे तक निजी प्रैक्टिस पर रोक रहेगी। इसका मकसद यह है कि डॉक्टर सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीजों के इलाज के लिए उपलब्ध रहें।
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यह रोक कितने समय की होगी?
अधिकारी ने कहा, यह रोक मरीज के भर्ती होने वाले दिन से लागू होगी। इसके बाद अगले 48 घंटे तक भी जारी रहेगी। इसका मकसद यह है कि अस्पताल में भर्ती मरीजों का इलाज लगातार होता रहे। मरीज का इलाज करने वाले डॉक्टर जरूरत पड़ने पर अस्पताल में मौजूद रहें। इस आदेश का सीधा असर सरकारी मेडिकल कॉलेजों में काम करने वाले डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर पड़ेगा।
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डॉक्टरों के पास निजी मरीज देखने के लिए कितने दिन बचेंगे?
सरकारी डॉक्टरों के लिए आमतौर पर हर हफ्ते मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने का एक तय दिन होता है। नई व्यवस्था के तहत डॉक्टर उस दिन निजी मरीज नहीं देख सकेंगे। इसके बाद अगले दो दिन भी निजी मरीज नहीं देख पाएंगे। इससे हफ्ते में निजी मरीज देखने के लिए उनके पास कम दिन बचेंगे। कुछ डॉक्टरों की हफ्ते में दो दिन मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की ड्यूटी होती है। ऐसे डॉक्टरों के लिए यह रोक हफ्ते के ज्यादातर कामकाजी दिनों तक लागू हो सकती है।

कुछ डॉक्टरों ने क्या चिंता जताई?
कुछ डॉक्टरों ने अचानक लगी इस रोक को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि इससे उन मरीजों पर असर पड़ सकता है, जिनका सरकारी डॉक्टरों की देखरेख में निजी अस्पतालों में पहले से इलाज चल रहा है।


मरीजों ने फैसले का स्वागत क्यों किया?
हालांकि, कुछ मरीजों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि सरकारी अस्पताल में मरीज के भर्ती होने के बाद डॉक्टर अस्पताल में मौजूद रहेंगे। इससे मरीज का लगातार उपचार होता रहेगा। इलाज की गुणवत्ता भी बेहतर हो सकती है।
 
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