मेघालय में भाजपा का बड़ा दांव: यूडीपी के आठ विधायक पार्टी में शामिल, विधानसभा में अब कितना ताकतवर हुआ दल?
मेघालय में यूडीपी के आठ विधायक भाजपा में शामिल हो गए हैं। नई दिल्ली में किरेन रिजिजू और संबित पात्रा की मौजूदगी में हुए इस दल-बदल के बाद विधानसभा में भाजपा की संख्या दो से बढ़कर 10 हो गई है। लेकिन आठों विधायकों ने भाजपा में जाने का फैसला क्यों किया? किन मुद्दों को लेकर बातचीत हुई? क्या इस बदलाव से मेघालय की राजनीति और विधानसभा के समीकरण पर भी असर पड़ेगा? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
विस्तार
मेघालय की राजनीति में बुधवार को बड़ा बदलाव देखने को मिला। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी यानी यूडीपी के आठ विधायक भाजपा में शामिल हो गए। नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा की मौजूदगी में इन विधायकों ने भाजपा की सदस्यता ली। इन आठ विधायकों के आने के बाद मेघालय विधानसभा में भाजपा की संख्या बढ़कर 10 हो गई है। इस घटनाक्रम से राज्य की राजनीति में भाजपा की स्थिति पहले के मुकाबले मजबूत हुई है।
कौन-कौन से आठ यूडीपी विधायक भाजपा में शामिल हुए?
भाजपा में शामिल होने वाले आठ विधायकों में लखमेन रिम्बुई, पायस मारवेन, किर्मेन श्यल्ला, मायरालबॉर्न सिएम, मैथ्यू कुर्बाह, ओलन सिंह सुइन, बालाजीड कुपार सिनरेम और सिनशर लिंगडोह थबाह शामिल हैं। इन सभी ने बुधवार को नई दिल्ली में भाजपा में शामिल होने की प्रक्रिया पूरी की। इससे पहले ये सभी यूडीपी के विधायक थे। आठ विधायकों के भाजपा में आने के बाद विधानसभा में पार्टी के सदस्यों की संख्या दो से बढ़कर 10 हो गई है।
#WATCH | Delhi: At a press conference, Union Minister of Parliamentary Affairs, Kiren Rijiju, says, "... We welcome eight elected members of the assembly, MLAs of Meghalaya, into the BJP family. They earlier belonged to UDP, a very prominent regional party. Looking at the… pic.twitter.com/3QxnSJm5cZ
— ANI (@ANI) September 23, 2026
किरेन रिजिजू ने आठ विधायकों के भाजपा में आने पर क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने आठों विधायकों का भाजपा में स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ये सभी पहले यूडीपी में थे, जो मेघालय की एक प्रमुख क्षेत्रीय पार्टी है। रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में पूर्वोत्तर और मेघालय में बदलाव हुआ है। उनके मुताबिक, पूर्वोत्तर के लोगों के साथ प्रधानमंत्री मोदी का जुड़ाव और भाजपा सरकार के विकास कार्य इन विधायकों को प्रभावित करने वाले कारणों में शामिल हैं। रिजिजू ने कहा कि सभी आठ विधायक भाजपा और उसकी सरकार के प्रदर्शन से प्रभावित होकर पार्टी में आए हैं।
भाजपा की विधानसभा में संख्या 10 कैसे हुई?
आठ यूडीपी विधायकों के भाजपा में शामिल होने से मेघालय विधानसभा में भाजपा की संख्या सीधे दो से बढ़कर 10 हो गई है। यानी पार्टी को एक साथ आठ विधायकों का समर्थन मिला है। 60 सदस्यीय मेघालय विधानसभा में यह बदलाव राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। UDP के आठ विधायकों के पाला बदलने से क्षेत्रीय दल के पास पहले की तुलना में कम विधायक रह गए हैं। इस घटनाक्रम के बाद मेघालय की राजनीति में भाजपा की भूमिका और विधानसभा के भीतर उसकी मौजूदगी पहले से अलग दिखाई देगी।
क्या यह बदलाव पहले से तय था?
आठ विधायकों के भाजपा में शामिल होने की चर्चा पिछले कुछ समय से चल रही थी। इन विधायकों की ओर से भाजपा नेतृत्व के सामने मेघालय से जुड़े कई मुद्दे भी रखे गए थे। इनमें खासी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने, कोयला खनन से जुड़े मुद्दे, मेघालय रेजिडेंट्स सेफ्टी एंड सिक्योरिटी एक्ट को लागू करने और शिलांग की हरिजन कॉलोनी को थेम इयू मावलोंग से दूसरी जगह स्थानांतरित करने जैसे मुद्दे शामिल थे। इन मुद्दों पर भाजपा नेतृत्व के साथ बातचीत के बाद आठों विधायकों ने पार्टी में शामिल होने का फैसला किया।
मेघालय की राजनीति में अब क्या बदलेगा?
आठ विधायकों के भाजपा में आने से राज्य के राजनीतिक समीकरण में बदलाव हुआ है। भाजपा की विधानसभा में संख्या अब 10 हो गई है। इससे पार्टी को सदन में पहले की तुलना में ज्यादा राजनीतिक वजन मिला है। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब मेघालय की राजनीति में क्षेत्रीय दलों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है। भाजपा की ओर से इसे पूर्वोत्तर में पार्टी के विस्तार और विकास के मुद्दों से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, आठों विधायकों के पार्टी बदलने का तत्काल असर सरकार के कामकाज और सत्ता के समीकरण पर कितना पड़ेगा, यह आगे की राजनीतिक गतिविधियों से स्पष्ट होगा।