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Mumbai: 'मुंबई गंदी हुई, तो जिम्मेदार अधिकारियों की खराब होगी ACR', बॉम्बे हाईकोर्ट की बीएमसी को सख्त हिदायत
Thu, 30 Jul 2026 08:02 PM IST
सुनील मेहरोत्रा
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Published by: सुनील मेहरोत्रा
Updated Thu, 30 Jul 2026 08:02 PM IST
सार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी को हर वार्ड के लिए सख्त स्वच्छता व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया। अदालत ने वार्ड अधिकारियों की जवाबदेही उनकी एसीआर से जोड़ने, लापरवाही पर कार्रवाई, बेहतर काम पर प्रोत्साहन, सीसीटीवी निगरानी, भारी जुर्माना, जागरूकता अभियान और तकनीक आधारित शिकायत प्रणाली लागू करने पर जोर दिया।
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बॉम्बे हाईकोर्ट
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी को निर्देश दिया है कि वह शहर के हर वार्ड के लिए एक साफ-सुथरी और मजबूत स्वच्छता व्यवस्था तैयार करे। अदालत ने यह भी विचार करने को कहा है कि इलाके में सफाई बनाए रखने में वार्ड अधिकारियों का काम कैसा रहा, इसे उनकी सालाना गोपनीय रिपोर्ट (ACR) से जोड़ा जाए। यानी यदि मुंबई गंदी हुई, तो जिम्मेदार अधिकारियों की खराब हो सकती है ACR, बॉम्बे हाई कोर्ट ने बीएमसी को यह सख्त हिदायत दी है। अदालत का मानना है कि मुंबई में हर साल बारिश के मौसम में समुद्र से किनारे पर लौटकर आने वाले प्लास्टिक कचरे की गंभीर समस्या से निपटने के लिए नियमों का सख्ती से पालन, नई तकनीक से निगरानी, लोगों में जागरूकता और बीएमसी अधिकारियों की जवाबदेही बहुत जरूरी है।
कचरा प्रबंधन की समस्या पर हाईकोर्ट की फटकार
न्यायमूर्ति जी. एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति आरती साठे की बेंच गुरुवार को मुंबई के कांजुरमार्ग स्थित कचरा निपटान केंद्र से जुड़े पर्यावरण के मुद्दों और पूरी मुंबई में कचरा प्रबंधन की समस्या पर दाखिल एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान बीएमसी ने अदालत के सामने स्वच्छता और साफ-सफाई से जुड़े नए नियम पेश किए और बताया कि इन्हें लागू करने का काम शुरू हो चुका है। अदालत ने इन नियमों को देखा और बीएमसी की इस पहल की तारीफ भी की। हालांकि, अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि शहर की सड़कों, फुटपाथों, चौपाटियों, नदियों, नालों और दूसरी पानी की जगहों पर अब भी बहुत ज्यादा कचरा और प्लास्टिक फेंका जा रहा है। अदालत ने कहा कि बारिश के दिनों में जो प्लास्टिक कचरा समुद्र में बहकर जाता है, वही बार-बार मुंबई के किनारों पर वापस आ जाता है, जिससे पर्यावरण को बहुत बड़ा नुकसान होता है।
'अवैध डंपिंग के लिए संबंधित वार्ड अधिकारी जिम्मेदार'
बेंच ने साफ कहा कि अपने-अपने इलाके को कचरे और अवैध डंपिंग से बचाकर रखना पूरी तरह से संबंधित वार्ड अधिकारी की जिम्मेदारी है। अदालत ने ध्यान दिलाया कि खुले नाले प्लास्टिक कचरा फेंकने का बड़ा जरिया बन गए हैं और यही कचरा आगे जाकर समुद्र में मिल जाता है। इसलिए नगर आयुक्त यह पक्का करें कि ऐसे सभी नालों को ढका जाए और प्लास्टिक को पानी के स्रोतों तक जाने से रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
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अदालत ने यह भी कहा कि इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए बीएमसी के कानूनों का कड़ाई से पालन होना चाहिए। नियम तोड़ने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाए, कचरा फेंकने वालों की पहचान के लिए सीसीटीवी कैमरों की मदद ली जाए, सार्वजनिक जगहों को गंदा करने वालों पर कानूनी कार्रवाई हो और बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि न तो झुग्गी-झोपड़ियों की मौजूदगी और न ही झोपड़पट्टी पुनर्विकास से जुड़े प्रशासनिक काम, लोगों की सेहत और सफाई बनाए रखने में नाकामी की वजह बन सकते हैं।
ये भी पढ़ें: West Asia Crisis: पश्चिम एशिया संघर्ष में कितने भारतीयों की हुई मौत? सरकार ने संसद में दी जानकारी
अधिकारियों को भारी पड़ेगी लापरवाही
हाईकोर्ट ने बीएमसी को आदेश दिया कि वह हर वार्ड के लिए एक पूरी योजना बनाए। इसमें सफाई से जुड़ी जांच सूची, काम परखने के सीधे और साफ पैमाने, वक्त-वक्त पर निरीक्षण, तकनीक से निगरानी और वार्ड के हिसाब से सफाई का रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था शामिल हो। अदालत ने कहा कि नगर आयुक्त इस बात पर विचार करें कि इन जिम्मेदारियों को अधिकारी कितनी मुस्तैदी से निभा रहे हैं, उसे उनकी सालाना गोपनीय रिपोर्ट (ACR) में लिखा जाए और यदि लापरवाही पाई गई तो उनकी ACR खराब हो सकती है। साथ ही जो अफसर अपने इलाके में बेहतर सफाई रखेंगे, उन्हें इनाम और प्रोत्साहन भी दिया जाना चाहिए।
इसके अलावा अदालत ने हर वार्ड में शिकायत दूर करने की एक व्यवस्था बनाने की सलाह दी। इसमें मोबाइल ऐप जैसा जरिया शामिल किया जा सकता है, जिससे आम नागरिक कहीं भी फैले कचरे की फोटो खींचकर अपलोड कर सकें और बीएमसी के अफसर उस पर तुरंत कार्रवाई कर सकें। मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी, तब तक बीएमसी को अदालत के इन निर्देशों पर की गई कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट हलफनामे के जरिए दाखिल करनी होगी।
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कचरा प्रबंधन की समस्या पर हाईकोर्ट की फटकार
न्यायमूर्ति जी. एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति आरती साठे की बेंच गुरुवार को मुंबई के कांजुरमार्ग स्थित कचरा निपटान केंद्र से जुड़े पर्यावरण के मुद्दों और पूरी मुंबई में कचरा प्रबंधन की समस्या पर दाखिल एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान बीएमसी ने अदालत के सामने स्वच्छता और साफ-सफाई से जुड़े नए नियम पेश किए और बताया कि इन्हें लागू करने का काम शुरू हो चुका है। अदालत ने इन नियमों को देखा और बीएमसी की इस पहल की तारीफ भी की। हालांकि, अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि शहर की सड़कों, फुटपाथों, चौपाटियों, नदियों, नालों और दूसरी पानी की जगहों पर अब भी बहुत ज्यादा कचरा और प्लास्टिक फेंका जा रहा है। अदालत ने कहा कि बारिश के दिनों में जो प्लास्टिक कचरा समुद्र में बहकर जाता है, वही बार-बार मुंबई के किनारों पर वापस आ जाता है, जिससे पर्यावरण को बहुत बड़ा नुकसान होता है।
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'अवैध डंपिंग के लिए संबंधित वार्ड अधिकारी जिम्मेदार'
बेंच ने साफ कहा कि अपने-अपने इलाके को कचरे और अवैध डंपिंग से बचाकर रखना पूरी तरह से संबंधित वार्ड अधिकारी की जिम्मेदारी है। अदालत ने ध्यान दिलाया कि खुले नाले प्लास्टिक कचरा फेंकने का बड़ा जरिया बन गए हैं और यही कचरा आगे जाकर समुद्र में मिल जाता है। इसलिए नगर आयुक्त यह पक्का करें कि ऐसे सभी नालों को ढका जाए और प्लास्टिक को पानी के स्रोतों तक जाने से रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
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अदालत ने यह भी कहा कि इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए बीएमसी के कानूनों का कड़ाई से पालन होना चाहिए। नियम तोड़ने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाए, कचरा फेंकने वालों की पहचान के लिए सीसीटीवी कैमरों की मदद ली जाए, सार्वजनिक जगहों को गंदा करने वालों पर कानूनी कार्रवाई हो और बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि न तो झुग्गी-झोपड़ियों की मौजूदगी और न ही झोपड़पट्टी पुनर्विकास से जुड़े प्रशासनिक काम, लोगों की सेहत और सफाई बनाए रखने में नाकामी की वजह बन सकते हैं।
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अधिकारियों को भारी पड़ेगी लापरवाही
हाईकोर्ट ने बीएमसी को आदेश दिया कि वह हर वार्ड के लिए एक पूरी योजना बनाए। इसमें सफाई से जुड़ी जांच सूची, काम परखने के सीधे और साफ पैमाने, वक्त-वक्त पर निरीक्षण, तकनीक से निगरानी और वार्ड के हिसाब से सफाई का रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था शामिल हो। अदालत ने कहा कि नगर आयुक्त इस बात पर विचार करें कि इन जिम्मेदारियों को अधिकारी कितनी मुस्तैदी से निभा रहे हैं, उसे उनकी सालाना गोपनीय रिपोर्ट (ACR) में लिखा जाए और यदि लापरवाही पाई गई तो उनकी ACR खराब हो सकती है। साथ ही जो अफसर अपने इलाके में बेहतर सफाई रखेंगे, उन्हें इनाम और प्रोत्साहन भी दिया जाना चाहिए।
इसके अलावा अदालत ने हर वार्ड में शिकायत दूर करने की एक व्यवस्था बनाने की सलाह दी। इसमें मोबाइल ऐप जैसा जरिया शामिल किया जा सकता है, जिससे आम नागरिक कहीं भी फैले कचरे की फोटो खींचकर अपलोड कर सकें और बीएमसी के अफसर उस पर तुरंत कार्रवाई कर सकें। मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी, तब तक बीएमसी को अदालत के इन निर्देशों पर की गई कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट हलफनामे के जरिए दाखिल करनी होगी।