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सीमा विवाद: अरुणाचल में PLA के कैंप का दावा, स्थानीय लोग बोले- 2020 तक जमीन हमारी थी; भारत सरकार क्या बोली?

Mon, 29 Jun 2026 08:50 AM IST
प्रशांत तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रशांत तिवारी Updated Mon, 29 Jun 2026 08:50 AM IST
सार

अरुणाचल प्रदेश के नाह आदिवासी समुदाय ने आरोप लगाया है कि चीन की PLA ने अपर सुबनसिरी जिले के टक्सिंग सीमा क्षेत्र में उनकी पुश्तैनी जमीन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया है। समुदाय का दावा है कि कई पारंपरिक चरागाह, शिकार क्षेत्र और धार्मिक महत्व वाले स्थान अब चीनी नियंत्रण में हैं। 

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Border Dispute Claims PLA camp in Arunachal locals say land was theirs until 2020 what Indian government say
अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना के निर्माण का दावा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

अरुणाचल प्रदेश के नाह आदिवासी समुदाय ने अपर सुबनसिरी ज़िले में अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास चीन की कथित घुसपैठ का दावा किया है। समुदाय का दावा है कि पिछले छह वर्षों में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने उनकी पशु चराने, शिकार करने और खेती करने वाली पुश्तैनी जमीन के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया है।

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ज्ञापन में पुश्तैनी जमीन पर कब्जे का आरोप
हाल ही में अपर सुबनसिरी के डिप्टी कमिश्नर को सौंपे गए ज्ञापन में नाह वेलफेयर सोसाइटी (NWS) के अध्यक्ष केरू चाडर ने कहा, 'हमारी पुश्तैनी ज़मीनें जहां हम कुछ वर्ष पहले तक शिकार करते थे, जंगल से उपज इकट्ठा करते थे और अपने मवेशियों को चराते थे अब चीनी PLA के कब्ज़े में हैं। NWS ने पांच स्थानों पर चीन की गतिविधियों का आरोप लगाया है। संगठन के अनुसार ये सभी क्षेत्र अपर सुबनसिरी जिले के टक्सिंग रेवेन्यू सर्कल के अंतर्गत आते हैं। उनका कहना है कि चीनी सरकार रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इलाकों पर कब्जा कर अंतरराष्ट्रीय सीमा के साथ अपने नियंत्रण का लगातार विस्तार कर रही है।
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विधायक बोले-आधिकारिक पुष्टि जरूरी
वहीं, इस पूरे मामले पर नाचो के विधायक नाकाप नालो ने कहा कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए इसकी आधिकारिक पुष्टि होना आवश्यक है। प्रशासन को इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि करनी चाहिए। चूंकि यह राष्ट्रीय महत्व का विषय है, इसलिए स्वाभाविक रूप से इसे लेकर गंभीर चिंताएं हैं। 
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'हमारी जमीन पर चीन का कब्जा'
घुसपैठ के संबंध में NWS ने आरोप लगाया कि पिछले 10 से 15 वर्षों के दौरान टक्सिंग सीमा क्षेत्र में चीन की गतिविधिया लगातार बढ़ी हैं। संगठन का दावा है कि इसका उद्देश्य अधिक से अधिक भारतीय भूमि पर कब्जा करना है। आदिवासी संगठन के अनुसार, वर्ष 2020 तक जिन क्षेत्रों पर उनका पारंपरिक नियंत्रण था, उनमें से कई स्थानों पर अब कथित तौर पर PLA का कब्जा हो चुका है।

धार्मिक और रणनीतिक महत्व वाले क्षेत्रों का भी जिक्र
संगठन ने कहा कि असाफिला क्षेत्र के ओयिंग, पनियार (चुजार्टा क्षेत्र), मारपान (मारनाफे), पोट्रांग (झील) और टिडिंगटैंग (TG) जैसे इलाके धीरे-धीरे चीनी घुसपैठ की चपेट में आ गए हैं। उनका दावा है कि ये सभी स्थान टक्सिंग मुख्यालय के निकट स्थित हैं और इनमें से कुछ स्थानीय समुदाय के लिए धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं।

'भारतीय क्षेत्र में सड़कें और सैन्य कैंप बनाए गए'
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि चीनी सेना ने भारतीय क्षेत्र के भीतर सड़कें और सैन्य कैंप भी बनाए हैं। केरू चाडर ने कहा कि हमें अपनी सेना पर पूरा भरोसा है। हमारे जवान वर्षों से हमारी भूमि की रक्षा कर रहे हैं, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में उनकी कोशिशें पर्याप्त साबित नहीं हो रही हैं। टक्सिंग क्षेत्र में चीनी PLA की गतिविधियों की रफ्तार और उनका उद्देश्य बेहद चिंताजनक है। हमें डर है कि हमारी पुश्तैनी जमीन धीरे-धीरे हमारे हाथों से निकलती जा रही है।'


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प्रशासन और सरकार की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं
इस मामले को लेकर जब प्रशासन से बात करने की कोशिश की गई तो न तो जिला प्रशासन और न ही अरुणाचल प्रदेश सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है। डिप्टी कमिश्नर गैंबो टैसो सहित जिले के वरिष्ठ अधिकारी भी इस मामले पर टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं हो सके। 

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