{"_id":"6aa3d85d4045ca34280ab02c","slug":"brics-summit-2026-pm-modi-and-russian-president-vladimir-putin-hold-a-bilateral-meeting-2026-09-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"भारत मंडपम में मोदी-पुतिन की मुलाकात: पीएम ने राष्ट्रपति को गले लगाया, भेंट की तमिल कवि तिरुवल्लूर की किताब","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
भारत मंडपम में मोदी-पुतिन की मुलाकात: पीएम ने राष्ट्रपति को गले लगाया, भेंट की तमिल कवि तिरुवल्लूर की किताब
Fri, 11 Sep 2026 04:01 PM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: राहुल कुमार
Updated Fri, 11 Sep 2026 04:01 PM IST
सार
भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात हुई। पीएम मोदी ने पुतिन का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए उन्हें गले लगाया। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक में ऊर्जा, रक्षा, व्यापार और सहयोग से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। इस दौरान पीएम ने रूसी राष्ट्रपति को तमिल कवि तिरुवल्लूर की प्रसिद्ध रचना तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद भी भेंट किया। क्या यह मुलाकात भारत-रूस संबंधों को नई दिशा देगी? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
विज्ञापन
पीएम मोदी और पुतिन
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारत की मेजबानी में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में मुलाकात की। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाकर स्वागत किया। इसके बाद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बैठक शुरू हुई। बैठक में ऊर्जा, रक्षा, व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर बातचीत हो रही है। इससे पहले पीएम मोदी ने पुतिन को एक पुस्तक भी भेंट की।
सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के बीच द्विपक्षीय बैठक में इन अहम मुद्दों पर हुई चर्चा
विज्ञापन
पुतिन को पीएम मोदी को कौन सी पुस्तक भेंट की?
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को तिरुक्कुरल का रूसी भाषा में अनुवादित संस्करण भी भेंट किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह किताब मानव मूल्यों से जुड़ी हुई है, यह हमारे संबंधों को आगे बढ़ाएगी। आपके लिए इसका रूसी भाषा में अनुवाद कराया गया है। यह किताब तमिल भाषा का सबसे प्रसिद्ध और सम्मानित नीति ग्रंथ है। इसे महान संत तिरुवल्लुवर ने लगभग दो हजार वर्ष पूर्व लिखा था। इसे तमिल साहित्य में तमिल वेद (पॉय्यामोजी या सत्य वाणी) भी कहा जाता है। यह किसी विशिष्ट धर्म, जाति या संप्रदाय से जुड़ा ग्रंथ नहीं है, बल्कि पूरी मानव जाति के लिए एक सार्वभौमिक आचार संहिता है।
विज्ञापन
तिरुक्कुरल किताब क्या सीख देती है?
- कठोर और कड़वे शब्दों के बजाय हमेशा मीठे और कल्याणकारी शब्द बोलें। झूठ न बोलना और मन, वचन व कर्म में सत्य का पालन करना सबसे बड़ी तपस्या है।
- भाग्य के भरोसे बैठने के बजाय कठिन परिश्रम और लगन को प्राथमिकता दी गई है। वल्लुवर कहते हैं कि यदि मनुष्य निरंतर प्रयास करे, तो वह भाग्य की बाधाओं को भी पार कर सकता है।
- किसी भी जीव को चोट न पहुँचाना, शाकाहार का पालन करना और दूसरों के प्रति दया का भाव रखना मनुष्य का सर्वोच्च कर्तव्य है।
- सच्चे मित्र वे हैं जो संकट के समय बिना बुलाए साथ खड़े हों। बुरे लोगों की संगति से बचने और ज्ञानी लोगों का साथ चुनने की सीख इसमें दी गई है।
- राजा या शासक के लिए न्यायप्रियता, निष्पक्षता, जनता की सुरक्षा और सक्षम सलाहकारों की पहचान करना आवश्यक माना गया है।
- उपकार को कभी न भूलना मनुष्य का धर्म है। कृतघ्नता (किए गए उपकार को भूल जाना) को सबसे बड़ा पाप बताया गया है। बुरा करने वाले को भी अपनी भलाई और क्षमा से लज्जित करना ही सच्ची बड़प्पन है।
विज्ञापन
सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के बीच द्विपक्षीय बैठक में इन अहम मुद्दों पर हुई चर्चा
- 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को 100 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य।
- भारत में INNOPROM का आयोजन, ताकि रूस के साथ औद्योगिक सहयोग बढ़ाया जा सके।
- रेल क्षेत्र और सुरंग निर्माण में सहयोग बढ़ाना।
- स्टील क्षेत्र में पूरी वैल्यू चेन विकसित करने पर जोर।
- दोनों देशों की कंपनियों के बीच कारोबार के नए अवसर बढ़ाना।
- रूसी बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ाना।
- नागरिक परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग मजबूत करना, जिसमें ईंधन और संयंत्रों के पूरे जीवनचक्र से जुड़ा सहयोग शामिल है।
- रोजगार और श्रमिकों की आवाजाही बढ़ाना, खासकर रूस में भारतीय कुशल कामगारों की संख्या बढ़ाने पर चर्चा।