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सीएपीएफ: मांगों को लेकर पूर्व अर्धसैनिक कर्मी करेंगे सांकेतिक भूख हड़ताल, पीएमओ-गृह मंत्रालय को दिया नोटिस

Tue, 25 Aug 2026 08:09 PM IST
Devesh Tripathi डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Devesh Tripathi Updated Tue, 25 Aug 2026 08:09 PM IST
सार

केंद्रीय अर्धसैनिक बलों से जुड़े पूर्व कर्मियों और उनके संगठनों ने पुरानी पेंशन समेत विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने का फैसला किया है। संगठन की ओर से प्रधानमंत्री कार्यालय और गृह मंत्रालय को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन की सूचना दी गई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों पर सरकार की ओर से अपेक्षित संवाद नहीं हुआ है।

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CAPF Ex-Paramilitary Association Plans Hunger Strike at Jantar Mantar Notifies PMO MHA
पुरानी पेंशन बहाली की मांग फिर तेज - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में पुरानी पेंशन बहाली व सीएपीएफ के नए कानून की वापसी को लेकर जंतर-मंतर पर सात दिन की सांकेतिक भूख हड़ताल के लिए मंगलवार को पीएमओ और गृह मंत्रालय को नोटिस दे दिया गया है। अलायन्स ऑफ ऑल एक्स पैरा मिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने दोनों शीर्ष कार्यालयों में यह नोटिस दिया है। एसोसिएशन ने पिछले शनिवार को एक बैठक के बाद यह घोषणा की थी कि दिल्ली के जंतर मंतर पर 12 नवंबर से 18 नवंबर तक भूख हड़ताल की जाएगी। 
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एसोसिएशन के महासचिव के मुताबिक, भूख हड़ताल और प्रदर्शन का निर्णय अलायन्स के कोर कमेटी सदस्यों के द्वारा सर्वसम्मति से लिया गया है। सात दिन तक धरना/सांकेतिक भूख हड़ताल की जाएगी। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की विभिन्न मांगों को लेकर एसोसिएशन द्वारा 11 वर्षों से लगातार सड़कों पर संघर्ष किया जा रहा है, लेकिन सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रही। देश भर के सैकड़ों पैरा मिलिट्री परिवार सात दिन के लिए दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देंगे।  
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ज्ञापन में लगाए गए क्या आरोप?
सीएपीएफ की लंबित मांगों के लिए पीएमओ और गृह मंत्री कार्यालय को अनेक ज्ञापन भेजे गए हैं। संसद भवन से लेकर सरहदों की चाक चौबंद सुरक्षा करने वाले सीएपीएफ जवानों के हकों की बात, सरकार नहीं करना चाहती। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने अभी तक एसोसिएशन को बातचीत के लिए नहीं बुलाया। ऐसी स्थिति में पूर्व अर्धसैनिकों और सीएपीएफ परिवारों के पास जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन एवं सांकेतिक भूख हड़ताल के अलावा कोई दूसरा रास्ता ही नहीं बचा है।
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सीएपीएफ से जुड़े अदालतों के फैसलों को भी लागू किया जा रहा। 'पुरानी पेंशन बहाली' का फैसला दिल्ली हाईकोर्ट ने 11 जनवरी 2023 को सुनाया था। उस फैसले में हाईकोर्ट ने सीएपीएफ को 'भारत संघ के सशस्त्र बल' मानते हुए ओपीएस लागू करने की बात कही थी। इस फैसले के खिलाफ, केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में चली गई। अभी तक वह फैसला लंबित है। सर्वोच्च अदालत ने 23 मई 2025 को कैडर अधिकारियों बाबत एक अहम फैसला दिया था। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में केवल एनएफएफयू (नॉन फंक्शनल फाइनेंशियल अपग्रेडेशन) के लिए नहीं, बल्कि सभी कार्यों के लिए 'ओजीएएस पैटर्न' लागू किया जाए। 

केंद्र सरकार के नए एक्ट को क्यों कहा काला कानून?
शीर्ष अदालत ने सरकार को 'एसएजी' (वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड) स्तर तक के पदों पर आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को अगले दो साल में धीरे-धीरे कम करने का निर्देश दिया था। वजह, इन बलों में आईपीएस के चलते कैडर अधिकारियों की पदोन्नति में ठहराव देखने को मिल रहा है। इस फैसले के खिलाफ सरकार ने संसद में नया सीएपीएफ एक्ट पारित करा दिया। 


सीएपीएफ के पूर्व कैडर अफसर इसे 'काला कानून' बता रहे हैं। सीआरपीएफ के पूर्व एडीजी एचआर सिंह ने कहा, ओपीएस, ओजीएएस व दूसरे हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर एसोसिएशन द्वारा विभिन्न राज्यों का दौरा किया जाएगा। राज्यों की राजधानियों में प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर लोगों को सीएपीएफ जवानों व कैडर अफसरों के प्रति सरकार के सौतेले व्यवहार के बारे में जानकारी दी जाएगी। आईटीबीपी के पूर्व आईजी आनंद निंबाड़िया ने कहा, हम सरकार से केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के लिए अलग से ट्रिब्यूनल की मांग करते हैं। इसके साथ ही अलग से 'पे कमीशन' का प्रस्ताव रखते हैं।
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