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SIT न बनने के बाद जवाहर बाग कांड की जांच सीबीआई के हवाले

Fri, 03 Mar 2017 04:59 AM IST
जवाहर बाग कांड की जांच सीबीआई के हवाले
जवाहर बाग कांड की जांच सीबीआई के हवाले Updated Fri, 03 Mar 2017 04:59 AM IST
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CBI Investigation Ordered by High Court For Mathura Jawahar Bagh Incident
इलाबाद हाई कोर्ट - फोटो : wikipedia
मथुरा के जवाहर बाग कांड की पुलिस जांच से असंतुष्ट हाईकोर्ट ने इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी है। कोर्ट ने केंद्रीय जांच एजेंसी को मामले की तत्परता से जांच कर दो माह में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। डीजीपी और प्रदेश सरकार से कहा है कि इस मामले से जुड़ी सभी पत्रावलियां सीबीआई को सौंप दी जाएं। इसके अलावा निचली अदालत में चल रही जवाहर बाग कांड के मुकदमे की कार्यवाही पर भी रोक लगा दी है।
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जवाहर बाग को अवैध कब्जे से खाली कराने के दौरान दो पुलिस अधिकारियों सहित 28 लोगों की मौत को हाईकोर्ट ने गंभीर मामला मानते हुए कहा है कि पुलिस की जांच में ढेरों खामियां हैं, जिससे किसी भी अभियुक्त को सजा मिलने की उम्मीद नहीं है। इसलिए प्रकरण की सीबीआई जांच जरूरी है।
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जवाहर बाग की घटना में पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट में कई जनहित याचिकाएं दाखिल की गई हैं।

अधिवक्ता विजयपाल सिंह तोमर सहित अन्य लोगों की याचिकाओं पर चीफ जस्टिस डीबी भोसले और जस्टिस यशवंत वर्मा की पीठ ने लंबी सुनवाई के बाद 20 फरवरी को अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया था। बृहस्पतिवार को अदालत ने सुबह दस बजे ही फैसला सुनाते हुए जांच सीबीआई को करने का आदेश दिया। अपने विस्तृत आदेश में कोर्ट ने सीबीआई को दो टीमें बनाने के लिए कहा है। पहली टीम दो जून 2016 को जवाहर बाग खाली कराने के दौरान हुई घटना की जांच करेगी जबकि दूसरी टीम इस बात की जांच करेगी कि किस प्रकार से दो वर्ष से अधिक समय तक रामवृक्ष यादव और उसके समर्थक जवाहर बाग पर कब्जा जमाए रहे और सरकार मूक दर्शक बन सब कुछ देखती रही।
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सरकार ने क्यों नहीं बनाई एसआईटी

CBI Investigation Ordered by High Court For Mathura Jawahar Bagh Incident
जवाहर बाग कांड - फोटो : amarujala
कोर्ट ने सीबीआई से उन अधिकारियों को चिन्हित करने के लिए कहा, जिन्होंने खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट और जिला प्रशासन द्वारा सरकार को भेजे गए पत्रों की अनदेखी की तथा कोई कार्रवाई नहीं की।

राज्य सरकार को ऐसे सभी पत्राचार और खुफिया रिपोर्ट सीबीआई को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है ताकि दोषी अधिकारियों की पहचान हो सके। पीठ ने याचिकाओं की पोषणीयता पर उठाई गई इस आपत्ति को भी खारिज कर दिया किया याचिका एक राजनीतिक दल के कार्यकर्ता द्वारा दाखिल की गई है। कहा कि इस याचिका पर एक अन्य पीठ द्वारा पहले ही संज्ञान लिया जा चुका था। इसके अलावा अन्य याचिकाओं में भी इसी प्रकार की मांग की गई है।

हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार की ओर से महाधिवक्ता द्वारा एसआईटी के गठन के प्रस्ताव पर भी सवाल उठाते हुए कहा है कि पुलिस की जांच में ढेरों खामियां हैं। महाधिवक्ता ने स्वयं एसआईटी से जांच कराने की बात स्वीकार की है, मगर हमें नहीं लगता है कि जब सरकार की भूमिका स्वयं संदेहास्पद है तो एसआईटी निष्पक्ष जांच कर सकेगी। दूसरे यह कि एसआईटी गठित करने का अधिकार सरकार के पास है। वह घटना के बाद किसी भी समय एसआईटी गठित कर सकती थी मगर सरकार आठ महीने तक किस बात का इंतजार करती रही।  
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