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जनगणना: एआई से जातियों की गणना होगी आसान? करोड़ों आंकड़ों का चुटकी में होगा विश्लेषण
Thu, 03 Sep 2026 06:08 AM IST
निर्मल कांत
अजीत खरे, नई दिल्ली।
अजीत खरे, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 03 Sep 2026 06:08 AM IST
सार
जनगणना इस बार सिर्फ आबादी गिनने तक सीमित नहीं रहेगी। जातियों और उपजातियों के करोड़ों आंकड़ों को व्यवस्थित करने के लिए एआई की मदद ली जाएगी। इससे जटिल जातिगत आंकड़ों का विश्लेषण पहले के मुकाबले काफी तेजी से हो सकेगा। पढ़िए रिपोर्ट-
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जनगणना
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एडॉब स्टॉक
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विस्तार
जनगणना न केवल देश का पहला डिजिटल जनसांख्यिकीय सर्वेक्षण होगी, बल्कि प्रशासनिक व तकनीकी इतिहास में नया अध्याय भी लिखेगी। करोड़ों की आबादी से एकत्र विशाल आंकड़ों के तेजी से विश्लेषण और भिन्न वर्तनी वाली जातियों व उपजातियों के वर्गीकरण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और आधुनिक डाटा एनालिटिक्स टूल्स के इस्तेमाल की योजना बनाई गई है। खास तौर पर जातिगत जनगणना के तौर तरीकों से जिस जटिलता के जाल बनने की आशंका जताई जा रही है, एआई उसे तोड़ कर निष्कर्ष देगा
प्रस्तावित जनगणना में एआई और मशीन लर्निंग एल्गोरिदम इस प्रक्रिया को बेहद तेज करेंगे। एल्गोरिदम समान उच्चारण और मिलते-जुलते शब्दों वाली प्रविष्टियों की पहचान कर उन्हें स्वचलित रूप से प्रासंगिक श्रेणियों में क्लस्टर कर सकेंगे। जिस विश्लेषण प्रक्रिया में पहले वर्षों का समय लगता था, उसे आधुनिक डाटा और भाषा-संसाधन (एनएलपी) टूल्स के जरिये काफी कम समय में पूरा किया जा सकेगा। करोड़ो मे बिखरे डाटा को व्यवस्थित करने के लिए इंटेलिजेंट कैरेक्टर रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल होगा। माना जा रहा है कि आंकड़ों के त्वरित प्रसंस्करण से रिपोर्ट जल्द सामने आ सकेगी, जिसे आगामी चुनावों के राजनीतिक चक्र से जोड़कर देखा जा रहा है।
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प्रस्तावित जनगणना में एआई और मशीन लर्निंग एल्गोरिदम इस प्रक्रिया को बेहद तेज करेंगे। एल्गोरिदम समान उच्चारण और मिलते-जुलते शब्दों वाली प्रविष्टियों की पहचान कर उन्हें स्वचलित रूप से प्रासंगिक श्रेणियों में क्लस्टर कर सकेंगे। जिस विश्लेषण प्रक्रिया में पहले वर्षों का समय लगता था, उसे आधुनिक डाटा और भाषा-संसाधन (एनएलपी) टूल्स के जरिये काफी कम समय में पूरा किया जा सकेगा। करोड़ो मे बिखरे डाटा को व्यवस्थित करने के लिए इंटेलिजेंट कैरेक्टर रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल होगा। माना जा रहा है कि आंकड़ों के त्वरित प्रसंस्करण से रिपोर्ट जल्द सामने आ सकेगी, जिसे आगामी चुनावों के राजनीतिक चक्र से जोड़कर देखा जा रहा है।
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