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Supreme Court: 'स्वास्थ्य आधार पर रिहाई नहीं', सोनम वांगचुक की सेहत सामान्य; केंद्र ने अदालत को दी जानकारी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Wed, 11 Feb 2026 04:26 PM IST
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सार

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की सेहत सामान्य है और उन्हें स्वास्थ्य आधार पर रिहा करना संभव नहीं है। सरकार का कहना है कि एनएसए के तहत उनकी हिरासत के आधार अभी भी लागू हैं।

Centre Tells Supreme Court Sonam Wangchuk Fit and Healthy, Cannot Be Released on Health Grounds
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई
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विस्तार

केंद्र ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य पूरी तरह सामान्य है और उन्हें स्वास्थ्य आधार पर रिहा करना संभव नहीं है। सरकार ने बताया कि उनकी हिरासत का आदेश अभी भी लागू है और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत उन्हें रोके रखने के लिए पर्याप्त कारण मौजूद हैं।

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केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और पीबी वराले की बेंच को बताया कि वांगचुक की हेल्थ चेकअप 24 बार की गई है और वे फिट, हेल्दी और किसी भी प्रकार के गंभीर जोखिम से मुक्त हैं। उन्होंने कहा कि वांगचुक को केवल कुछ पाचन संबंधी दिक्कतें थीं, जिनका इलाज किया जा रहा है। मेहता ने अदालत से कहा स्वास्थ्य के आधार पर किसी अपवाद की अनुमति नहीं दी जा सकती। हिरासत आदेश के आधार अभी भी जारी हैं। हमने इसका गंभीरता से अध्ययन किया है।
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सुप्रीम कोर्ट में वांगचुक के हिंसा संबंधी आरोपों पर बहस
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने अदालत को बताया कि वांगचुक ने हिंसक प्रदर्शन में युवाओं को उकसाने का काम किया। उन्होंने नेपाल और अरब स्प्रिंग के उदाहरण देते हुए युवाओं में हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। इसके जवाब में बेंच ने कहा कि वांगचुक ने सीधे हिंसा को बढ़ावा नहीं दिया, बल्कि उन्होंने केवल युवाओं के विचारों का हवाला दिया। बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा 'वह कह रहे हैं कि युवाओं का मानना है कि शांतिपूर्ण तरीके असर नहीं दिखा रहे। पूरी बात को पढ़िए, कहीं सीधे हिंसा की ओर उकसाने का प्रमाण नहीं मिलता।'

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NSA के तहत हुई थी हिरासत

  • सुप्रीम कोर्ट में वांगचुक की पत्नी गितांजलि अंगमो ने हाबियस कॉर्पस याचिका दायर की थी।
  • जिसमें उनके पति की हिरासत को अवैध घोषित करने की मांग की गई थी।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत केंद्र और राज्य सरकारें किसी व्यक्ति को रोक सकती हैं यदि उनके कार्य भारत की सुरक्षा के लिए हानिकारक माने जाएं।
  • कानून के अनुसार अधिकतम हिरासत अवधि 12 महीने होती है, हालांकि इसे पहले भी समाप्त किया जा सकता है।
  • अंगमो ने कहा कि पिछले साल 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा के लिए वांगचुक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
  • उन्होंने बताया कि वांगचुक ने अपने सोशल मीडिया हैंडल के जरिए हिंसा की निंदा की।
  • उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लद्दाख की पांच साल की तपस्या और शांतिपूर्ण प्रयासों को विफल कर देगा।

कब हिरासत में लिए गए थे सोनम वांगचुक?
वांगचुक को 26 सितंबर, 2025 को हिरासत में लिया गया था। यह लेह में हिंसा के दो दिन बाद हुआ, जिसमें चार लोगों की मौत हुई थी। सरकार ने उन पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया। याचिका में कहा गया कि यह पूरी तरह असंगत है कि वांगचुक को अचानक निशाना बनाया गया। उन्होंने लद्दाख और भारत में शिक्षा, नवाचार और पर्यावरण संरक्षण में तीन दशकों से योगदान दिया है।

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