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BMC Mayor Post: पहली बार भाजपा को मेयर बनाने का मौका, शिंदे की ढाई-ढाई साल की शर्त; फिर होटल पॉलिटिक्स शुरू

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: हिमांशु चंदेल Updated Sat, 17 Jan 2026 08:17 PM IST
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सार

Hotel Politics For BMC Mayor: बीएमसी चुनावों में 'युति' को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद मुंबई की सियासत गरमा गई है। शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने महापौर पद के लिए अपनी दावेदारी मजबूत करने के संकेत दिए हैं। पार्षदों को होटल में ठहराए जाने से होटल पॉलिटिक्स की चर्चा तेज है।

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एकनाथ शिंदे और सीएम फडणवीस - फोटो : ANI/X
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विस्तार
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चार दशकों बाद मुंबई में महापौर बनने का सपना भारतीय जनता पार्टी का पूरा होता तो दिख रहा है लेकिन शर्तों के साथ। हालांकि, महापौर महायुति गठबंधन से होगा, पर भाजपा के लिए यह मौका फिलहाल हाथ से निकल भी सकता है। दरअसल, भाजपा की सहयोगी शिवसेना ने अब ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले पर महापौर पद का पासा फेंक दिया है। इससे मामला जटिल हो गया है। इस बीच, एकनाथ शिंदे ने अपने सभी 29 नगरसेवकों को बांद्रा के एक लग्जरी होटल में ठहरा दिया है।
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मेयर पद पर शिवसेना की दावेदारी क्यों?
मुंबई में 89 सीटें भाजपा और 29 सीटें शिवसेना जीती हैं। बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत से यह चार ज्यादा है। ऐसे में अगर शिंदे के महापौर पद वाले फॉर्मूले पर भाजपा सहमत नहीं होती है तो उसे फिर महापौर बनाने के लिए 25 सीटों की जरूरत पड़ेगी, जो मुश्किल होगा। इस गणित के जरिये एकनाथ शिंदे फायदा उठाने की फिराक में हैं। वह अपना मेयर बनाने के लिए भाजपा पर दबाव डाल सकते हैं। शिंदे गुट के प्रवक्ताओं और दूसरे नेताओं ने भी पहले ही संकेत दे दिया है कि मुंबई का मेयर शिवसेना (शिंदे गुट) से होना चाहिए, क्योंकि यह बाल ठाकरे की विरासत है। वह अविभाजित शिवसेना के बीएमसी में लंबे शासन की बात कर रहे थे।
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सूत्रों के अनुसार पार्टी इसे अपने संस्थापक बाल ठाकरे की जन्मशताब्दी से जोड़कर देख रही है। 23 जनवरी को बाल ठाकरे की 100वीं जयंती है और शिवसेना इसे उनके प्रति सम्मान के रूप में पेश करना चाहती है। अविभाजित शिवसेना लंबे समय तक बीएमसी पर काबिज रही थी, लेकिन 2022 में पार्टी टूटने के बाद समीकरण बदल गए।

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चुनावी नतीजों में किसे कितनी ताकत मिली?
बीएमसी चुनावों में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। भाजपा ने 89 सीटें जीतीं, जबकि उसकी सहयोगी शिंदे शिवसेना को 29 सीटें मिलीं। इस तरह महायुति बीएमसी में सबसे बड़ा गठबंधन बन गई। दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना ने एमएनएस के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा और 65 सीटें जीतीं। कांग्रेस को 24 सीटों पर संतोष करना पड़ा। वोट शेयर के लिहाज से भी भाजपा 45.22 प्रतिशत के साथ सबसे आगे रही।

नतीजे साफ होने के बाद शिंदे बोलते हुए ज्यादा सतर्क दिखे। उन्होंने मेयर पद के सवाल पर कहा, हमारा एजेंडा विकास है। हमने महायुति के तौर पर चुनाव लड़ा और मुंबई के हित में जो सबसे अच्छा होगा, उस पर फैसला करने के लिए हम साथ बैठेंगे। इस गोलमोल जवाब के बाद से ही कयास लग रहे थे कि महापौर पद पर पेंच फंस सकता है। विश्लेषकों के मुताबिक, एक चीज जो भाजपा को बैकफुट पर ला सकती है, वह यह है कि एकनाथ शिंदे के गढ़ ठाणे में उनकी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया है। 131 सदस्यों वाली ठाणे मनपा में 70 से ज्यादा सीटों के साथ बहुमत के आंकड़े के ऊपर है और अपना मेयर चुन सकती है। यहां भाजपा के पास सिर्फ 28 सदस्य ही हैं।

मेयर के फैसले में क्या अड़चन?
  • अभी मेयर पद को लेकर अंतिम बातचीत शुरू नहीं हो सकी है।
  • नगर निगमों में मेयर पद के लिए आरक्षण की स्थिति साफ नहीं है।
  • नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण को लेकर टिप्पणी की थी।
  • कई नगर निकायों में 50 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण पर सवाल उठे हैं।
  • इस मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2026 में होनी है।

फडणवीस दावोस रवाना, 24 के बाद तय होगा महापौर
मुख्यमंत्री फडणवीस ने साफ किया है कि मेयर पद को लेकर कोई विवाद नहीं है और फैसला सामूहिक रूप से लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह निर्णय वे खुद, उपमुख्यमंत्री शिंदे और पार्टी के वरिष्ठ नेता मिलकर करेंगे। सियासी गहमागहमी के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस शनिवार को स्विट्जरलैंड के दावोस के लिए रवाना हो गए। दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच की बैठक में मुख्यमंत्री अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ शामिल होंगे। फडणवीस 24 जनवरी को लौटेंगे। ऐसे में माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री के लौटने के बाद ही तय होगा कि मुंबई का महापौर कौन बनेगा।

बीएमसी चुनावों के नतीजे महाराष्ट्र की राजनीति में महायुति की मजबूती दिखाते हैं। होटल पॉलिटिक्स और मेयर पद की खींचतान यह संकेत देती है कि आने वाले दिनों में मुंबई की सियासत और गर्म हो सकती है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि महायुति 29 में से 25 नगर निगमों में मेयर बनाएगी।

कैबिनेट बैठक में नहीं पहुंचे शिंदे
मुंबई में महापौर पद को लेकर शुरू सियासी हलचल के बीच सीएम देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में शनिवार को कैबिनेट की बैठक हुई, लेकिन उसमें राज्य सरकार में प्रमुख घटक और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे शामिल नहीं हुए। बताया गया कि शिंदे की सेहत ठीक नहीं है। शिवसेना के कुछ मंत्री मंत्रालय में मौजूद होने के बावजूद मंत्रिमंडल की बैठक में शामिल नहीं हुए। वहीं, दूसरे उपमुख्यमंत्री अजीत पवार भी कैबिनेट की बैठक में नहीं पहुंचे। इस गहमागहमी से सियासत गरमा गई है और इसे निहितार्थ निकाले जा रहे हैं।

74,000 करोड़ की सत्ता पर नजर
मुंबई मनपा का बजट 74,000 करोड़ रुपये से अधिक है। ऐसे में यहां हर पार्टियां अपना कब्जा जमाना चाहती हैं। हालांकि, पिछले तीन दशकों से यहां पर शिवसेना का कब्जा है। शिवसेना के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, पार्षदों को होटल में इसलिए ठहराया जा रहा है,ताकि वे चुनाव प्रचार की थकान के बाद आराम कर सकें। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि वे वहां कितने दिन रहेंगे। पार्टी के एक अन्य पदाधिकारी ने कहा, इस कदम का उद्देश्य नवनिर्वाचित सदस्यों को होटल से परिचित कराना भी है।

महाराष्ट्र निकाय चुनावों में भाजपा ने जीतीं 1,425 सीटें, दबदबा कायम  
महाराष्ट्र में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) समेत 29 महानगरपालिकाओं के चुनावों में शानदार प्रदर्शन करते हुए भाजपा ने कुल 2,869 सीटों में से 1,425 सीटों पर जीत दर्ज की है। इस जीत के साथ भाजपा ने शहरी इलाकों में अपना राजनीतिक दबदबा कायम कर लिया है। बीएमसी चुनाव में हर दूसरा वोट भाजपा को मिला है। वहीं, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का प्रदर्शन भी उल्लेखनीय रहा। शिंदे गुट उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) पछाड़ कर और 399 सीटें जीतकर दूसरे स्थान पर रहा। राज्य में नगर निकाय के चुनाव नतीजों में 29 में से 17 महानगरपालिकाओं में भाजपा ने अकेले बहुमत हासिल किया है।

कांग्रेस को तीन में बहुमत: कांग्रेस ने भिवंडी में 30, लातूर में 43 और चंद्रपुर में 27 सीटें हासिल की है। मालेगांव में पहली बार चुनाव में उतरी इस्लाम पार्टी को 84 में से 35 सीटें मिली हैं, जो सपा की मदद से अपना महापौर बनाने की कोशिश में है।

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