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SIR: कर्नाटक में एसआईआर पर कांग्रेस और चुनाव आयोग आमने-सामने, प्रियांक खरगे ने EC से पूछे कौन-कौन से सवाल?

Mon, 29 Jun 2026 03:22 PM IST
प्रशांत तिवारी आईएएनएस, बंगलूरु
आईएएनएस, बंगलूरु Published by: प्रशांत तिवारी Updated Mon, 29 Jun 2026 03:22 PM IST
सार

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से पहले चुनाव आयोग से कांग्रेस द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देने की मांग की है। उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया, कानूनी अधिकारों और एआई के इस्तेमाल की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह मतदाता सूची के पुनरीक्षण के खिलाफ नहीं, बल्कि निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया की पक्षधर है।

 
 

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Congress and Election Commission at loggerheads over SIR in Karnataka what questions Priyank Kharge ask
प्रियांक खरगे, गृह मंत्री, कर्नाटक - फोटो : ANI

विस्तार

कर्नाटक में मंगलवार से शुरू होने वाली चुनाव आयोग (ईसीआई) की प्रस्तावित मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान से पहले राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने सोमवार को कहा कि कांग्रेस द्वारा उठाई गई चिंताओं का समाधान किए बिना चुनाव आयोग को इस प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए। 

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किनके सवालों का जवाब चाहते हैं खरगे?
बंगलूरु में पत्रकारों से बातचीत के दौरान खरगे ने कहा कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के साथ चर्चा करेगी। उन्होंने कहा चुनाव आयोग को पहले एसआईआर प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देना चाहिए। इन चिंताओं का समाधान होने के बाद ही कर्नाटक में मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़नी चाहिए।
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कर्नाटक में कब से शुरू होने वाला है SIR?

इस बीच चुनाव आयोग ने राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान शुरू करने की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। कार्यक्रम के तहत 29 जून से 29 जुलाई तक घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया जाएगा। कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अंबु कुमार भी इस अभियान को लेकर बेंगलुरु में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करेंगे। कांग्रेस ने पूरे कर्नाटक में जागरूकता अभियान शुरू किया है और अपने कार्यकर्ताओं से मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया के दौरान सतर्क रहने की अपील की है।
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किन-किन मुद्दों पर मांगा स्पष्टीकरण?
खरगे ने बताया कि कांग्रेस पहले ही मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखित रूप में अपनी आपत्तियां सौंप चुकी है, जिसमें आठ से दस प्रमुख मुद्दे उठाए गए हैं। हमने कई बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है। इनमें यह भी शामिल है कि चुनाव आयोग 'तार्किक विसंगति' से क्या आशय रखता है। किसी मतदाता का नाम किस आधार पर मतदाता सूची से हटाया जा सकता है? यदि किसी मतदाता का नाम हटाया जाना है, तो उसे कानूनी नोटिस दिया जाना चाहिए। यदि कोई विवाद हो, तो संबंधित व्यक्ति को सक्षम न्यायाधिकरण के समक्ष अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए।' केवल नाम की वर्तनी में त्रुटि या मामूली विसंगति के आधार पर किसी मतदाता को उसके मताधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
 
'हम पुनरीक्षण के खिलाफ नहीं हैं'

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए खरगे ने स्पष्ट किया कि पार्टी को अब तक चुनाव आयोग ने स्पष्टीकरण नहीं दिया है। हमने अपनी आपत्तियां केवल भारत निर्वाचन आयोग ही नहीं, बल्कि राज्य निर्वाचन आयोग को भी लिखित रूप में भेजी हैं। इसके बावजूद हमें अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। इसके बावजूद कांग्रेस मतदाता सूची के पुनरीक्षण का विरोध नहीं कर रही है। हम यह नहीं कह रहे कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण नहीं होना चाहिए। मतदाता सूची को अद्यतन करना चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है और एक स्वच्छ तथा सटीक मतदाता सूची तैयार करना उसका कर्तव्य भी है। लेकिन केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में जिस तरह एसआईआर अभियान चलाया गया, उसे लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। 


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एआई के इस्तेमाल पर भी उठाए सवाल
मतदाता सूची के पुनरीक्षण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए खरगे ने इसकी पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यदि मतदाता सूची से नामों की पहचान करने और उन्हें हटाने के लिए एआई सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जा रहा है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि उस सॉफ्टवेयर का ऑडिट किसने किया है और वह किस तरह काम करता है। लगभग 89 लाख मतदाताओं के नाम बिना पर्याप्त अवसर दिए मतदाता सूची से हटा दिए गए। उन्हें न्यायाधिकरण में फैसले को चुनौती देने का भी समुचित मौका नहीं मिला। यहां तक कि एक सेवानिवृत्त न्यायाधिकरण न्यायाधीश ने यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया कि ऐसे मामलों के निपटारे में चार वर्ष तक लग सकते हैं। ऐसे हालात में चुनाव आयोग को एसआईआर अभियान आगे बढ़ाने से पहले हमारे सभी सवालों का जवाब देना चाहिए।"

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