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ब्रिक्स पर दो हिस्सों में बंटी कांग्रेस: चिदंबरम बोले- भारत को क्या मिला; थरूर ने बताया देश के लिए क्यों अहम?
Fri, 11 Sep 2026 11:31 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Fri, 11 Sep 2026 11:31 AM IST
सार
ब्रिक्स को लेकर कांग्रेस दो हिस्सों में बंट गई है। चिदंबरम पर इस समिट को लेकर सवाल उठाया। तो इस पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर जवाब दिया। उन्होंने इस समिट को भारत के लिए अहम बताया। भारत की अध्यक्षता और शिखर सम्मेलन की मेजबानी को उन्होंने प्रतिष्ठा का अवसर बताया। आईए जानतें हैं उन्होंने और क्या कहा?
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पी चिदंबरम और शशि थरूर
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने ब्रिक्स की अहमियत बताते हुए कहा कि यह समूह ग्लोबल साउथ के देशों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ में 100 से ज्यादा देश हैं, लेकिन ब्रिक्स में शामिल 11 प्रमुख देश अलग-अलग विचारों और क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। भारत इस समय ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और ऐसे में इसकी मेजबानी देश के लिए खास महत्व रखती है।
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दुनिया की 41 फीसदी जीडीपी का प्रतिनिधित्व
शशि थरूर ने कहा कि 11 ब्रिक्स देश मिलकर दुनिया की ज्यादातर आबादी और वैश्विक जीडीपी के करीब 41 फीसदी हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनके मुताबिक, यही वजह है कि ब्रिक्स को दुनिया के बाकी देशों को भी गंभीरता से लेना चाहिए।
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भारत के लिए प्रतिष्ठा का बड़ा मौका
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी को थरूर ने भारत के लिए प्रतिष्ठा का विषय बताया। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर इस आयोजन की काफी अहमियत है और इसकी मेजबानी करना कोई छोटी बात नहीं है। यह ऐसा आयोजन है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर है।
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थरूर ने क्या कहा?
थरूर ने कहा कि करीब एक दर्जन राष्ट्राध्यक्षों और सरकारों के प्रमुखों का सम्मेलन में पहुंचना भी बड़ी बात है। इसमें सिर्फ ब्रिक्स के सदस्य देशों के नेता ही नहीं, बल्कि कुछ पर्यवेक्षक देशों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भी शामिल हो रहे हैं।
थरूर के मुताबिक, इतने देशों के शीर्ष नेताओं को एक मंच पर लाना भारत की कूटनीतिक क्षमता को दिखाता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक मंच पर अलग-अलग देशों को साथ लाने की भारत की यह क्षमता अपने आप में काफी अहम है।
पी चिदंबरम ने क्या कहा था?
बता दें कि बुधवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने हालिया ब्रिक्स शिखर सम्मेलनों से भारत को मिले लाभों पर सवाल उठाया। चिदंबरम ने कहा कि उन्होंने पिछली दो-तीन बैठकों से कोई खास नतीजा नहीं देखा है।
उन्होंने बताया कि भारत ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ), जी20 और क्वाड सहित कई बहुपक्षीय समूहों का हिस्सा है, लेकिन उन्होंने सवाल किया कि इनसे देश को कौन से ठोस लाभ मिले हैं। इस पर भाजपा ने चिदंबरम पर हमला बोलते हुए। उन्हें उन नाराज फूफा लोगों में शामिल बताया जो भारत की प्रगति को पचा नहीं सकते।
पी. चिदंबरम के बयान पर सलमान खुर्शीद ने क्या कहा?
वहीं, पी. चिदंबरम के बयान पर कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा, 'चिदंबरम बहुत अनुभवी और गहरी समझ रखने वाले व्यक्ति हैं। हम सभी उनकी बात को बहुत गंभीरता से लेते हैं। अगर वे कोई चेतावनी दे रहे हैं, तो हमें उसे सही भावना से लेना चाहिए। इनमें से कई मल्टीनेशनल ऑर्गनाइजेशन सिर्फ चर्चा कर पाते हैं, लेकिन उनसे कोई नतीजा नहीं निकलता। इसीलिए मैं कह रहा हूं कि हमें लीडरशिप की जरूरत है ताकि ऐसे नतीजे मिलें जिन पर हम गर्व कर सकें। मौजूदा सरकार को चिदंबरम के सुझावों पर ध्यान देना चाहिए।'
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान रूस की मौजूदगी और यूक्रेन व पश्चिम एशिया संघर्ष पर पूर्व विदेश मंत्री और कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि रूस भारत का समय की कसौटी पर खरा उतरा मित्र देश रहा है। हम इस रिश्ते को सिर्फ उनसे मिलने वाले सस्ते ईंधन तक सीमित नहीं रख सकते। अब हम उन्हें भी जरूरत के समय पेट्रोल आदि की आपूर्ति कर रहे हैं, और हमारे यूरोपीय साझेदार भी इस बात को भली-भांति समझते हैं।
सलमान खुर्शीद ने दी मिली-जुली प्रतिक्रिया
सलमान खुर्शीद ने भारत की कूटनीतिक भूमिका पर जोर देते हुए आगे कहा कि हमारा मानना है कि यूरोपीय और पश्चिम एशियाई संघर्ष को समाप्त करने के लिए भारत और अधिक प्रयास कर सकता था और भारत को रूस तथा यूक्रेन दोनों से सही प्रतिक्रियाएं भी मिली हैं। यह कोई केवल सरकार का मुद्दा नहीं बल्कि राष्ट्रीय मुद्दा है, क्योंकि सम्मेलन में पूरा भारत भाग ले रहा है। चूंकि विपक्ष भी देश की जनता का प्रतिनिधित्व करता है, ऐसे में सम्मेलन की तैयारियों या अनौपचारिक बैठकों के दौरान विपक्ष के नेता को भी साथ रखा जाता तो यह ज्यादा बेहतर होता। हालांकि मुझे नहीं लगता कि यह मौजूदा सरकार की शैली है, फिर भी देखते हैं आगे क्या परिणाम निकलकर आते हैं।
चीन यात्रा पर स्पष्टीकरण की मांग
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने भारत-चीन संबंधों और भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी पर बड़ा बयान दिया है। चीनी नेतृत्व की भारत यात्रा पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रमोद तिवारी ने कहा कि हर किसी का अपना दृष्टिकोण होता है। हमारा मानना है कि अगर चीनी राष्ट्रपति और शीर्ष नेतृत्व का दौरा हुआ है, तो इस मुलाकात और यात्रा को लेकर स्पष्टीकरण दिया जाना चाहिए। सम्मेलन समाप्त होने के बाद हम इस पर विस्तार से बात करेंगे कि इस दौरे से कुछ हासिल हुआ या नहीं।'
उन्होंने यह भी कहा कि रूस हमारे लिए हमेशा से एक बेहद भरोसेमंद और विश्वसनीय साझेदार रहा है। मुझे पूरा विश्वास है कि ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर रूस के साथ हमारी अत्यंत सकारात्मक और परिणामदायक चर्चा होगी।