कमलनाथ और सिंधिया के बीच सुलह कराएंगी सोनिया गांधी, लोगों के बीच जा रहे गलत संदेश से हैं चिंतित
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पार्टी के भीतर बढ़ रहे अंतर्विरोध को लेकर बेहद संवेदनशील हैं। उन्हें लग रहा है कि इससे पार्टी और देश में गलत संदेश जा रहा है। उधर, राजस्थान में उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच तालमेल नहीं बन पा रहा है, तो वहीं मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया और मुख्यमंत्री कमलनाथ की केमिस्ट्री फिट नहीं हो पा रही है। कांग्रेस अध्यक्ष ने अब इसे ठीक करने का मन बनाया है। मंगलवार, बुधवार को वह कमलनाथ और ज्योतिरादित्य से मिलकर इसका समाधान निकालने का प्रयास करेंगी
दिग्विजय सिंह के इशारे पर कमलनाथ
कमलनाथ ज्योतिरादित्य के पिता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री माधव राव सिंधिया के वक्त से राजनीति में है। इस बार लोकसभा चुनाव में ज्योतिरादित्य अपनी सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली गुना-शिवपुरी सीट से चुनाव हार गए थे। सिंधिया की ग्वालियर चंबल संभाग में अच्छी पकड़ है और उन्हें लगातार महसूस हो रहा है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ उनकी राजनीति को हाशिए पर पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री कमलनाथ के पास भी ज्योतिरादित्य के व्यवहार को लेकर कुछ गंभीर शिकायतें हैं। ज्योतिरादित्य खेमे का आरोप है कि कमलनाथ राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के इशारे पर काम कर रहे हैं। इसके कारण उनके कैबिनेट के सहयोगियों को दिक्कत हो रही है।
कराएंगी जिम्मेदारी का अहसास
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी इन दोनों नेताओं से मिलकर उन्हें अपनी जिम्मेदारी का अहसास कराएंगी। माना जा रहा है कि सोनिया गांधी से मिले मंत्र के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में मच रहा तूफान कुछ समय के लिए ठहर जाएगी। कांग्रेस अध्यक्ष का मानना है कि इस तरह के हालात का विरोधी अधिक फायदा उठाते हैं। इससे जनता के बीच में भी पार्टी तथा नेताओं की छवि खराब होती है। इसलिए वरिष्ठ और युवा नेताओं को टकराव के बजाय अपनी जिम्मेदारी समझकर व्यवहार करना चाहिए। माना जा रहा है कि कमलनाथ और ज्योतिरादित्य के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट और अशोक गहलोत से भी चर्चा हो सकती हैं।

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