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किस्तों में बढ़ा रहे दाम: 'जनता की जेब पर लगातार वार', ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र पर बरसे राहुल गांधी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Mon, 25 May 2026 12:22 PM IST
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सार

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव खत्म होने के बाद सरकार किस्तों में ईंधन के दाम बढ़ाकर जनता की जेब पर बोझ डाल रही है।

Continuous attack on the public's pockets, Rahul Gandhi lashed out at the Centre over rising fuel prices
राहुल गांधी ने केंद्र पर साधा निशाना - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 10 दिनों के भीतर चौथी बार हुई बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार किस्तों में ईंधन के दाम बढ़ाकर आम लोगों की जेब पर चुपचाप डाका डाल रही है।

राहुल ने क्या कहा?

विपक्षी नेता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि सरकार ईंधन के दाम किस्तों में बढ़ा रही है, ताकि आम लोगों की जेब पर लगातार बोझ पड़ता रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कई महीनों से आर्थिक संकट की चेतावनी दी जा रही थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनावों में व्यस्त थे और चुनाव खत्म होते ही पेट्रोल-डीजल के दाम 8 रुपये तक बढ़ा दिए गए।
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खरगे ने केंद्र पर साधा निशाना

इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ईंधन की कीमतों में हर बढ़ोतरी घरेलू बजट पर सीधा असर डालती है और इसका प्रभाव पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। खड़गे ने आरोप लगाया कि किसान से लेकर छोटे उद्योगों तक हर वर्ग भाजपा सरकार की लूट का बोझ झेल रहा है।
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पेट्रोल-डीजल के दाम कितने बढ़े?

बीते कुछ दिनों में लगातार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। 15 मई को पेट्रोल और डीजल के दाम 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए गए थे। इसके बाद 19 मई को 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई। वहीं 23 मई को पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा किया गया।

जानकारों के मुताबिक वैश्विक कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों का असर परिवहन और लॉजिस्टिक्स लागत पर पड़ सकता है, जिससे खुदरा महंगाई और घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
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