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सीआरपीएफ की पहली महिला लड़ाकू बटालियन के गठन के चार दशक पूरे, पढ़िये ऐतिहासिक उपलब्धि की कहानी
Tue, 22 Sep 2026 03:53 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला
Published by: जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 22 Sep 2026 03:53 PM IST
सार
इस साल भारत की पहली महिला लड़ाकू बटालियन के गठन के चार दशक पूरे हो रहे हैं। 40 वर्ष पहले गठित एक अग्रणी बटालियन से, सीआरपीएफ की महिला परिचालन उपस्थिति देश भर में काफी विस्तारित हुई है।
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केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की महिला बटालियन।
- फोटो : एएनआई
विस्तार
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) इस वर्ष एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर रहा है। यह उपलब्धि भारत की पहली महिला लड़ाकू बटालियन के गठन के चार दशक पूरे होने की है। बल में इस उपलब्धि को एक जश्न की तरह मनाया जा रहा है। 1986 में गठित इस अभूतपूर्व कदम ने कई गहरी जड़ों वाली बाधाओं को तोड़ते हुए राष्ट्र के सुरक्षा ढांचे के भीतर महिलाओं के सशक्तिकरण, परिचालन समावेशिता और समान अवसर को पुनर्परिभाषित किया।
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40 वर्ष पहले गठित एक अग्रणी बटालियन से, सीआरपीएफ की महिला परिचालन उपस्थिति देश भर में काफी विस्तारित हुई है।
मौजूदा समय में 6 विशेष महिला बटालियनें महत्वपूर्ण सुरक्षा क्षेत्रों में पूरी तरह से तैनात हैं। भीड़ नियंत्रण और दंगा-रोधी कार्यों के लिए प्रत्येक रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) इकाई में 4 महिला टीमें तैनात की गई हैं।
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एकीकृत महिला दल अग्रिम पंक्ति में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जिनमें समर्पित बस्तरिया बल भी शामिल है, जो वामपंथी उग्रवाद से निपटने में लगा हुआ है। पिछले चार दशकों में, इन बहादुर कर्मियों ने हर महत्वपूर्ण परिस्थिति में अपनी सेवाएं दी हैं, यह साबित करते हुए कि प्रतिबद्धता, अनुशासन और वीरता लिंग भेद से परे हैं।
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वीरता और शौर्य की विरासत
- सीआरपीएफ की महिला योद्धाओं का भारत के सैन्य और सुरक्षा इतिहास में अद्वितीय स्थान है।
- अशोक चक्र (मरणोपरांत): कांस्टेबल कमलेश कुमारी एकमात्र अशोक चक्र प्राप्तकर्ता हैं। उन्हें भारत के सर्वोच्च शांति और वीरता पुरस्कार, सीआरपीएफ का यह पुरस्कार संसद पर हुए आतंकवादी हमले के दौरान उनके सर्वोच्च बलिदान और अदम्य साहस के लिए दिया गया।
- सेना पदक और प्रशस्ति पत्र: कांस्टेबल विमला देवी (सेना पदक) और लांस नायक राजवान देवी (सेना प्रमुख प्रशस्ति पत्र) ने श्रीलंका के एलिफेंट पास चेक पोस्ट (1988) में महत्वपूर्ण परिचालन भूमिका निभाई।
- अग्रिम पंक्ति में वीरता पुरस्कार: कांस्टेबल बिंदू कुमरे को वर्ष 2001 में श्रीनगर हवाई अड्डे पर हुए आतंकवादी हमले के दौरान असाधारण वीरता के लिए वीरता पदक से सम्मानित किया गया।
- स्मृति समारोह: इस 40वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में, सीआरपीएफ 25 सितंबर, 2026 को एक विशेष स्मृति समारोह का आयोजन करेगी। इस समारोह के दौरान, सीआरपीएफ के महानिदेशक, सीआरपीएफ परिवार कल्याण संघ (सीडब्ल्यूए) के अध्यक्ष के साथ, पूर्व और सेवारत महिला कर्मियों को उनके असाधारण योगदान और बलिदान के लिए सम्मानित करेंगे।
- सीआरपीएफ महिला कर्मियों को भारत सरकार की महिला सशक्तिकरण नीति का पालन करते हुए हर भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है और राष्ट्र के प्रति उनकी अटूट निष्ठा को सलाम करती है।