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CYBER CRIME: 4 साल में साइबर क्राइम, 50035 से 101928 हुए दर्ज मामले, आईटी-बेईमानी-धोखा देने के केसों का ग्राफ
Wed, 22 Jul 2026 07:00 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Wed, 22 Jul 2026 07:00 PM IST
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साइबर अपराध
- फोटो : अमर उजाला
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देश में साइबर अपराध के मामलों का ग्राफ तेजी से बढ़ता जा रहा है। 'आईटी-बेईमानी-धोखा', ऐसी साइबर घटनाओं से संबंधित पीड़ितों की संख्या ज्यादा है। साल 2021 में साइबर क्राइम के 50035 केस दर्ज किए गए थे तो वहीं 2024 में ऐसे मामलों की संख्या 101928 पर पहुंच गई। पांच साल में कंप्यूटर से संबंधित साइबर अपराधों की संख्या 21926 से 36920 हो गई है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश में सभी प्रकार के साइबर अपराधों से समन्वित और व्यापक तरीके से निपटने के लिए एक संबद्ध कार्यालय के रूप में 'भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र' (आई4सी) की स्थापना की है। 'राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल' (एनसीआरपी) को आई4सी के एक भाग के रूप में लॉन्च किया गया है। इसका उद्देश्य है कि जनता सभी प्रकार के साइबर अपराधों से संबंधित घटनाओं की रिपोर्ट कर सके। इसमें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
साल दर्ज साइबर मामले
2020 50035
2021 52974
2022 65893
2023 86420
2024 101928
तेजी से बढ़ी साइबर क्राइम के इन केसों की संख्या
अपराध 2020 2024
आईटी 29643 44872
धोखा 10395 29758
बेईमानी 4480 19296
आईपीसी/बीएनएस 20201 56747
कंप्यूटर संबंधी 21926 36920
11158 करोड़ से अधिक की वित्तीय राशि बचाई
अंतराराष्ट्रीय वित्तीय आयोग (I4सी) के अंतर्गत 'नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली' (सीएफसीएफआरएमएस) को वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग और जालसाजों द्वारा धन की हेराफेरी को रोकने के लिए वर्ष 2021 में शुरू किया गया था। I4सी द्वारा संचालित सीएफसीएफआरएमएस के अनुसार, 30 जून 2026 तक 32.80 लाख से अधिक शिकायतों में 11,158 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय राशि बचाई जा चुकी है। ऑनलाइन साइबर शिकायतें दर्ज करने में सहायता के लिए एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर '1930' भी शुरू किया गया है। वर्ष 2021 से 2025 तक, एनसीआरपी पर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायतों की कुल संख्या 6589201 से अधिक है। रिपोर्ट की गई कुल राशि 55050 करोड़ रुपये से ज्यादा है। ग्रहणाधिकार के रूप में चिह्नित कुल राशि 8189 करोड़ रुपये से अधिक है, जबकि पंजीकृत एफआईआर की संख्या 195760 से ज्यादा है।
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29837 से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी
केंद्र सरकार द्वारा साइबर अपराध की जांच और केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच समन्वय को मजबूत करने के लिए सार्थक कदम उठाए गए हैं। समन्वय प्लेटफॉर्म को प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस) प्लेटफॉर्म, डेटा भंडार और साइबर अपराध डेटा साझाकरण और विश्लेषण के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समन्वय प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करने के लिए चालू किया गया है। यह विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में साइबर अपराध शिकायतों में शामिल अपराधों और अपराधियों के बीच अंतरराज्यीय सम्बंधों का विश्लेषण-आधारित विश्लेषण प्रदान करता है। 'प्रतिबिंब' मॉड्यूल अपराधियों और अपराध अवसंरचना के स्थानों को मानचित्र पर प्रदर्शित करता है। इससे क्षेत्राधिकार अधिकारियों को जानकारी मिलती है। यह मॉड्यूल कानून प्रवर्तन एजेंसियों को आई4सी और अन्य लघु एवं मध्यम उद्यमों से तकनीकी-कानूनी सहायता प्राप्त करने में भी सुविधा प्रदान करता है। इसके परिणामस्वरूप 29,837 से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है और 233593 से अधिक साइबर जांच सहायता अनुरोध प्राप्त हुए हैं।
सात संयुक्त साइबर समन्वय दल गठित
सरकार या उसकी एजेंसी द्वारा आईटी मध्यस्थों को नोटिस भेजने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए 'सहयोग' पोर्टल शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य किसी भी गैरकानूनी कार्य को करने के लिए उपयोग की जा रही किसी भी सूचना, डेटा या संचार लिंक तक पहुंच को हटाने या अक्षम करने में सुविधा प्रदान करना है। साइबर अपराध के हॉटस्पॉट/बहुक्षेत्रीय मुद्दों वाले क्षेत्रों के आधार पर पूरे देश को कवर करते हुए, मेवात, जामताड़ा, अहमदाबाद, हैदराबाद, चंडीगढ़, विशाखापत्तनम और गुवाहाटी के लिए सूचना एवं संचार नियंत्रण (आई4सी) के तहत सात संयुक्त साइबर समन्वय दल (जेसीसीटी) गठित किए गए हैं। इसमें राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया है, ताकि राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय ढांचे को बढ़ाया जा सके।
सरकार द्वारा की गई पहल
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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश में सभी प्रकार के साइबर अपराधों से समन्वित और व्यापक तरीके से निपटने के लिए एक संबद्ध कार्यालय के रूप में 'भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र' (आई4सी) की स्थापना की है। 'राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल' (एनसीआरपी) को आई4सी के एक भाग के रूप में लॉन्च किया गया है। इसका उद्देश्य है कि जनता सभी प्रकार के साइबर अपराधों से संबंधित घटनाओं की रिपोर्ट कर सके। इसमें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
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साल दर्ज साइबर मामले
2020 50035
2021 52974
2022 65893
2023 86420
2024 101928
तेजी से बढ़ी साइबर क्राइम के इन केसों की संख्या
अपराध 2020 2024
आईटी 29643 44872
धोखा 10395 29758
बेईमानी 4480 19296
आईपीसी/बीएनएस 20201 56747
कंप्यूटर संबंधी 21926 36920
11158 करोड़ से अधिक की वित्तीय राशि बचाई
अंतराराष्ट्रीय वित्तीय आयोग (I4सी) के अंतर्गत 'नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली' (सीएफसीएफआरएमएस) को वित्तीय धोखाधड़ी की तत्काल रिपोर्टिंग और जालसाजों द्वारा धन की हेराफेरी को रोकने के लिए वर्ष 2021 में शुरू किया गया था। I4सी द्वारा संचालित सीएफसीएफआरएमएस के अनुसार, 30 जून 2026 तक 32.80 लाख से अधिक शिकायतों में 11,158 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय राशि बचाई जा चुकी है। ऑनलाइन साइबर शिकायतें दर्ज करने में सहायता के लिए एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर '1930' भी शुरू किया गया है। वर्ष 2021 से 2025 तक, एनसीआरपी पर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायतों की कुल संख्या 6589201 से अधिक है। रिपोर्ट की गई कुल राशि 55050 करोड़ रुपये से ज्यादा है। ग्रहणाधिकार के रूप में चिह्नित कुल राशि 8189 करोड़ रुपये से अधिक है, जबकि पंजीकृत एफआईआर की संख्या 195760 से ज्यादा है।
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29837 से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी
केंद्र सरकार द्वारा साइबर अपराध की जांच और केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच समन्वय को मजबूत करने के लिए सार्थक कदम उठाए गए हैं। समन्वय प्लेटफॉर्म को प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस) प्लेटफॉर्म, डेटा भंडार और साइबर अपराध डेटा साझाकरण और विश्लेषण के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समन्वय प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करने के लिए चालू किया गया है। यह विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में साइबर अपराध शिकायतों में शामिल अपराधों और अपराधियों के बीच अंतरराज्यीय सम्बंधों का विश्लेषण-आधारित विश्लेषण प्रदान करता है। 'प्रतिबिंब' मॉड्यूल अपराधियों और अपराध अवसंरचना के स्थानों को मानचित्र पर प्रदर्शित करता है। इससे क्षेत्राधिकार अधिकारियों को जानकारी मिलती है। यह मॉड्यूल कानून प्रवर्तन एजेंसियों को आई4सी और अन्य लघु एवं मध्यम उद्यमों से तकनीकी-कानूनी सहायता प्राप्त करने में भी सुविधा प्रदान करता है। इसके परिणामस्वरूप 29,837 से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है और 233593 से अधिक साइबर जांच सहायता अनुरोध प्राप्त हुए हैं।
सात संयुक्त साइबर समन्वय दल गठित
सरकार या उसकी एजेंसी द्वारा आईटी मध्यस्थों को नोटिस भेजने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए 'सहयोग' पोर्टल शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य किसी भी गैरकानूनी कार्य को करने के लिए उपयोग की जा रही किसी भी सूचना, डेटा या संचार लिंक तक पहुंच को हटाने या अक्षम करने में सुविधा प्रदान करना है। साइबर अपराध के हॉटस्पॉट/बहुक्षेत्रीय मुद्दों वाले क्षेत्रों के आधार पर पूरे देश को कवर करते हुए, मेवात, जामताड़ा, अहमदाबाद, हैदराबाद, चंडीगढ़, विशाखापत्तनम और गुवाहाटी के लिए सूचना एवं संचार नियंत्रण (आई4सी) के तहत सात संयुक्त साइबर समन्वय दल (जेसीसीटी) गठित किए गए हैं। इसमें राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया है, ताकि राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय ढांचे को बढ़ाया जा सके।
सरकार द्वारा की गई पहल
- -पुलिस अधिकारियों/न्यायिक अधिकारियों की क्षमता निर्माण हेतु 'साइट्रेन' पोर्टल नामक विशाल मुक्त ऑनलाइन पाठ्यक्रम (एमओओसी) मंच को आई4सी के अंतर्गत विकसित किया गया है।
- -30 जून 2026 तक इस पोर्टल पर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 1,63,344 से अधिक पुलिस अधिकारी/न्यायिक अधिकारी पंजीकृत हैं।
- -पोर्टल के माध्यम से 1,61,957 से अधिक प्रमाण पत्र जारी।
- -साइबर सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त साइबर कमांडो की एक विशेष शाखा स्थापित ।
- -अब तक, 281 साइबर कमांडो को ट्रेनिंग दी गई है।
- -गृह मंत्रालय का आई4सी कार्यक्रम, सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने, क्षमता निर्माण को बढ़ाने आदि के लिए नियमित रूप से 'स्टेट कनेक्ट', 'थाना कनेक्ट' और पीयर लर्निंग सत्रों का आयोजन कर रहा है।
- -गृह मंत्रालय ने 'महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध रोकथाम (सीसीपीडब्ल्यूसी)' योजना के तहत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को क्षमता निर्माण के लिए 132.93 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता जारी की है।
- -इस सहायता राशि में साइबर फोरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना, कनिष्ठ साइबर सलाहकारों की नियुक्ति और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के कर्मियों, लोक अभियोजकों और न्यायिक अधिकारियों के प्रशिक्षण जैसे कार्य शामिल हैं।
- -33 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में साइबर फोरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं।
- -24600 से अधिक कानून प्रवर्तन एजेंसी कर्मियों, न्यायिक अधिकारियों और अभियोजकों को साइबर अपराध जागरूकता, जांच, फोरेंसिक आदि का प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।
- -पीड़ितों को धोखाधड़ी से हड़पी गई धनराशि की शीघ्र वापसी के लिए धन बहाली मॉड्यूल और बैंक खातों को फ्रीज करने और राशि पर गिरवी चिह्न लगाने से सम्बंधित शिकायतों के समय पर निपटान के लिए शिकायत निवारण मॉड्यूल अप्रैल 2026 से चालू कर दिए गए हैं।