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Bengal SIR: 'चुनाव आयोग ने भाजपा के AI टूल किए इस्तेमाल, हर दिन बदल रहे एसआईआर के नियम', ममता बनर्जी का आरोप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता।
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 13 Jan 2026 05:50 PM IST
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सार
Bengal SIR: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि उसने भाजपा के एआई टूल का इस्तेमाल कर कई नाम हटाए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि नियम बदलकर बंगाल में अलग तरीके क्यों अपनाए जा रहे हैं और निवास प्रमाण पत्र की अनुमति क्यों नहीं दी जा रही। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री बनर्जी ने क्या-क्या कहा-
ममता बनर्जी
- फोटो : PTI
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विस्तार
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को एक बार फिर चुनाव आयोग (ईसीआई) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के आंकड़ों में नामों की विसंगति को दूर करने के लिए भाजपा के एआई टूल का इस्तेमाल किया।
'चुनाव आयोग ने कैसे हटाए आधे मतदाताओं के नाम?'
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एसआईआर के दौरान जिन शादीशुदा महिलाओं ने अपना उपनाम बदला, चुनाव आयोग ने उनके नाम हटा दिए। कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ममता बनर्जी ने कहा, मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) को जवाब देना चाहिए कि वह आधे मतदाताओं के नाम कैसे हटा सकते हैं और यह कैसे तय कर सकते हैं कि सरकार कौन बनाएगा।
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'व्हाट्सएप के भरोसे चल रहा चुनाव आयोग'
मुख्यमंत्री ने कहा, चुनाव आयोग भाजपा के एजेंट की तरह काम कर रहा है और बिना कारण बताए एकतरफा तरीके से नाम हटा रहा है। उन्होंने आगे कहा, चुनाव आयोग व्हाट्सएप के भरोसे चल रहा है और हर दिन कई बार एसआईआर के नियम बदल रहा है।
'निवास प्रमाण पत्र की बंगाल में अनुमति क्यों नहीं?'
उन्होंने आगे सवाल किया, एसआईआर के नियमों के अनुसार सूक्ष्म-पर्यवेक्षक (माइक्रो-ऑब्जर्वर) की अनुमति नहीं है, फिर भी इन्हें केवल बंगाल में तैनात किया गया। बिहार के एसआईआर में निवास प्रमाण पत्र की अनुमति है, तो बंगाल में क्यों नहीं। उन्होंने कहा, तथ्यात्मक असंगति मूल एसआईआर सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा नहीं थी, इसे बाद में जोड़ा गया।
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'चुनाव आयोग ने कैसे हटाए आधे मतदाताओं के नाम?'
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एसआईआर के दौरान जिन शादीशुदा महिलाओं ने अपना उपनाम बदला, चुनाव आयोग ने उनके नाम हटा दिए। कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ममता बनर्जी ने कहा, मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) को जवाब देना चाहिए कि वह आधे मतदाताओं के नाम कैसे हटा सकते हैं और यह कैसे तय कर सकते हैं कि सरकार कौन बनाएगा।
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'व्हाट्सएप के भरोसे चल रहा चुनाव आयोग'
मुख्यमंत्री ने कहा, चुनाव आयोग भाजपा के एजेंट की तरह काम कर रहा है और बिना कारण बताए एकतरफा तरीके से नाम हटा रहा है। उन्होंने आगे कहा, चुनाव आयोग व्हाट्सएप के भरोसे चल रहा है और हर दिन कई बार एसआईआर के नियम बदल रहा है।
'निवास प्रमाण पत्र की बंगाल में अनुमति क्यों नहीं?'
उन्होंने आगे सवाल किया, एसआईआर के नियमों के अनुसार सूक्ष्म-पर्यवेक्षक (माइक्रो-ऑब्जर्वर) की अनुमति नहीं है, फिर भी इन्हें केवल बंगाल में तैनात किया गया। बिहार के एसआईआर में निवास प्रमाण पत्र की अनुमति है, तो बंगाल में क्यों नहीं। उन्होंने कहा, तथ्यात्मक असंगति मूल एसआईआर सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा नहीं थी, इसे बाद में जोड़ा गया।