{"_id":"6a3a8677b31b38ae5d085131","slug":"ed-lending-banks-suffer-a-loss-of-356-31-crore-loan-funds-misappropriated-2026-06-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"ED: लोन देने वाले बैंकों को 356.31 करोड़ रुपये का नुकसान, ऐसे हड़पा लोन का पैसा, 35 करोड़ की संपत्ति जब्त","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
ED: लोन देने वाले बैंकों को 356.31 करोड़ रुपये का नुकसान, ऐसे हड़पा लोन का पैसा, 35 करोड़ की संपत्ति जब्त
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Rahul Kumar
Updated Tue, 23 Jun 2026 06:43 PM IST
विज्ञापन
ईडी
- फोटो : ईडी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
ईडी के इंदौर सब-जोनल ऑफिस ने धनलक्ष्मी सॉल्वैक्स प्राइवेट लिमिटेड, उसके डायरेक्टरों और उससे जुड़ी कंपनियों/लोगों के ख़िलाफ़ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के सिलसिले में 35.52 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त किया है। आरोपियों ने लोन देने वाले बैंकों को 356.31 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा दिया। लोन का पैसा मनमर्जी के काम में लगा दिया।
ईडी की जांच, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अगुवाई वाले बैंकों के एक ग्रुप (जिसमें यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया, बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र और बैंक ऑफ़ बड़ौदा भी शामिल थे) की शिकायत पर सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आरोपियों ने ग्रुप के बैंकों से धोखाधड़ी करके कई तरह की क्रेडिट सुविधाएं ली हैं। लोन देने वाले बैंकों को 356.31 करोड़ रुपये का ग़लत तरीके से नुकसान पहुंचाया गया। ईडी की जांच से पता चला कि धनलक्ष्मी सॉल्वैक्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके प्रमोटरों/डायरेक्टरों ने कथित तौर पर गलत जानकारी देकर बैंक लोन और क्रेडिट सुविधाएँ हासिल कीं और बाद में लोन के पैसे को अपनी ही दूसरी कंपनियों के नेटवर्क के ज़रिए दूसरी जगहों पर भेज दिया या हड़प लिया।
जांच में बड़े पैमाने पर सर्कुलर ट्रेडिंग, फ़र्ज़ी लेन-देन, अकोमोडेशन एंट्री और लेटर ऑफ़ क्रेडिट के गलत इस्तेमाल का भी पता चला, जिसके ज़रिए आरोपियों और उनके साथियों के कंट्रोल वाली अलग-अलग कंपनियों के माध्यम से अपराध से हुई कमाई को मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए ठिकाने लगाया गया। ईडी ने 26 फरवरी को मध्य प्रदेश के इंदौर और देवास में पांच जगहों पर छापेमारी की थी। तलाशी के दौरान कई अहम दस्तावेज़, डिजिटल डिवाइस और वित्तीय रिकॉर्ड ज़ब्त किए गए। जब्त की गई संपत्तियों में मध्य प्रदेश के इंदौर और शाजापुर ज़िलों में स्थित रिहायशी फ़्लैट और ज़मीन के टुकड़े शामिल हैं, जो आरोपियों के नाम पर हैं।
विज्ञापन
ईडी की जांच, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अगुवाई वाले बैंकों के एक ग्रुप (जिसमें यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया, बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र और बैंक ऑफ़ बड़ौदा भी शामिल थे) की शिकायत पर सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सीबीआई) द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आरोपियों ने ग्रुप के बैंकों से धोखाधड़ी करके कई तरह की क्रेडिट सुविधाएं ली हैं। लोन देने वाले बैंकों को 356.31 करोड़ रुपये का ग़लत तरीके से नुकसान पहुंचाया गया। ईडी की जांच से पता चला कि धनलक्ष्मी सॉल्वैक्स प्राइवेट लिमिटेड और उसके प्रमोटरों/डायरेक्टरों ने कथित तौर पर गलत जानकारी देकर बैंक लोन और क्रेडिट सुविधाएँ हासिल कीं और बाद में लोन के पैसे को अपनी ही दूसरी कंपनियों के नेटवर्क के ज़रिए दूसरी जगहों पर भेज दिया या हड़प लिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
जांच में बड़े पैमाने पर सर्कुलर ट्रेडिंग, फ़र्ज़ी लेन-देन, अकोमोडेशन एंट्री और लेटर ऑफ़ क्रेडिट के गलत इस्तेमाल का भी पता चला, जिसके ज़रिए आरोपियों और उनके साथियों के कंट्रोल वाली अलग-अलग कंपनियों के माध्यम से अपराध से हुई कमाई को मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए ठिकाने लगाया गया। ईडी ने 26 फरवरी को मध्य प्रदेश के इंदौर और देवास में पांच जगहों पर छापेमारी की थी। तलाशी के दौरान कई अहम दस्तावेज़, डिजिटल डिवाइस और वित्तीय रिकॉर्ड ज़ब्त किए गए। जब्त की गई संपत्तियों में मध्य प्रदेश के इंदौर और शाजापुर ज़िलों में स्थित रिहायशी फ़्लैट और ज़मीन के टुकड़े शामिल हैं, जो आरोपियों के नाम पर हैं।