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ईडी की बड़ी कार्रवाई: 14 ठिकानों पर हुई छापेमारी, एनएचएआई में करोड़ों की फर्जी टोल वसूली का मामला
Wed, 02 Sep 2026 08:40 AM IST
नितिन गौतम
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Wed, 02 Sep 2026 08:40 AM IST
सार
ईडी ने देशभर के 14 ठिकानों पर छापेमारी की है। यह छापेमारी टोल वसूली में हुई धांधली और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में की गई है। आइए जानते हैं कि क्या है ये पूरा मामला और कैसे सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये की लूट की गई।
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ईडी की छापेमारी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई करते हुए देशभर में 14 ठिकानों पर छापेमारी की है। यह छापेमारी एनएचएआई टोल प्लाजा पर फर्जी वसूली से जुड़े मामले में की गई है। ईडी ने धन शोधन विरोधी कानून (पीएमएलए एक्ट, 2002) के तहत यह कार्रवाई की है। ईडी ने आज उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू, मध्य प्रदेश, एनसीआर और कोलकाता में अलग-अलग ठिकानों पर छापा मारा।
फर्जी सॉफ्टवेयर बनाकर किया करोड़ों का खेल
दरअसल आरोपियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के समानांतर एक फर्जी सॉफ्टवेयर बनाकर करोड़ों रुपये की अवैध वसूली की। यूपी एसटीएफ ने इस धांधली का भंडाफोड़ किया था। जांच में पता चला कि आरोपियों ने टोल वसूली का सिर्फ पांच प्रतिशत सरकारी रिकॉर्ड में दिखाया और बाकी 95 प्रतिशत का घोटाला हो रहा था। ईडी ने इस मामले में दर्ज दो पुलिस एफआईआर पर संज्ञान लेते हुए मामले की जांच शुरू की।
फोरेंसिक जांच में हुई धांधली की पुष्टि
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि फर्जी सॉफ्टवेयर से टोल रसीदें बनाकर फर्जीवाड़ा किया गया। टोल से हुई कमाई को आधिकारिक अकाउंटिंग सिस्टम से बाहर डायवर्ट कर दिया गया। ईडी की जांच में फोरेंसिक और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के रिकॉर्ड से फर्जी सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल की पुष्टि हो चुकी है। ईडी की ताजा छापेमारी का मकसद फर्जीवाड़े से जुड़े डिजिटल सबूत जुटाना, आरोपियों की पहचान करना और अपराध से हुई कमाई का पता लगाना है।
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ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले में ED ने की छापेमारी
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को ऑनलाइन सट्टेबाजी फर्म 'पारीमैच' और कुछ अन्य कंपनियों से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पेमेंट कंपनियों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और कंपनी सेक्रेटरी के यहां कई राज्यों में छापेमारी की। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में पांच, दिल्ली-NCR में चार, राजस्थान में दो और गुजरात में एक जगह पर छापेमारी की गई।
अधिकारियों के मुताबिक, जांच के दायरे में वे पेमेंट कंपनियां हैं, जिन पर आरोप है कि उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और कंपनी सेक्रेटरी के जरिए सट्टेबाजी से मिली रकम को कैश में बदला और 'पारीमैच' के लिए पेमेंट गेटवे के जरिए गैर-कानूनी तरीके से विदेश पैसे भेजने और 'फर्जी' ओवरसीज डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट में मदद की।
यह मामला मुंबई पुलिस के साइबर पुलिस स्टेशन द्वारा 'पारीमैच' के खिलाफ ऑनलाइन सट्टेबाजी के जरिए यूजर्स को धोखा देने के आरोप में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। एजेंसी ने इस मामले में पहले भी छापेमारी की है और संपत्तियां जब्त की हैं।
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फर्जी सॉफ्टवेयर बनाकर किया करोड़ों का खेल
दरअसल आरोपियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के समानांतर एक फर्जी सॉफ्टवेयर बनाकर करोड़ों रुपये की अवैध वसूली की। यूपी एसटीएफ ने इस धांधली का भंडाफोड़ किया था। जांच में पता चला कि आरोपियों ने टोल वसूली का सिर्फ पांच प्रतिशत सरकारी रिकॉर्ड में दिखाया और बाकी 95 प्रतिशत का घोटाला हो रहा था। ईडी ने इस मामले में दर्ज दो पुलिस एफआईआर पर संज्ञान लेते हुए मामले की जांच शुरू की।
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फोरेंसिक जांच में हुई धांधली की पुष्टि
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि फर्जी सॉफ्टवेयर से टोल रसीदें बनाकर फर्जीवाड़ा किया गया। टोल से हुई कमाई को आधिकारिक अकाउंटिंग सिस्टम से बाहर डायवर्ट कर दिया गया। ईडी की जांच में फोरेंसिक और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के रिकॉर्ड से फर्जी सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल की पुष्टि हो चुकी है। ईडी की ताजा छापेमारी का मकसद फर्जीवाड़े से जुड़े डिजिटल सबूत जुटाना, आरोपियों की पहचान करना और अपराध से हुई कमाई का पता लगाना है।
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ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले में ED ने की छापेमारी
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को ऑनलाइन सट्टेबाजी फर्म 'पारीमैच' और कुछ अन्य कंपनियों से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पेमेंट कंपनियों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और कंपनी सेक्रेटरी के यहां कई राज्यों में छापेमारी की। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में पांच, दिल्ली-NCR में चार, राजस्थान में दो और गुजरात में एक जगह पर छापेमारी की गई।
अधिकारियों के मुताबिक, जांच के दायरे में वे पेमेंट कंपनियां हैं, जिन पर आरोप है कि उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और कंपनी सेक्रेटरी के जरिए सट्टेबाजी से मिली रकम को कैश में बदला और 'पारीमैच' के लिए पेमेंट गेटवे के जरिए गैर-कानूनी तरीके से विदेश पैसे भेजने और 'फर्जी' ओवरसीज डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट में मदद की।
यह मामला मुंबई पुलिस के साइबर पुलिस स्टेशन द्वारा 'पारीमैच' के खिलाफ ऑनलाइन सट्टेबाजी के जरिए यूजर्स को धोखा देने के आरोप में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। एजेंसी ने इस मामले में पहले भी छापेमारी की है और संपत्तियां जब्त की हैं।