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ED: तीन साल में तीन गुना रिटर्न, धोखे से जुटाए 10000 करोड़; छापे में सोने के गहने-चांदी की सिल्लियां जब्त
Tue, 18 Aug 2026 01:58 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 18 Aug 2026 01:58 PM IST
सार
सागा ग्रुप पर ईडी की छापेमारी में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच में पता चला है कि सागा ग्रुप ने 50 से ज्यादा शैल कंपनियों की मदद से धोखे से हजारों करोड़ रुपये की रकम जमा की। ईडी की छापेमारी में भारी मात्रा में नकदी, सोन और चांदी के गहने मिले हैं।
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ED
- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हेडक्वार्टर यूनिट, नई दिल्ली ने 'मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002' के तहत 13 अगस्त से 16 अगस्त तक मुंबई और भोपाल में छापेमारी की है। जांच एजेंसी ने ये छापे समीर अग्रवाल और उनके सहयोगियों से जुड़े कई रिहायशी और व्यावसायिक जगहों पर मारे हैं। यह कार्रवाई 'सागा ग्रुप पोंजी स्कैम' के सिलसिले में की गई। इसमें 'लोनी अर्बन मल्टी-स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी और उससे जुड़ी अन्य कोऑपरेटिव सोसायटियां शामिल थीं। आरोपियों ने 3-5 साल में लोगों को तीन गुना
रिटर्न और तोहफे में कार देने का वादा किया था। इसी चक्कर में उन्होंने धोखे से 10000 करोड़ रुपये एकत्रित कर लिए। ईडी के छापे में सोने के गहने/चांदी की सिल्लियां जब्त हुई हैं।
तलाशी अभियान के दौरान, ईडी ने बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए हैं। 'अपराध से हुई कमाई' को भी फ्रीज किया गया है। इसमें 30 करोड़ रुपये से ज़्यादा मूल्य के लिस्टेड शेयर और सिक्योरिटीज, म्यूचुअल फंड, एलआईसी पॉलिसी, बैंक बैलेंस आदि और 9 महंगी गाड़ियां शामिल हैं। इसके अलावा, तलाशी की कार्रवाई के दौरान ईडी ने 1.53 करोड़ रुपये नकद, लगभग 35 लाख रुपये की विदेशी मुद्रा और 5.25 करोड़ रुपये मूल्य के सोने के गहने और चांदी की सिल्लियां भी जब्त की हैं।
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कोई वास्तविक बिजनेस गतिविधि नहीं
ईडी ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों की पुलिस द्वारा एलयूसीसी और उससे जुड़ी कोऑपरेटिव सोसायटियों के ग्रुप के खिलाफ दर्ज कई एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। इन FIR में आरोप लगाया गया था कि 2009 से, समीर अग्रवाल (सागा) ग्रुप द्वारा प्रमोट की जाने वाली रिकरिंग डिपॉजिट, फिक्स्ड डिपॉजिट और मंथली इनकम स्कीम में निवेश करने के लिए लोगों को धोखे से उकसाया गया। लोगों से वादा किया गया था कि उन्हें तीन से पांच साल के भीतर दोगुना या तिगुना पक्का रिटर्न मिलेगा और साथ ही कार जैसे तोहफे भी दिए जाएंगे। दूसरी ओर ऐसे रिटर्न देने के लिए कोई वास्तविक बिजनेस गतिविधि नहीं हो रही थी। नकली बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और अवास्तविक रिटर्न के वादों का इस्तेमाल करके, सागा ग्रुप ने लोगों से धोखे से 10,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा की रकम जमा की।
50 से ज्यादा शेल कंपनियों का नेटवर्क
शुरुआत में निवेशकों को कुछ भुगतान किए गए, लेकिन ज़्यादातर निवेश, समीर अग्रवाल और उनके सहयोगियों द्वारा निजी फायदे के लिए किए गए थे। एजेंटों, सहयोगियों और मार्केट कमीशन के तौर पर पैसा हड़प लिया गया। आम लोगों से ज्यादातर कैश में ही राशि एकत्रित की गई। उसे रीजनल कैश-चेस्ट के जरिए भेजा गया। इसके बाद प्रमोटरों ने शेल कंपनियों और हवाला चैनलों का इस्तेमाल करके इन पैसों को देश और विदेश में चल-अचल संपत्तियों में निवेश करने के नाम पर हड़प लिया। जांच में ऐसी 50 से ज़्यादा शेल कंपनियों के एक बड़े नेटवर्क का पता चला है, जिन्हें डायरेक्टरेट द्वारा पहचाने गए ऑपरेटर कंट्रोल करते थे।
फरार है समीर अग्रवाल, देश छोड़कर भागा
सागा ग्रुप के सीएमडी और मुख्य कंट्रोलर बताए जाने वाला समीर अग्रवाल देश छोड़कर भाग गया है। वह अभी तक फरार है। ईडी ने इस मामले में दो अलग-अलग प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के तहत संपत्तियों को पहले ही प्रोविजनल तौर पर अटैच कर लिया है। ग्रुप के एक अहम अधिकारी रवि शंकर तिवारी को 14 जुलाई को पीएमएलए के प्रावधानों के तहत गिरफ़्तार किया है। वहीं जांच एजेंसी ने 24 जुलाई को स्पेशल कोर्ट में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की है।
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रिटर्न और तोहफे में कार देने का वादा किया था। इसी चक्कर में उन्होंने धोखे से 10000 करोड़ रुपये एकत्रित कर लिए। ईडी के छापे में सोने के गहने/चांदी की सिल्लियां जब्त हुई हैं।
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तलाशी अभियान के दौरान, ईडी ने बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए हैं। 'अपराध से हुई कमाई' को भी फ्रीज किया गया है। इसमें 30 करोड़ रुपये से ज़्यादा मूल्य के लिस्टेड शेयर और सिक्योरिटीज, म्यूचुअल फंड, एलआईसी पॉलिसी, बैंक बैलेंस आदि और 9 महंगी गाड़ियां शामिल हैं। इसके अलावा, तलाशी की कार्रवाई के दौरान ईडी ने 1.53 करोड़ रुपये नकद, लगभग 35 लाख रुपये की विदेशी मुद्रा और 5.25 करोड़ रुपये मूल्य के सोने के गहने और चांदी की सिल्लियां भी जब्त की हैं।
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कोई वास्तविक बिजनेस गतिविधि नहीं
ईडी ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों की पुलिस द्वारा एलयूसीसी और उससे जुड़ी कोऑपरेटिव सोसायटियों के ग्रुप के खिलाफ दर्ज कई एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। इन FIR में आरोप लगाया गया था कि 2009 से, समीर अग्रवाल (सागा) ग्रुप द्वारा प्रमोट की जाने वाली रिकरिंग डिपॉजिट, फिक्स्ड डिपॉजिट और मंथली इनकम स्कीम में निवेश करने के लिए लोगों को धोखे से उकसाया गया। लोगों से वादा किया गया था कि उन्हें तीन से पांच साल के भीतर दोगुना या तिगुना पक्का रिटर्न मिलेगा और साथ ही कार जैसे तोहफे भी दिए जाएंगे। दूसरी ओर ऐसे रिटर्न देने के लिए कोई वास्तविक बिजनेस गतिविधि नहीं हो रही थी। नकली बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और अवास्तविक रिटर्न के वादों का इस्तेमाल करके, सागा ग्रुप ने लोगों से धोखे से 10,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा की रकम जमा की।
50 से ज्यादा शेल कंपनियों का नेटवर्क
शुरुआत में निवेशकों को कुछ भुगतान किए गए, लेकिन ज़्यादातर निवेश, समीर अग्रवाल और उनके सहयोगियों द्वारा निजी फायदे के लिए किए गए थे। एजेंटों, सहयोगियों और मार्केट कमीशन के तौर पर पैसा हड़प लिया गया। आम लोगों से ज्यादातर कैश में ही राशि एकत्रित की गई। उसे रीजनल कैश-चेस्ट के जरिए भेजा गया। इसके बाद प्रमोटरों ने शेल कंपनियों और हवाला चैनलों का इस्तेमाल करके इन पैसों को देश और विदेश में चल-अचल संपत्तियों में निवेश करने के नाम पर हड़प लिया। जांच में ऐसी 50 से ज़्यादा शेल कंपनियों के एक बड़े नेटवर्क का पता चला है, जिन्हें डायरेक्टरेट द्वारा पहचाने गए ऑपरेटर कंट्रोल करते थे।
फरार है समीर अग्रवाल, देश छोड़कर भागा
सागा ग्रुप के सीएमडी और मुख्य कंट्रोलर बताए जाने वाला समीर अग्रवाल देश छोड़कर भाग गया है। वह अभी तक फरार है। ईडी ने इस मामले में दो अलग-अलग प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के तहत संपत्तियों को पहले ही प्रोविजनल तौर पर अटैच कर लिया है। ग्रुप के एक अहम अधिकारी रवि शंकर तिवारी को 14 जुलाई को पीएमएलए के प्रावधानों के तहत गिरफ़्तार किया है। वहीं जांच एजेंसी ने 24 जुलाई को स्पेशल कोर्ट में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की है।