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मतभेद विवाद पर चुनाव आयोग की सफाई: कहा- सभी फैसले नियम और कानून के तहत लिए गए, विपक्ष के सवालों पर क्या कहा?

Wed, 23 Sep 2026 02:12 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Wed, 23 Sep 2026 02:12 PM IST
सार

चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों पर उठ रहे सवालों के बीच आयोग ने कहा है कि उसके सभी फैसले नियम और कानून के तहत लिए गए हैं। आयोग ने आंतरिक टिप्पणियों को सामान्य प्रक्रिया बताया और कहा कि पिछले एक साल के सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए। आयोग ने मामले पर क्या सफाई दी? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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Election Commission Clarifies Amid Rift Controversy says all Decisions Taken as Per Rules
चुनाव आयोग की सफाई - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

चुनाव आयोग के भीतर मतभेद और एसआईआर को लेकर उठ रहे सवालों के बीच आयोग ने प्रेस नोट जारी कर अपना पक्ष साफ किया है। आयोग ने कहा है कि वह संविधान तहत काम करता है। आयोग के मुताबिक वह एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था है और उसके भीतर लिखित टिप्पणियां, सुझाव, तकनीकी राय और आंतरिक जांच-पड़ताल सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि उसकी सभी कार्रवाइयां कानून और आयोग के निर्देशों के मुताबिक की गई हैं।

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चुनाव आयोग ने अपने फैसलों को लेकर क्या सफाई दी?

  • आयोग ने कहा कि इन फैसलों के लिए निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया जाता है। आयोग ने बताया कि उसकी कार्यप्रणाली मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति, सेवा शर्तों और कार्यकाल से संबंधित 2023 के कानून के तहत तय होती है।
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  • आयोग के मुताबिक किसी फैसले को अंतिम रूप देने से पहले सदस्यों के बीच चर्चा होती है और इस दौरान अलग-अलग राय, सुझाव या प्रशासनिक सवाल उठना सामान्य प्रक्रिया है। इनका उद्देश्य चुनावी व्यवस्था को मजबूत करना और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना है।
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क्या आयोग के भीतर अलग-अलग राय को मतभेद माना जा सकता है?

  • चुनाव आयोग ने कहा कि किसी भी संस्था में अलग-अलग विचार और टिप्पणियां आना विचार-विमर्श की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग के मुताबिक अंतिम फैसला लिए जाने से पहले ये सभी टिप्पणियां निर्णय प्रक्रिया में शामिल रहती हैं।
  • सिर्फ तीनों चुनाव आयुक्त ही नहीं, बल्कि आयोग के अधिकारी भी चुनावी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सुझाव दे सकते हैं। आयोग ने कहा कि निर्वाचन आयुक्तों की ओर से दिए गए सुझावों का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को और बेहतर बनाना था। इसलिए किसी आंतरिक टिप्पणी या सुझाव को सीधे संस्थागत मतभेद के तौर पर देखना पूरी तस्वीर नहीं दिखाता।

10 महीनों के चुनिंदा नोट्स पर आयोग ने क्या कहा?

आयोग ने कहा कि पिछले 10 महीनों के दौरान सामने आए कुछ चुनिंदा आंतरिक नोट्स या टिप्पणियों को ही उजागर करने से तस्वीर का केवल एक हिस्सा सामने आता है। आयोग के मुताबिक इसी अवधि में बड़ी संख्या में मंजूरियां, फैसले, निर्देश और नई पहल भी की गईं। आयोग ने बताया कि हाल के महीनों में करीब 40 नई पहल शुरू की गई हैं और कई चुनावी सुधार किए गए हैं। इनमें देशभर में मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया, जिसमें एसआईआर भी शामिल है, प्रमुख है। आयोग का दावा है कि पिछले एक साल में लिए गए सभी फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

एसआईआर और चुनावी कामकाज को लेकर आयोग ने क्या बताया?

  • आयोग ने कहा कि उसने हाल के समय में बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुदुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में बड़े चुनावों तथा चुनाव से जुड़ी अन्य प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक पूरा कराया है। इन कामों के दौरान बड़े स्तर पर प्रशासनिक और संचालन संबंधी व्यवस्थाएं की गईं।
  • आयोग ने कहा कि इन प्रक्रियाओं में कई मंजूरियां और निर्देश जारी किए गए और ये काम भी पूर्ण आयोग की प्रक्रिया के तहत किए गए। आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि केवल कुछ आंतरिक टिप्पणियों के आधार पर उसके पूरे कामकाज का आकलन नहीं किया जाना चाहिए।

मतदाता सूची के डेटा और सॉफ्टवेयर पर आयोग ने क्या कहा?

आयोग ने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म और मतदाता सूची के डेटा की सुरक्षा को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। आयोग के मुताबिक ईसीआईनेट जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म सख्त डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत काम करते हैं। इनमें अनधिकृत छेड़छाड़ या डेटा में बदलाव रोकने के लिए आईटी सुरक्षा जांच और ऑडिट नियंत्रण लागू हैं। आयोग ने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का काम निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों और जिला निर्वाचन अधिकारियों जैसे वैधानिक अधिकारी कानून के तहत अपने निर्धारित अधिकारों के अनुसार करते हैं। यानी आयोग के अनुसार यह अधिकार तय कानूनी प्रक्रिया के तहत इस्तेमाल किए जाते हैं।

आयोग ने अपनी संवैधानिक भूमिका पर क्या कहा?

चुनाव आयोग ने कहा कि वह संविधान के तहत मिली जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। आयोग ने अपने बयान में लोकतंत्र को मजबूत करने में अपनी भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। मतभेदों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच आयोग का कहना है कि आंतरिक सुझाव और टिप्पणियां उसकी कामकाजी प्रक्रिया का हिस्सा हैं और इन्हें अंतिम फैसलों से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके अनुसार पिछले एक साल में लिए गए सभी फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से हुए हैं।

विपक्ष के सवालों के बीच आयोग का मुख्य जवाब क्या है?

  • पूरे विवाद पर चुनाव आयोग का मुख्य जवाब यही है कि उसकी कार्यप्रणाली संविधान, कानून और निर्धारित नियमों के तहत चलती है। आयोग ने कहा है कि आंतरिक टिप्पणियां और सुझाव किसी भी संस्थान में सामान्य हैं और इनका मकसद फैसलों को बेहतर बनाना है।
  • आयोग ने यह भी कहा कि चुनिंदा नोट्स को सामने रखकर पूरे 10 महीनों के कामकाज की तस्वीर नहीं देखी जा सकती। उसके अनुसार इस अवधि में बड़ी संख्या में फैसले, मंजूरियां, निर्देश और करीब 40 पहल सर्वसम्मति से की गईं। इस तरह आयोग ने अपने फैसलों की वैधानिकता और सामूहिक निर्णय प्रक्रिया पर जोर दिया है।
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