'Four Stars of Destiny': किताब पर जनरल नरवणे की पहली प्रतिक्रिया, पेंगुइन के बयान को सोशल मीडिया पर किया पोस्ट
पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने अपनी पुस्तक फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी को लेकर पहली बार सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी है। जनरल नरवणे ने इस संबंध में पेंगुइन इंडिया की ओर से जारी बयान को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया।
विस्तार
पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब को लेकर संसद में गतिरोध जारी है। इसी बीच पूर्व सेना प्रमुख ने मंगलवार को विवाद पर विराम लगा दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किताब से संबंधित प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के आधिकारिक बयान को रीपोस्ट किया। इससे पहले प्रकाशन ने कहा था कि कंपनी द्वारा पुस्तक की कोई भी प्रति ‘‘मुद्रित या डिजिटल रूप में’’ प्रकाशित, वितरित, बेची या किसी अन्य तरीके से जनता के लिए उपलब्ध नहीं कराई गई है।
अब पेंगुइन इंडिया के ट्वीट पर रिट्वीट करते हुए जनरल एमएम नरवणे ने एक्स पर लिखा कि किताब की वर्तमान स्थिति यह है। इसी बीच प्रकाशन की ओर से एक अन्य बयान भी जारी किया गया है। जिसमें प्रकाशक ने कहा है कि किसी किताब या उसके प्री-ऑर्डर के लिए उपलब्ध होने की घोषणा को पब्लिकेशन नहीं माना जाना चाहिए। इसके साथ पब्लिकेशन हाउस ने कहा है कि प्री-ऑर्डर के लिए उपलब्ध किताब और पब्लिश हुई किताब एक ही बात नहीं हैं।
This is the status of the book. https://t.co/atLtwhJvl0— Manoj Naravane (@ManojNaravane) February 10, 2026
पेंगुइन ने बयान में कही थी यह बात
‘पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया’ (पीआरएचआई) ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के संस्मरण ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ की अनधिकृत प्रतियां उपलब्ध होने की खबरों के बीच कहा है कि इसके प्रकाशन का अधिकार केवल उसके पास है और यह पुस्तक अब तक प्रकाशित नहीं हुई है। इससे पहले, दिल्ली पुलिस ने नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी।
प्रकाशन ने सोमवार को जारी एक बयान में कहा था कि पुस्तक की मुद्रित या डिजिटल- किसी भी रूप में कोई भी प्रति जारी नहीं की गई है। प्रकाशक ने एक बयान में कहा, ‘‘पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया यह स्पष्ट करना चाहता है कि भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल एम. एम. नरवणे द्वारा लिखित आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ के प्रकाशन अधिकार केवल हमारे पास हैं। हम यह भी स्पष्ट करना चाहते हैं कि पुस्तक का प्रकाशन अब तक नहीं हुआ है।’’
बयान में कहा गया है कि कंपनी द्वारा पुस्तक की कोई भी प्रति ‘‘मुद्रित या डिजिटल रूप में’’ प्रकाशित, वितरित, बेची या किसी अन्य तरीके से जनता के लिए उपलब्ध नहीं कराई गई है। प्रकाशक ने यह भी चेतावनी दी कि वर्तमान में प्रसारित हो रहे पुस्तक के संस्करण को कॉपीराइट उल्लंघन माना जाएगा। पिछले सप्ताह संसद परिसर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को कथित तौर पर इस पुस्तक की एक प्रति दिखाते हुए देखा गया था।
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पेंगुइन इंडिया ने आज भी जारी किया बयान
पेंगुइन ने अपने बयान में कहा 'एक घोषित किताब, प्री-ऑर्डर के लिए उपलब्ध किताब और प्रकाशित किताब तीन अलग-अलग चीजें हैं। केवल घोषणा का मतलब है कि किताब भविष्य में प्रकाशित की जाएगी। प्री-ऑर्डर केवल पाठकों और रिटेलरों को अग्रिम आदेश देने की सुविधा देता है, इसका मतलब यह नहीं कि किताब पहले से ही उपलब्ध है।' साथ ही उन्होंने कहा कि प्रकाशन की निर्धारित तिथि केवल योजना का संकेत है, किताब बाजार में तभी उपलब्ध होती है जब इसे खरीदने के लिए रिटेल चैनलों पर रखा गया हो। पेंगुइन ने पहले कहा था कि किताब के प्रिंट या डिजिटल रूप में कोई संस्करण प्रकाशित, वितरित या बेचा नहीं गया है।
वहीं, मंगलवार को राहुल गांधी ने एक बार फिर सरकार और पुस्तक के प्रकाशक पेंगुइन पर हमला बोला। उन्होंने दावा किया है कि संस्मरण पब्लिक डोमेन में हैं और भाजपा पर आरोप लगाया है कि वह 'असुविधाजनक सच्चाई' को फैलने से रोकने के लिए इसे दबाने की कोशिश कर रही है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाया कि यह पुस्तक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अमेजन पर उपलब्ध है, जिसे पेंगुइन ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने पत्रकारों को सेना के एक पूर्व प्रमुख द्वारा 2023 में की गई एक एक्स पोस्ट भी दिखाई, जिसमें उन्होंने लोगों से 2020 में गलवां झड़प में हुई घटनाओं का विवरण देने वाले संस्मरण को पढ़ने का आग्रह किया था।
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