एक्सप्लेनर: गोल्डी बराड़ से लेकर मसूद अजहर तक, भारत की आतंकियों की सूची में कौन-कौन और कैसे जुड़ता है नाम?
एफबीआई की मोस्ट वांटेड सूची में गोल्डी बराड़ का नाम आने के बाद भारत की आतंकियों की सूची भी चर्चा में है। यूएपीए के तहत केंद्र सरकार आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े किसी व्यक्ति का नाम चौथी अनुसूची में शामिल कर सकती है। मसूद अजहर, हाफिज सईद, दाऊद इब्राहिम और गोल्डी बराड़ समेत कई नाम इस सूची में दर्ज हैं। आइए विस्तार से जानते हैं।
विस्तार
अमेरिका की संघीय जांच एजेंसी एफबीआई ने सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ को अपनी टॉप 10 मोस्ट वांटेड भगोड़ों की सूची में शामिल किया है। एफबीआई के मुताबिक, वह इस सूची में शामिल होने वाला 543वां व्यक्ति है। उसकी गिरफ्तारी से जुड़ी जानकारी देने पर 10 लाख डॉलर तक का इनाम घोषित किया गया है। इसके बाद गोल्डी बराड़ एक बार फिर चर्चा में है। हालांकि, भारत में उसका नाम पहले से ही आतंकवादियों की सूची में दर्ज है।
ऐसे में आइए जानते हैं कि एफबीआई ने गोल्डी बराड़ पर क्या आरोप लगाया है? क्या किसी और भारतीय का नाम इस सूची में है? भारत सरकार अपने आतंकवादियों की सूची में कैसे किसी का नाम शामिल करती है? इसका क्या आधार होता है? गोल्डी बराड़ सहित और कौन-कौन से नाम इस सूची में शामिल हैं?
गोल्डी बराड़ पर एफबीआई ने लगाए क्या आरोप?
एफबीआई के अनुसार, गोल्डी बराड़ पर रैकेटियर इन्फ्लुएंस्ड एंड करप्ट ऑर्गनाइजेशंस (RICO) साजिश, जबरन वसूली के जरिए कारोबार में दखल देने की साजिश और प्रयास, तथा मादक पदार्थों की तस्करी और उन्हें बांटने की साजिश के आरोप हैं। एफबीआई ने उसे लॉरेंस बिश्नोई ऑर्गनाइज्ड क्राइम ग्रुप से जुड़ा और उत्तरी अमेरिका में उसका कथित नेता बताया है। एजेंसी के अनुसार, इस गिरोह पर हत्या, गोलीबारी, अपहरण, जबरन वसूली और मादक पदार्थों व हथियारों की तस्करी जैसी गतिविधियों के आरोप हैं।
क्या पहले भी कोई भारतीय एफबीआई की मोस्ट वॉन्टेड सूची में आया है?
एक और भारतीय एफबीआई की टटेन मोस्ट वांटेड फ्यूजिटिव्सट सूची में शामिल है। भद्रेश कुमार चेतनभाई पटेल को 2017 में इस सूची में शामिल किया गया था। एफबीआई के अनुसार, वह 2015 में मैरीलैंड के हनोवर में अपनी पत्नी की हत्या के मामले में वांछित है। उसके खिलाफ स्थानीय और संघीय गिरफ्तारी वारंट जारी हैं। उसकी गिरफ्तारी में मदद करने वाली सूचना पर 10 लाख डॉलर तक का इनाम घोषित है।
भारत सरकार की आतंकवादियों की सूची में नाम कैसे शामिल होते हैं?
भारत सरकार किसी व्यक्ति का नाम यूएपीए के तहत अपनी आतंकवादियों की सूची में शामिल करती है। इस सूची में कुल 80 लोगों के नाम शामिल हैं।
यूएपीए क्या है?
यूएपीए यानी गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम, 1967 भारत का एक प्रमुख कानून है। इसका उद्देश्य देश की एकता, अखंडता, संप्रभुता और सुरक्षा को खतरा पहुंचाने वाली गैरकानूनी गतिविधियों और आतंकवादी गतिविधियों को रोकना है। यह कानून 30 दिसंबर 1967 को बनाया गया था।
शुरुआत में यह कानून मुख्य रूप से गैरकानूनी गतिविधियों और गैरकानूनी संगठनों से निपटने के लिए था। बाद में इसमें आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए गए। कानून में इसके लिए अलग अध्याय और कई धाराएं हैं।
यूएपीए की धारा 15 में आतंकवादी गतिविधि की परिभाषा दी गई है। इसमें ऐसी गतिविधियां शामिल हैं जिनका उद्देश्य भारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा या संप्रभुता को खतरा पहुंचाना या लोगों में आतंक पैदा करना हो।
इसमें बम, विस्फोटक, हथियार या अन्य खतरनाक साधनों से लोगों की जान लेने या उन्हें नुकसान पहुंचाने, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, जरूरी सेवाओं को बाधित करने जैसी गतिविधियां शामिल हैं। किसी सरकारी पदाधिकारी की हत्या या उस पर हमला और सरकार को कोई काम करने या न करने के लिए मजबूर करने के लिए किसी व्यक्ति का अपहरण या बंधक बनाना भी इसमें शामिल है।
यूएपीए में किस तरह के अपराध हैं?
इस कानून में केवल आतंकवादी हमला ही अपराध नहीं है। इसके तहत:
- आतंकवादी गतिविधि करना
- आतंकवादी गतिविधि के लिए धन जुटाना
- आतंकवादी गतिविधि की साजिश करना
- आतंकवादी शिविर आयोजित करना
- आतंकवादी गतिविधि के लिए लोगों की भर्ती करना
- किसी आतंकवादी को छिपाना या शरण देना
- आतंकवादी संगठन की सदस्यता लेना
- आतंकवाद से हासिल संपत्ति रखना
- गवाह को धमकाना
जैसे अपराधों के लिए सजा का प्रावधान है।
आतंकवादी गतिविधि की सजा
अगर आतंकवादी गतिविधि में किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है तो मौत की सजा या उम्रकैद हो सकती है। दूसरे मामलों में कम से कम पांच साल की जेल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है।
यूएपीए की अनुसूची में शामिल प्रमुख आतंकवादी कौन से हैं?
मौलाना मसूद अजहर: मौलाना मसूद अजहर जैश-ए-मोहम्मद का संस्थापक है। जैश-ए-मोहम्मद यूएपीए की पहली अनुसूची में आतंकवादी संगठन के रूप में सूचीबद्ध है। संयुक्त राष्ट्र ने 1 मई 2019 को मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था। उसके नेतृत्व वाले जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े श्रीनगर विधानसभा परिसर पर हमला, संसद पर हमला, पठानकोट हमला, हुमहामा और लेथपोरा में सुरक्षा बलों के शिविरों पर हमले, सुंजवान सेना शिविर पर हमला और 2019 का पुलवामा हमला प्रमुख हैं।
उसके खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी में कई मामले दर्ज और जांच के तहत हैं। पठानकोट एयरबेस हमले के मामले में उसके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया है। उसके खिलाफ दो रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किए गए हैं। उसे यूएपीए की चौथी अनुसूची में क्रम संख्या 1 पर शामिल किया गया।
हाफिज मोहम्मद सईद: हाफिज मोहम्मद सईद लश्कर-ए-तैयबा और जमात-उद-दावा का संस्थापक है। लश्कर-ए-तैयबा यूएपीए की पहली अनुसूची में आतंकवादी संगठन के रूप में सूचीबद्ध है।
संयुक्त राष्ट्र ने 10 दिसंबर 2008 को हाफिज मोहम्मद सईद को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था। उसके नाम से लाल किला हमला, रामपुर हमला, 26/11 मुंबई हमला और उधमपुर में बीएसएफ काफिले पर हमला जुड़ा है।
26/11 मुंबई हमले में 166 लोगों की मौत और 235 लोगों के घायल होने का उल्लेख है। उसके खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी में कई मामले हैं और 26/11 मुंबई हमले से जुड़े हेडली मामले में आरोपपत्र दाखिल किया गया है। उसके खिलाफ 28 अगस्त 2009 को रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया था। उसे यूएपीए की चौथी अनुसूची में क्रम संख्या 2 पर शामिल किया गया।
जकी-उर-रहमान लखवी: जकी-उर-रहमान लखवी लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर और उसके संस्थापक सदस्यों में से एक है। संयुक्त राष्ट्र ने 10 दिसंबर 2008 को उसे वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था। उसके नाम से लाल किला हमला, रामपुर हमला, 26/11 मुंबई हमला और उधमपुर में बीएसएफ काफिले पर हमला जुड़ा है।
उसके खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी के कई मामलों का उल्लेख है। इनमें लश्कर-ए-तैयबा के अबू जुंदाल मामले और उधमपुर आतंकवादी हमले का मामला शामिल है। 26/11 मुंबई हमले से जुड़े हेडली मामले में उसके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया है। 28 अगस्त 2009 को उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। उसे चौथी अनुसूची में क्रम संख्या 3 पर शामिल किया गया।
दाऊद इब्राहिम कासकर: दाऊद इब्राहिम कासकर पर अंतरराष्ट्रीय अंडरवर्ल्ड अपराध सिंडिकेट चलाने और आतंकवाद, आतंकवाद के वित्तपोषण, हथियारों की तस्करी, नकली मुद्रा, धन शोधन, मादक पदार्थों की तस्करी, जबरन वसूली और बेनामी रियल एस्टेट कारोबार जैसी गतिविधियां चलाने का आरोप है।
संयुक्त राष्ट्र ने उसे वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था और 3 नवंबर 2003 को अल-कायदा प्रतिबंध सूची में शामिल किया था।
मार्च 1993 में मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में 257 लोगों की मौत और 1,000 से अधिक लोगों के घायल होने का उल्लेख है। इस मामले में उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट और रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था। उसे यूएपीए की चौथी अनुसूची में क्रम संख्या 4 पर शामिल किया गया।
वधावा सिंह बब्बर: वधावा सिंह बब्बर बब्बर खालसा इंटरनेशनल का प्रमुख है। बब्बर खालसा इंटरनेशनल यूएपीए की पहली अनुसूची में आतंकवादी संगठन के रूप में सूचीबद्ध है।
संगठन से जुड़े प्रमुख मामलों में जून 1985 में एयर इंडिया कनिष्क विमान में बम विस्फोट शामिल है, जिसमें 329 यात्रियों की मौत हुई थी। अगस्त 1995 में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या, 2004 में बुड़ैल जेल से सुरंग के जरिए फरारी, 2005 में दिल्ली के लिबर्टी और सत्यम सिनेमा में विस्फोट और 2007 में लुधियाना के शिंगार सिनेमा में विस्फोट का भी उल्लेख है।
शिंगार सिनेमा विस्फोट में छह लोगों की मौत और 35 लोग घायल हुए थे। उसके खिलाफ पंजाब पुलिस और राष्ट्रीय जांच एजेंसी के मामले तथा रेड कॉर्नर नोटिस का उल्लेख है। उसे चौथी अनुसूची में क्रम संख्या 5 पर शामिल किया गया।
लखबीर सिंह रोडे: लखबीर सिंह रोडे इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन का प्रमुख है। यह संगठन यूएपीए की पहली अनुसूची में आतंकवादी संगठन के रूप में सूचीबद्ध है।
उसे सीमा पार से भारत में हथियार और विस्फोटक भेजने तथा पंजाब में आतंकवादी गतिविधियों के लिए उनकी आपूर्ति करने से जोड़ा गया है। पंजाब पुलिस की कार्रवाई में हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक बरामद होने तथा आरोपियों के रोडे के संपर्क में होने का उल्लेख है। उसके खिलाफ पंजाब पुलिस के कई मामले और रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने का उल्लेख है। उसे चौथी अनुसूची में क्रम संख्या 6 पर शामिल किया गया।
रंजीत सिंह उर्फ नीता: रंजीत सिंह उर्फ नीता ने 1993 में खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स की स्थापना की और उसका प्रमुख रहा। उसे आतंकवादी गतिविधियों के संचालन, उन्हें वित्तीय मदद देने और सीमा पार से हथियार, गोला-बारूद तथा विस्फोटक भारत भेजने से जोड़ा गया है।
उससे जुड़े मामलों में झेलम एक्सप्रेस, पठानकोट की बसों, शालीमार एक्सप्रेस, पूजा एक्सप्रेस, सियालदह एक्सप्रेस और जम्मू रेलवे स्टेशन पर हुए विस्फोट शामिल हैं। 1999 में पूजा एक्सप्रेस में हुए विस्फोट में 14 लोगों की मौत और 42 लोग घायल हुए थे।
उसके खिलाफ पंजाब पुलिस और राष्ट्रीय जांच एजेंसी के मामले तथा रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने का उल्लेख है। उसे चौथी अनुसूची में क्रम संख्या 7 पर शामिल किया गया।
परमजीत सिंह उर्फ पंजवार: परमजीत सिंह उर्फ पंजवार पाकिस्तान के लाहौर में रहकर गतिविधियां चला रहा था। उसे युवाओं को हथियारों की ट्रेनिंग देने और भारत में हथियार तथा गोला-बारूद भेजने से जोड़ा गया है।
उस पर मादक पदार्थों की तस्करी और नकली भारतीय मुद्रा के संचालन में शामिल होने का भी उल्लेख है। उसका संगठन खालिस्तान कमांडो फोर्स फरवरी 1986 में बना था और उसका उद्देश्य हिंसक तरीकों से खालिस्तान बनाना था।
संगठन से जुड़े कई आतंकी हमलों और बम विस्फोटों का उल्लेख है। उसके खिलाफ पंजाब पुलिस के मामले और रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया था। उसे चौथी अनुसूची में क्रम संख्या 8 पर शामिल किया गया।
सतविंदर सिंह उर्फ गोल्डी बराड़: सतविंदर सिंह उर्फ सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़ा है। उसे कई हत्याओं, राष्ट्रवादी नेताओं को धमकी देने, फिरौती मांगने और सोशल मीडिया पर हत्याओं की जिम्मेदारी लेने से जोड़ा गया है। उस पर सीमा पार से ड्रोन के जरिए हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री मंगाने तथा हत्याओं के लिए उनकी आपूर्ति करने का भी उल्लेख है।
उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस, 12 दिसंबर 2022 का गैर-जमानती वारंट और 15 जून 2022 का लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया था। केंद्र सरकार ने यूएपीए की धारा 35(1)(क) के तहत उसका नाम आतंकवादी के रूप में चौथी अनुसूची में शामिल किया। उसका नाम क्रम संख्या 56 पर है।