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Hindi News ›   India News ›   Five Hours of Noise on Train: Tejasvi Surya’s Wife Shares ‘Traumatic’ Journey, Questions Civic Sense in India

ट्रेन में पांच घंटे तक शोर: परेशान हो गईं तेजस्वी सूर्या की पत्नी, भारतीयों के व्यवहार पर क्या सवाल उठाए?

Thu, 24 Sep 2026 12:58 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Thu, 24 Sep 2026 12:58 PM IST
सार

भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या की पत्नी शिवश्री स्कंदप्रसाद ने ट्रेन यात्रा को 'ट्रॉमेटिक' बताते हुए कहा कि करीब 40 पुरुषों का समूह पांच घंटे तक तेज आवाज में बात और हंसी-मजाक करता रहा। उन्होंने टीटीई से दूसरे कोच में जगह मांगी, लेकिन सीट नहीं मिली। बाद में यूएनओ खेलने और गाने को लेकर भी शिकायत की। इस सफर में हुईं परेशानियों पर उन्होंने सोशल मीडिया पर खुलकर अपनी बात लिखी। आइए, विस्तार से जानते हैं कि उन्होंने क्या कुछ लिखा...

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Five Hours of Noise on Train: Tejasvi Surya’s Wife Shares ‘Traumatic’ Journey, Questions Civic Sense in India
तेजस्वी सूर्या और उनकी पत्नी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

कर्नाटक के बंगलूरू दक्षिण से भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या की पत्नी और कर्नाटक संगीत की गायिका शिवश्री स्कंदप्रसाद ने अपनी ट्रेन यात्रा को लेकर एक पोस्ट के जरिए नाराजगी जताई है। उन्होंने इस सफर को ट्रॉमेटिक यानी बेहद परेशान करने वाला बताया। उनका कहना है कि ट्रेन के 56 सीट वाले कोच में करीब 40 अधेड़ उम्र के पुरुष मौजूद थे और वे पूरी पांच घंटे की यात्रा के दौरान लगातार तेज आवाज में बात करते और हंसते रहे। शिवश्री ने कहा कि कलाकारों के लिए शांति और सुकून जरूरी होता है, लेकिन इस यात्रा में उन्हें शांति नहीं मिल सकी। उन्होंने इस घटना को केवल अपनी परेशानी नहीं बताया, बल्कि सार्वजनिक जगहों पर लोगों के व्यवहार और नागरिक जिम्मेदारी से भी जोड़ दिया।

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आखिर ट्रेन में ऐसा क्या हुआ कि शिवश्री ने सफर को 'ट्रॉमेटिक' बताया?

  • शिवश्री के मुताबिक, जिस कोच में वह सफर कर रही थीं, वहां करीब 40 अधेड़ उम्र के पुरुषों का एक बड़ा समूह मौजूद था। यह समूह 56 सीट वाले कोच के बड़े हिस्से में बैठा था। 
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  • उनका आरोप है कि समूह के लोग पूरी पांच घंटे की यात्रा में लगातार जोर-जोर से बातचीत और हंसी-मजाक करते रहे। 
  • उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि कलाकारों के दिमाग में कई विचार चलते रहते हैं और वे शांति में रहना पसंद करते हैं। लेकिन इस यात्रा के दौरान उन्हें शांत माहौल नहीं मिल सका। 
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  • शिवश्री ने सार्वजनिक स्थानों पर दूसरों की निजी जगह और सुविधा का सम्मान करने की जरूरत पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जगह पर तेज आवाज में बात करना या चिल्लाना दूसरे यात्रियों को परेशान कर सकता है। 
  • उनके मुताबिक, समस्या यह भी है कि बड़े समूह के सामने अक्सर दूसरे लोग आपत्ति नहीं जता पाते और उन्हें मजबूरी में स्थिति सहनी पड़ती है।

 

क्या टिकट परीक्षक से शिकायत के बाद भी परेशानी खत्म नहीं हुई?

शिवश्री ने बताया कि उन्होंने टिकट परीक्षक यानी टीटीई से दूसरे कोच में जगह देने का अनुरोध भी किया था। उनका कहना है कि दूसरे कोच में सीट उपलब्ध नहीं होने के कारण ऐसा नहीं हो सका। इसके बाद भी शोर और बातचीत जारी रही। उन्होंने बताया कि बाद में आठ लोगों का एक समूह लगातार बात और हंसी-मजाक कर रहा था। इसी दौरान उन्होंने यूएनओ खेलना शुरू कर दिया। शिवश्री ने इस मामले की शिकायत टीटीई से की। उनके अनुसार, टीटीई के कहने पर समूह ने तुरंत यूएनओ खेलना बंद कर दिया। लेकिन कुछ मिनट बाद वही टीटीई वापस आया और कथित तौर पर मजाकिया अंदाज में उनसे पूछने लगा कि वे इतना शोर क्यों कर रहे हैं। इसके बाद समूह फिर हंसने लगा। शिवश्री के मुताबिक, समूह के लोगों ने टीटीई से कहा, 'सर नीवु बन्नी, अडोना', यानी 'सर आप भी आइए, खेलते हैं।' इसके बाद भी मामला खत्म नहीं हुआ।

बाद में यात्रियों ने क्या किया और शिवश्री ने इसे नागरिक व्यवहार से क्यों जोड़ा?

शिवश्री के अनुसार, बाद में समूह के लोगों ने जानबूझकर बॉलीवुड के गाने गाना शुरू कर दिया। उन्होंने साफ किया कि उनकी शिकायत इस बात को लेकर नहीं थी कि यूएनओ का खेल कौन जीता या कौन हारा। उनके लिए असली मुद्दा सार्वजनिक जगह पर दूसरे यात्रियों के प्रति व्यवहार था। उन्होंने कहा कि ट्रेन जैसे सार्वजनिक स्थान पर हर यात्री को यह समझना चाहिए कि उसके व्यवहार का असर दूसरे लोगों पर भी पड़ता है। शिवश्री ने इस घटना को नागरिक शिष्टाचार यानी सिविक सेंस से जोड़ते हुए कहा कि सार्वजनिक जगहों पर लोगों को दूसरों की सुविधा और निजी जगह का ध्यान रखना चाहिए। उनके मुताबिक, जब कोई बड़ा समूह शोर करता है तो बाकी यात्री अक्सर उसका विरोध नहीं कर पाते। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या बाकी यात्रियों को सिर्फ इसलिए परेशानी सहनी चाहिए क्योंकि सामने वाला समूह संख्या में बड़ा है।

शिवश्री ने भारतीयों के सार्वजनिक व्यवहार पर क्या सवाल उठाए?

शिवश्री ने अपनी पोस्ट में इस घटना को एक बड़े सवाल से जोड़ा। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जगहों पर लोगों को दूसरों की निजी जगह और सुविधा का सम्मान करना चाहिए। उनके मुताबिक, अगर कोई बड़ा समूह सार्वजनिक स्थान पर परेशानी पैदा कर रहा हो तो दूसरे लोग अक्सर उसे रोकने या सवाल करने की स्थिति में नहीं होते। उन्होंने कहा कि ऐसे में समूह का हिस्सा नहीं होने वाले बाकी यात्रियों से उम्मीद की जाती है कि वे चुपचाप परेशानी सहते रहें। उन्होंने इसे नागरिक समझ की समस्या बताया। उनका कहना था कि ट्रेन में मौजूद दूसरे यात्रियों की भी अपनी जरूरतें और सुविधा होती हैं। यात्रा के दौरान तेज आवाज में लगातार बातचीत, हंसी-मजाक और बाद में गाने बजाने या गाने की वजह से उन्हें शांत माहौल नहीं मिल पाया। उन्होंने अपनी पोस्ट के अंत में सार्वजनिक व्यवहार में सुधार को लेकर सवाल उठाया और कहा कि आखिर देश में सार्वजनिक जगहों पर व्यवहार कब बेहतर होगा।

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