Explainer: पेपर लीक रोकने के लिए टेलीग्राम पर बैन क्यों, दुनिया में और किन सरकारों के निशाने पर आया ये एप?
नीट यूजी 2026 री-एग्जाम से पहले भारत सरकार ने फर्जी पेपर लीक और ऑनलाइन ठगी रोकने के लिए टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया। हालांकि भारत पहला देश नहीं है जिसने इस एप पर कार्रवाई की हो। बड़े ग्रुप, पब्लिक चैनल, बॉट्स और गोपनीयता से जुड़े फीचर्स इस एप लोकप्रिय बनाते हैं, लेकिन यही वजहें इसे सरकारों के निशाने पर भी लाती हैं। आइए विस्तार से जानते हैं।
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विस्तार
भारत में मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी-2026 री-एग्जाम से पहले सरकार ने मैसेजिंग एप टेलीग्राम पर सीमित अवधि के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि भारत पहला देश नहीं है, जिसने टेलीग्राम पर कार्रवाई की हो। पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय सुरक्षा, फेक न्यूज, आतंकवाद, चुनावी दुष्प्रचार और सरकार विरोधी गतिविधियों के आरोपों के चलते कई देशों ने इस एप को प्रतिबंधित किया है या इसकी सेवाओं पर अंकुश लगाया है।
आइए जानते हैं कि भारत में टेलीग्राम पर बैन क्यों लगा? बैन पर टेलीग्राम का क्या कहना है? ममला कोर्ट क्यों पहुंचा? कोर्ट ने इस पर क्या कहा? क्या पहले भी टेलीग्राम पर किसी परीक्षा के दौरान इस तरह के सवाल उठे थे? आखिर ये एप कैसे काम करता है? दूसरे मैसेजिंग एप्स से ये कैसे अलग है? इसका भारत और दुनिया में कितना बड़ा यूजर बेस? दुनिया के किन देशों ने एप पर बैन लगाया है और इसकी वजह क्या बताई है? टेलीग्राम ही निशाने पर क्यों? क्या कभी किसी दूसरे एप पर भी इस तरह की कार्रवाई की गई है?
टेलीग्राम पर बैन क्यों लगा?
- राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के मुताबिक कुछ संगठित गिरोह टेलीग्राम के फीचर्स का इस्तेमाल कर परीक्षा के बाद फर्जी पेपर लीक के सबूत तैयार कर रहे थे।
- एनटीए के मुताबिक कुछ संगठित गिरोह छात्रों और अभिभावकों को निशाना बनाकर कथित तौर पर लीक पेपर उपलब्ध कराने का झांसा दे रहे थे। इसके बदले उनसे हजारों से लेकर लाखों रुपये तक वसूले जा रहे थे।
- टेलीग्राम पर "PAPER LEAKED DETT", "Re-NEET 2026" और "Private Mafia" जैसे नामों से कई फर्जी चैनल संचालित किए जा रहे थे, जिनके जरिए परीक्षा से पहले पेपर लीक होने की भ्रामक खबरें फैलाई जा रही थीं।
- सुरक्षा एजेंसियों ने पहले कई संदिग्ध चैनलों और बॉट्स पर कार्रवाई की थी, लेकिन समस्या जारी रहने के कारण केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69(A) के तहत टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का फैसला किया।
- इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 22 जून तक प्लेटफॉर्म पर अस्थायी रोक और 30 जून तक मैसेज एडिटिंग फीचर को बंद करने के निर्देश दिए।
बैन पर टेलीग्राम क्या कहना है?
टेलीग्राम के फाउंडर और सीईओ पावेल ड्यूरोव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 16 जून को कहा कि कुछ लोगों द्वारा कथित तौर पर परीक्षा के प्रश्नपत्र साझा करने की वजह से पूरे प्लेटफॉर्म को निशाना बनाना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, इस कदम से भारत के 15 करोड़ से अधिक सामान्य टेलीग्राम उपयोगकर्ता प्रभावित होंगे, जबकि पेपर लीक की गतिविधियां दूसरे एप्स पर चली जाएंगी।

मामला कोर्ट क्यों पहुंचा?
टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध के खिलाफ कंपनी ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने कंपनी की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने साफ किया कि देश की इतनी बड़ी परीक्षा की सुरक्षा के लिए सरकार को आपातकालीन कदम उठाने और अस्थायी प्रतिबंध लगाने का पूरा कानूनी अधिकार है।

आखिर ये एप कैसे काम करता है?
टेलीग्राम की स्थापना 2013 में रूसी मूल के भाइयों पावेल ड्यूरोव और निकोलाई ड्यूरोव ने की थी। इसका मकसद ऐसा संचार माध्यम बनाना था जो सरकारी हस्तक्षेप से अपेक्षाकृत मुक्त हो। वॉट्सएप और सिग्नल जैसे एप्स की तरह टेलीग्राम केवल चैटिंग तक सीमित नहीं है। यह एप केवल मैसेजिंग प्लेटफॉर्म नहीं बल्कि एक समानांतर सूचना नेटवर्क की तरह काम करता है।
टेलीग्राम में कैसे-कैसे फीचर?
- दो लाख सदस्यों तक वाले ग्रुप बनाए जा सकते हैं।
- बड़े पैमाने पर ब्रॉडकास्ट चैनल चलाए जा सकते हैं।
- बड़ी फाइलें साझा की जा सकती हैं।
- इसे मोबाइल, कंप्यूटर और वेब ब्राउजर पर एक साथ इस्तेमाल किया जा सकता है।
- इसमें गुप्त चैट जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
- इसके संदेश कई डिवाइस पर सिंक रहते हैं।

टेलीग्राम दूसरे मैसेजिंग एप से कैसे अलग है?
- बड़े ग्रुप और चैनल: टेलीग्राम पर हजारों से लेकर लाखों लोगों तक पहुंच वाले ग्रुप और चैनल बनाए जा सकते हैं।
- बॉट्स और ऑटोमेशन: इसमें ऑटोमैटेड बॉट्स की सुविधा है, जो संदेश भेजने, जवाब देने और जानकारी साझा करने का काम कर सकते हैं।
- क्लाउड-आधारित प्लेटफॉर्म: चैट और फाइलें क्लाउड पर स्टोर रहती हैं, इसलिए एक ही अकाउंट को कई डिवाइस पर आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है।
- मैसेज एडिट करने की सुविधा: भेजे गए संदेशों में बाद में भी बदलाव किया जा सकता है।
- बड़ी फाइलें शेयर करने की सुविधा: दूसरे कई मैसेजिंग ऐप्स की तुलना में ज्यादा बड़ी फाइलें और दस्तावेज साझा किए जा सकते हैं।
- पब्लिक चैनल और ओपन नेटवर्क: कई चैनल और ग्रुप सार्वजनिक होते हैं, जिन्हें लिंक के जरिए कोई भी जॉइन कर सकता है।
- आसान अकाउंट निर्माण: मोबाइल नंबर के जरिए जल्दी अकाउंट बनाया जा सकता है, जिससे नए अकाउंट बनाना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है।
भारत और दुनिया में टेलीग्राम का कितना बड़ा यूजर बेस है?
Cointelegraph के मुताबिक, टेलीग्राम दुनिया का पांचवां सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है। दुनियाभर में इसके करीब 100 करोड़ (1 अरब) मासिक सक्रिय यूजर हैं, जबकि 50 करोड़ यूजर रोजाना इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं। अकले भारत में इसके 15 करोड़ से अधिक यूजर हैं।

किन-किन देशों में बैन है टेलीग्राम?
1. रूस
अप्रैल 2026 में रूस ने टेलीग्राम को देशभर में पूरी तरह ब्लॉक कर दिया। मोबाइल और ब्रॉडबैंड दोनों नेटवर्क पर एप की पहुंच लगभग खत्म हो गई और उपयोगकर्ताओं को VPN का सहारा लेना पड़ा। हालांकि इससे पहले टेलीग्राम रूस में युद्ध और राजनीतिक खबरों का सबसे बड़ा स्रोत बन चुका था।
यूरोपियन कंसोर्टियम फॉर पॉलिटिकल रिसर्च (ECPR) के अनुसार यूक्रेन युद्ध के बाद रूस में पश्चिमी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बंद होने लगे। ऐसे में टेलीग्राम तेजी से समाचार और रियल टाइम अपडेट का प्रमुख माध्यम बन गया। रिपोर्ट के अनुसार प्रमुख रूसी टेलीग्राम चैनलों पर व्यूज 2021 में लगभग 16 अरब से बढ़कर 2023 में 109 अरब से अधिक हो गए।
ईरान: विरोध प्रदर्शनों के बाद स्थायी बैन
ईरान कभी टेलीग्राम के सबसे बड़े बाजारों में से एक था। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार 2018 में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद ईरानी प्रशासन ने टेलीग्राम को स्थायी रूप से ब्लॉक कर दिया। सरकार का आरोप था कि एप प्रदर्शनकारियों को संगठित करने, विरोधी संदेश फैलाने और राष्ट्रीय सुरक्षा को चुनौती देने का माध्यम बन रहा था। ईरानी न्यायपालिका ने आतंकवादी गतिविधियों, सरकार विरोधी प्रचार, अश्लील सामग्री और झूठी सूचनाओं के प्रसार को भी प्रतिबंध का कारण बताया।
यूक्रेन: राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों को लेकर हुई कार्रवाई
कीव पोस्ट के अनुसार 2024 में यूक्रेन ने सरकारी अधिकारियों, सैन्य कर्मियों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे से जुड़े कर्मचारियों के लिए टेलीग्राम के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया। यूक्रेनी अधिकारियों का दावा था कि रूस संवेदनशील सूचनाओं तक पहुंच सकता है और एप का उपयोग साइबर हमलों, फिशिंग, मैलवेयर वितरण तथा लोकेशन ट्रैकिंग के लिए किया जा सकता है।
यूरोप: संस्थापक की गिरफ्तारी तक पहुंचा मामला
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार 2024 में फ्रांस ने टेलीग्राम के संस्थापक पावेल ड्यूरोव को गिरफ्तार कर लिया था। फ्रांसीसी अधिकारियों का आरोप था कि प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण, ड्रग तस्करी और ऑनलाइन घृणा अपराधों जैसी अवैध गतिविधियों को रोकने में कंपनी विफल रही।
ब्राजील: चुनाव और फेक न्यूज की चिंता
ब्राजील ने 2022 में राष्ट्रपति चुनाव से पहले टेलीग्राम को अस्थायी रूप से ब्लॉक कर दिया था। आरोप था कि प्लेटफॉर्म अदालत के आदेशों का पालन नहीं कर रहा और फेक न्यूज फैलाने वाले खातों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहा। बाद में प्रतिबंध हटा लिया गया।
चीन: 2015 से ही पूरी तरह ब्लॉक
चीन ने 2015 में टेलीग्राम को ब्लॉक कर दिया था। चीनी सरकार टेलीग्राम को कार्यकर्ताओं, वकीलों और राजनीतिक आयोजकों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले मंच के रूप में देखती है। 2019 के हांगकांग लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों के दौरान भी टेलीग्राम का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ था, जिसके बाद चीन का रुख और सख्त हो गया।
पाकिस्तान: राजनीतिक अस्थिरता के दौरान रोक
पाकिस्तान में भी कई बार टेलीग्राम की सेवाओं पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। सरकार ने साइबर सुरक्षा और गलत सूचना फैलाने को कारण बताया, जबकि आलोचकों का कहना है कि ऐसे कदम अक्सर राजनीतिक विरोध को नियंत्रित करने के लिए उठाए जाते हैं।
इन देशों में भी टेलीग्राम पर हुई कार्रवाई
- वियतनाम ने 2025 में "राज्य विरोधी दस्तावेज" और गलत सूचना फैलाने के आरोप में टेलीग्राम पर प्रतिबंध लगाया था, जिसे बाद में हटा लिया गया।
- थाईलैंड ने 2020 में सरकार विरोधी प्रदर्शनों को संगठित करने के आरोप में टेलीग्राम पर रोक लगाई थी। बाद में प्रतिबंध समाप्त कर दिया गया।
- क्यूबा ने 2021 में सरकार विरोधी आंदोलनों के दौरान टेलीग्राम समेत कई डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाया था।
- केन्या में भी 2025 में महंगाई और भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान सरकार ने आरोप लगाया कि टेलीग्राम के जरिए सरकार विरोधी सामग्री फैलायी जा रही है। इसके बाद प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
- नेपाल सरकार ने टेलीग्राम पर धोखाधड़ी और धन शोधन को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए इसकी सेवाओं पर रोक लगाई।
- सोमालिया में 2023 से टेलीग्राम पर प्रतिबंध लागू है। सरकार का कहना था कि ये प्लेटफॉर्म आतंकवाद, फेक न्यूज और आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे थे।
टेलीग्राम ही निशाने पर क्यों?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 50 करोड़ से अधिक यूजर्स के साथ वॉट्सएप सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप है, लेकिन टेलीग्राम की कुछ ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे अलग बनाती हैं। टेलीग्राम के एक ग्रुप में अधिकतम 2 लाख सदस्य जोड़े जा सकते हैं, जबकि वॉट्सएफ में यह सीमा 1,024 सदस्यों की है। इसके अलावा टेलीग्राम पर कई मामलों में यूजर्स बिना अपना मोबाइल नंबर सार्वजनिक किए भी बातचीत कर सकते हैं। इन सभी फिचर्स की वजह से इस एप के जरिए पेपर लीक होने के संभावना ज्यादा होती है। भारत सरकार ने टेलीग्राम को "नया डार्क वेब" तक करार दिया है। उसका कहना है कि प्लेटफॉर्म की गोपनीयता संबंधी सुविधाएं जांच एजेंसियों के लिए अपराधियों की पहचान करना मुश्किल बना देती हैं।
क्या कभी किसी दूसरे एप पर भी इस तरह की कार्रवाई की गई है?
भारत सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय सुरक्षा, डेटा सुरक्षा, ऑनलाइन सट्टेबाजी और अश्लील सामग्री से जुड़ी चिंताओं के चलते सैकड़ों एप्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाया है। इनमें प्रमुख श्रेणियां शामिल हैं:
सोशल मीडिया और कंटेंट शेयरिंग एप्स
इस श्रेणी में TikTok, Helo, Likee और Bigo Live जैसे लोकप्रिय एप्स शामिल रहे हैं। इन पर मुख्य रूप से डेटा सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कारणों का हवाला देकर कार्रवाई की गई थी।
यूटिलिटी और प्रोडक्टिविटी एप्स
SHAREit, UC Browser, CamScanner और Parallel Space जैसे एप्स भी सरकार की कार्रवाई के दायरे में आए। ये ऐप्स फाइल शेयरिंग, ब्राउजिंग और दस्तावेज स्कैनिंग जैसी सेवाएं प्रदान करते थे।
ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुआ एप्स
सरकार ने Parimatch, Betway, Dafabet समेत कई बेटिंग और गैंबलिंग प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाया। इन एप्स पर अवैध सट्टेबाजी को बढ़ावा देने के आरोप थे।
गेमिंग एप्स
PUBG Mobile और Garena Free Fire जैसे लोकप्रिय ऑनलाइन गेम्स पर भी विभिन्न समय पर कार्रवाई की गई। इन मामलों में भी डेटा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दों को प्रमुख कारण बताया गया।
स्ट्रीमिंग और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स
सरकार ने अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री के आरोपों के चलते Ullu, ALTT समेत 27 ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाया था। इन प्लेटफॉर्म्स पर अश्लील कंटेंट प्रसारित करने का आरोप था।