टीवी चैनलों को मिली राहत: सरकार हटाएगी 12 मिनट की विज्ञापन सीमा, डिजिटल मीडिया से होगी बराबरी; कब बदलेगा नियम?
टीवी चैनलों पर विज्ञापनों की अधिकतम 12 मिनट प्रति घंटे की सीमा हटाने का सरकार ने फैसला किया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के मुताबिक, 1994 के केबल टेलीविजन नेटवर्क नियमों में बदलाव किया जाएगा। लेकिन नया नियम कब लागू होगा? विज्ञापन प्रसारण पर अब क्या असर पड़ेगा? आइए, विस्तार से जानते हैं...
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केंद्र सरकार ने टेलीविजन चैनलों के लिए प्रति घंटे अधिकतम 12 मिनट के विज्ञापन प्रसारण की सीमा हटाने का फैसला किया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी। मंत्रालय के मुताबिक, प्रसारण क्षेत्र में हुए व्यापक बदलावों को देखते हुए विज्ञापन अवधि से जुड़े मौजूदा नियमों की समीक्षा की गई है। यह बदलाव केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम, 1994 में संशोधन के जरिए किया जाएगा।
अभी टीवी चैनलों पर विज्ञापन को लेकर क्या नियम है?
मौजूदा नियमों के तहत टीवी चैनल एक घंटे में 12 मिनट से अधिक विज्ञापन नहीं दिखा सकते। इसमें 10 मिनट तक व्यावसायिक विज्ञापन और दो मिनट तक चैनल का अपना प्रचार शामिल है। यह सीमा केबल टेलीविजन नेटवर्क नियमों के नियम 7(11) के तहत लागू है। सरकार के नए फैसले के बाद इसी प्रावधान में बदलाव किया जाएगा।
सरकार ने विज्ञापन सीमा हटाने का फैसला क्यों लिया?
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने कहा कि जब वर्ष 2006 में विज्ञापन की यह सीमा लागू की गई थी, तब देश में केवल 62 टीवी चैनल थे। अब इनकी संख्या 900 से अधिक हो चुकी है। मंत्रालय के अनुसार, टीवी प्रसारण क्षेत्र में काफी बदलाव आया है और भारत में चैनलों के लिए विज्ञापन आय का प्रमुख स्रोत है। इसके अलावा डिजिटल मीडिया पर विज्ञापनों की अवधि को लेकर ऐसी कोई समान सीमा नहीं है। ऐसे में पारंपरिक टीवी चैनलों और डिजिटल मीडिया के बीच प्रतिस्पर्धा का स्तर समान नहीं था।
क्या नए नियम से टीवी चैनलों को डिजिटल मीडिया से मुकाबले में फायदा होगा?
सरकार का कहना है कि नियमों में बदलाव का उद्देश्य निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और कारोबार करना आसान बनाना है। मंत्रालय ने बताया कि नया प्रावधान लागू होने से पहले संशोधित नियमों को राजपत्र में अधिसूचित किया जाएगा। यानी फिलहाल फैसला लिया गया है, लेकिन नया नियम राजपत्र में अधिसूचना जारी होने के बाद ही प्रभावी होगा।
क्या दिल्ली हाईकोर्ट ने 12 मिनट की सीमा को बरकरार रखा था?
यह फैसला ऐसे समय आया है जब दिल्ली हाईकोर्ट ने कुछ महीने पहले टीवी विज्ञापनों की सीमा को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दी थीं। मई में न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने कई मनोरंजन, न्यूज और क्षेत्रीय चैनलों की याचिकाओं पर फैसला सुनाया था। अदालत ने कहा था कि TRAI को प्रति घंटे 10+2 मिनट की सीमा तय करने का अधिकार है और यह व्यवस्था प्रसारकों के अधिकारों तथा सार्वजनिक हित के बीच संतुलन बनाती है।
क्या हाईकोर्ट ने सार्वजनिक संसाधनों का भी जिक्र किया था?
दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि स्पेक्ट्रम और एयरवेव सीमित सार्वजनिक संसाधन हैं और राज्य इन्हें जनता के हित में ट्रस्ट के रूप में रखता है। अदालत ने यह भी कहा था कि सार्वजनिक संसाधनों के अत्यधिक व्यावसायिक इस्तेमाल को रोकना जरूरी है। साथ ही अदालत ने प्रसारकों की उस दलील को खारिज कर दिया था कि विज्ञापन सीमा उनकी कमाई और व्यावसायिक अभिव्यक्ति के अधिकार को प्रभावित करती है।