नोटबंदी के बाद एक और बड़ा फैसला, प्लास्टिक के नोट छापेगी सरकार
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जालसाजी और कालेधन पर लगाम लगाने के लिए नोटबंदी के बाद सरकार ने एक और बड़ा फैसला किया है। शुक्रवार को सरकार ने संसद को बताया कि उन्होंने प्लास्टिक करेंसी छापने का निर्णय लिया है। इसके लिए मटीरियल की खरीद भी शुरू की जा चुकी है।
संसद में दिए गए एक लिखित जवाब में वित्त राज्यमंत्र अर्जुन मेघवाल ने बताया कि "प्लास्टिक या पॉलीमर सब्सट्रेट से इन नोटों की छपाई की जाएगी। इसके लिए शुरुआती प्रक्रिया भी प्रारंभ हो चुकी है। वित्त राज्यमंत्री का ये बयान लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में आया।
फरवरी 2014 में सरकार ने संसद को बताया था कि 10 रुपये के नोट के रूप में 1 अरब रुपये के प्लास्टिक नोट छापे जाएंगे। ट्रायल के लिए इन्हें पांच शहरों, कोच्चि, मैसूर, जयपुर, शिमला और भुवनेश्वर में चलाया जाएगा।
जानिए क्या है प्लास्टिक नोटों की खासियत
वित्त राज्यमंत्री ने संसद को बताया कि प्लास्टिक नोटों की औसत आयु पांच साल होती है और इनकी नकल करना आसान नहीं होता। वहीं प्लास्टिक नोट के रूप में छापी गई करेंसी कागज के नोट के मुकाबले ज्यादा साफ होती है।
पहली बार जालसाजी को रोकने के लिए ऑस्ट्रेलिया में प्लास्टिक नोट चलाए गए थे। एक और सवाल के जवाब में मेघवाल ने कहा कि दिसंबर 2015 में आरबीआई ने बताया कि उन्हें एक हजार के कुछ नोट प्राप्त हुए हैं, जिनमें सुरक्षा धागा नहीं था। ये प्रेस नोट नासिक में छापे गए थे।
इन नोटों के लिए कागज की सप्लाई सिक्योरिटी पेपर मिल होशंगाबाद से हुई थी। इस मामले में सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन (SPMCIL)ने जांच की थी। दोषी पाए गए अधिकारियों पर जुर्माना लगाया गया और जरूरी कार्रवाई की गई।
मेघवाल ने बताया कि गुणवत्ता को मजबूत करने के लिए जरूरी तंत्र बनाया गया। भविष्य में ऐसी गलती न हो इसके लिए ऑनलाइन परीक्षण तंत्र लाया गया है। कर्मचारियों को भी इसके लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है।