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Shashi Tharoor: 'मैंने कभी पार्टी लाइन नहीं छोड़ी, केवल विचार व्यक्त किए..', अपने हालिया बयानों पर बोले थरूर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वायनाड (केरल)।
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 05 Jan 2026 06:52 PM IST
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सार
Shashi Tharoor: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि उन्होंने कभी भी पार्टी लाइन नहीं छोड़ी और उनके हालिया बयान और लेख से पार्टी को परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि लेख का केवल शीर्षक नहीं, पूरा लेख पढ़ने पर ही मुद्दा समझ में आता है।
शशि थरूर, सांसद, कांग्रेस
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य शशि थरूर ने सोमवार को कहा कि उन्होंने कभी भी पार्टी की विचारधारा से हटकर काम नहीं किया है। वह पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उनके हालिया बयान और लेख के कारण पार्टी को अपना बचाव करना पड़ा।
उन्होंने सुलतान बथेरी में केरल प्रदेश कांग्रेस समिति (केपीसीसी) की ओर से आयोजित 'लक्ष्य 2026 नेतृत्व शिविर' में हिस्सा लिया, जो राज्य के आगामी विधानसभा चुनावों के लिए रणनीतियां बनाने के लिए आयोजित किया गया था।
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उन्होंने कहा, मेरा सवाल है कि किसने कहा कि मैंने पार्टी लाइन छोड़ी। जब मैंने विभिन्न विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए, तब भी ज्यादातर मामलों में पार्टी और मैं एक ही लाइन पर थे।
थरूर ने कहा कि उन्होंने संसद में मंत्रियों से जो सवाल पूछे, उसका स्पष्ट उद्देश्य था और पार्टी को इससे परेशान नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विवाद अक्सर तब पैदा होते हैं, जब मीडिया केवल शीर्षक देखकर रिपोर्टिंग करता है और पूरे लेख को नहीं पढ़ता।
थरूर ने कहा, जब मैं पूछता हूं कि क्या लोगों ने वास्तव में पढ़ा कि मैंने क्या लिखा, तो अधिकांश ने नहीं पढ़ा। पूरा लेख पढ़ने के बाद ही असली मुद्दा समझ में आता है। उन्होंने कहा कि वह पार्टी में 17 वर्षों से हैं और सहयोगियों के साथ अच्छे संबंध रखते हैं।
अब अचानक किसी प्रकार की गलतफहमी की जरूरत नहीं है। यह पूछे जाने पर कि क्या ये मुद्दे कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने के बाद शुरू हुए, थरूर ने कहा कि पार्टी लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन करती है और पहले भी कई नेताओं ने अंदरूनी चुनावों में हिस्सा लिया है।
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उन्होंने कहा, मैंने चुनाव लड़ा और हार गया। यह अध्याय वहीं समाप्त हुआ। मुझे इसमें कोई कहानी नहीं दिखती। पार्टी के इतिहास में कई चुनाव हुए हैं, कई जीते और कई हारे।
भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी का बचाव करने वाले अपने बयान पर थरूर ने कहा कि यह आडवाणी के 98वें जन्मदिन पर शिष्टाचार था। उन्होंने कहा, हमारी संस्कृति हमें बुजुर्गों का सम्मान करना सिखाती है और मैंने वही किया।
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उन्होंने सुलतान बथेरी में केरल प्रदेश कांग्रेस समिति (केपीसीसी) की ओर से आयोजित 'लक्ष्य 2026 नेतृत्व शिविर' में हिस्सा लिया, जो राज्य के आगामी विधानसभा चुनावों के लिए रणनीतियां बनाने के लिए आयोजित किया गया था।
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उन्होंने कहा, मेरा सवाल है कि किसने कहा कि मैंने पार्टी लाइन छोड़ी। जब मैंने विभिन्न विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए, तब भी ज्यादातर मामलों में पार्टी और मैं एक ही लाइन पर थे।
थरूर ने कहा कि उन्होंने संसद में मंत्रियों से जो सवाल पूछे, उसका स्पष्ट उद्देश्य था और पार्टी को इससे परेशान नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विवाद अक्सर तब पैदा होते हैं, जब मीडिया केवल शीर्षक देखकर रिपोर्टिंग करता है और पूरे लेख को नहीं पढ़ता।
थरूर ने कहा, जब मैं पूछता हूं कि क्या लोगों ने वास्तव में पढ़ा कि मैंने क्या लिखा, तो अधिकांश ने नहीं पढ़ा। पूरा लेख पढ़ने के बाद ही असली मुद्दा समझ में आता है। उन्होंने कहा कि वह पार्टी में 17 वर्षों से हैं और सहयोगियों के साथ अच्छे संबंध रखते हैं।
अब अचानक किसी प्रकार की गलतफहमी की जरूरत नहीं है। यह पूछे जाने पर कि क्या ये मुद्दे कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने के बाद शुरू हुए, थरूर ने कहा कि पार्टी लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन करती है और पहले भी कई नेताओं ने अंदरूनी चुनावों में हिस्सा लिया है।
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उन्होंने कहा, मैंने चुनाव लड़ा और हार गया। यह अध्याय वहीं समाप्त हुआ। मुझे इसमें कोई कहानी नहीं दिखती। पार्टी के इतिहास में कई चुनाव हुए हैं, कई जीते और कई हारे।
भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी का बचाव करने वाले अपने बयान पर थरूर ने कहा कि यह आडवाणी के 98वें जन्मदिन पर शिष्टाचार था। उन्होंने कहा, हमारी संस्कृति हमें बुजुर्गों का सम्मान करना सिखाती है और मैंने वही किया।