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India-EU Deal: भारत-यूरोपीय संघ में बनी सहमति; कार्बन-इंटेंसिव आयात पर ईयू के नियमों से निपटने के लिए उपाय तय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Wed, 28 Jan 2026 11:25 PM IST
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सार
भारत और यूरोपीय संघ के बीच कई सहमति बनी हैं, इसमें से एक सहमति उन नियमों को लेकर है जिनमें ज्यादा कार्बन प्रदूषण करने वाले सामान पर टैक्स लगाया जाता है। इसके तहत यूरोपीय संघ कार्बन घटाने में मदद करेगा। ईयू भारत को तकनीकी मदद देगा, नई टेक्नोलॉजी देगा और पैसे भी देगा।
पीएम मोदी और ईयू अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेयेन (दाएं से बाएं)
- फोटो : ANI
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विस्तार
भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच एक बड़ी सहमति बनी है, जो उन नियमों को लेकर है जिनमें ज्यादा कार्बन प्रदूषण करने वाले सामान पर टैक्स लगाया जाता है। ईयू ने 1 जनवरी से एक नया सिस्टम लागू किया है, जिसे सीबीएम कहते हैं। इसके तहत स्टील, सीमेंट, एल्युमिनियम जैसे सामान अगर ज्यादा प्रदूषण फैलाकर बनाए गए हैं, तो उन पर अतिरिक्त टैक्स लगेगा। भारत को डर था कि इससे हमारे उद्योगों पर भारी बोझ पड़ेगा और एक्सपोर्ट महंगा हो जाएगा।
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इसलिए भारत और ईयू ने मिलकर कुछ अहम फैसले लिए हैं, इसके तहत यूरोपीय संघ कार्बन घटाने में मदद करेगा। संघ भारत को तकनीकी मदद देगा, नई टेक्नोलॉजी देगा और पैसे भी देगा। पहले दो साल के लिए करीब 500 मिलियन डॉलर (लगभग 4,000 करोड़ रुपये) देने की बात हुई है ताकि भारतीय कंपनियां अपना कार्बन प्रदूषण कम कर सकें।
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भारत-ईयू को क्या-क्या फायदा?
भारत को कपड़ा, रेडीमेड कपड़े, चमड़े के सामान, जूते, हस्तशिल्प, समुद्री उत्पाद में फायदे होंगे। वहीं ईयू को शराब (खासकर वाइन), कार, केमिकल दवाइयों में फायदे होंगे। बता दें कि वाइन पर अभी 150% टैक्स है, जो घटकर 20-30% हो जाएगा।
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इसलिए भारत और ईयू ने मिलकर कुछ अहम फैसले लिए हैं, इसके तहत यूरोपीय संघ कार्बन घटाने में मदद करेगा। संघ भारत को तकनीकी मदद देगा, नई टेक्नोलॉजी देगा और पैसे भी देगा। पहले दो साल के लिए करीब 500 मिलियन डॉलर (लगभग 4,000 करोड़ रुपये) देने की बात हुई है ताकि भारतीय कंपनियां अपना कार्बन प्रदूषण कम कर सकें।
- टेक्निकल वर्किंग ग्रुप बनेगा- एक खास टीम बनाई जाएगी जो यह देखेगी, कार्बन फुटप्रिंट कैसे नापा जा रहा है, टैक्स कैसे कैलकुलेट हो रहा है, कहीं भारत के साथ नाइंसाफी तो नहीं हो रही।
- भारतीय ऑडिटर को मान्यता मिलेगी- अब कंपनियों का कार्बन ऑडिट सिर्फ यूरोप की एजेंसियां नहीं करेंगी, भारत के ऑडिटर भी ईयू से मान्यता लेकर यह काम कर सकेंगे। इससे खर्च कम होगा, समय बचेगा और कंपनियों को परेशानी नहीं होगी।
- डबल टैक्स नहीं लगेगा- अगर भारत पहले से ही किसी कंपनी से कार्बन टैक्स या जुर्माना ले रहा है, तो ईयू उसी पर दोबारा टैक्स नहीं लगाएगा। यानी डबल टैक्स से बचाव होगा।
- EU किसी और देश को छूट देगा तो भारत को भी मिलेगी- ईयू ने माना है कि अगर सीबीएम में किसी देश को ढील दी जाती है, तो वही ढील भारत को भी अपने आप मिलेगी।
- छात्रों और प्रोफेशनल्स के लिए बड़ी खुशखबरी- ईयू के साथ छात्रों और काम करने वालों के लिए अब रास्ता और आसान होगा। इसके तहत छात्र बिना रोक-टोक जा सकेंगे, पढ़ाई के बाद नौकरी करने का मौका मिलेगा, आईटी, बिजनेस, प्रोफेशनल सर्विस जैसी 37 सेक्टर में काम के अवसर मिलेंगे। वहीं कंपनी ट्रांसफर पर गए लोगों को तीन साल रहने की इजाजत और फिर 2 साल की और बढ़ोतरी मिलेगी। इसके साथ उनके पति/पत्नी और बच्चे भी साथ जा सकेंगे
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भारत-ईयू को क्या-क्या फायदा?
भारत को कपड़ा, रेडीमेड कपड़े, चमड़े के सामान, जूते, हस्तशिल्प, समुद्री उत्पाद में फायदे होंगे। वहीं ईयू को शराब (खासकर वाइन), कार, केमिकल दवाइयों में फायदे होंगे। बता दें कि वाइन पर अभी 150% टैक्स है, जो घटकर 20-30% हो जाएगा।