ISI की दोहरी रणनीति का कैसे हुआ खुलासा?: उत्तर भारत में पैसों का लालच, दक्षिण में कट्टरपंथ फैलाने पर जोर
आतंकी नेटवर्क भारत में युवाओं को जोड़ने के लिए अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, उत्तर भारत में पैसों का लालच देकर भर्ती की जा रही है, जबकि दक्षिण भारत में ऑनलाइन माध्यमों से कट्टरपंथी विचारधारा फैलाई जा रही है। पढ़िए रिपोर्ट-
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारत में सक्रिय आतंकी संगठनों ने युवाओं को अपने नेटवर्क में शामिल करने के लिए दोहरी रणनीति अपनाई है। एक तरफ कट्टरपंथी विचारधारा फैलाकर लोगों को प्रभावित किया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ पैसों का लालच देकर युवाओं की भर्ती की जा रही है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों के मुताबिक, देश के अलग-अलग हिस्सों में इन संगठनों का तरीका भी अलग है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) मुख्य रूप से उत्तर भारत में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने पर फोकस कर रही है। जबकि, दक्षिण भारत में कट्टरपंथ फैलाने, लोगों की भर्ती करने और उन्हें अपनी विचारधारा से जोड़ने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है।
युवाओं को कैसे बनाया जा रहा है निशाना?
उन्होंने बताया कि इन संगठनों का मुख्य उद्देश्य उत्तर भारत में आतंकवादी हमलों को अंजाम देना रहा है। वहीं, दक्षिण भारत में लोगों को कट्टरपंथी विचारों से प्रभावित कर भर्ती करने पर ज्यादा ध्यान दिया गया। महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की हालिया जांच में सामने आया है कि कई युवाओं को आतंकवादी नेटवर्क में शामिल करने के लिए उन्हें पैसों का लालच दिया गया।
ये भी पढ़ें: तृणमूल के 440 करोड़ रुपये के फंड पर घमासान, हाईकोर्ट ने पुलिस और राज्य सरकार को भेजा नोटिस
क्या अंडरवर्ल्ड के जरिए हो रही है भर्ती?
- जांच में यह भी सामने आया कि आईएसआई ने इस काम की निगरानी के लिए अंडरवर्ल्ड का इस्तेमाल किया।
- भर्ती धर्म के आधार पर नहीं की गई, बल्कि ज्यादातर लोगों को केवल आर्थिक लाभ का लालच देकर अपने नेटवर्क में शामिल किया गया।
- खुफिया ब्यूरो (आईबी) के एक अधिकारी ने बताया कि इन आतंकवादी संगठनों का दक्षिण भारत में अब भी खास ध्यान चरमपंथ फैलाने पर है। वहां, बड़े आतंकवादी हमले करने में कोई बड़ी कोशिश सामने नहीं आई है।
- अधिकारी ने बताया कि वहां के कुछ युवा समाज की सोच बदलने वाले कट्टरपंथी विचारों से जल्दी प्रभावित हो रहे हैं।
- उन्होंने कहा कि हमला करने से ज्यादा जोर शरिया कानून लागू करने और हिंसक इस्लामी विचारधारा का प्रचार करने पर दिया जा रहा है, ताकि समाज में ऐसी सोच फैलाई जा सके।
खाड़ी देशों के संबंधों का कैसे उठाया फायदा?
अधिकारियों ने दावा किया आईएसआई समर्थित तत्वों ने दक्षिण भारत के कुछ राज्यों के खाड़ी देशों से करीबी संबंधों का भी फायदा उठाया। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों में केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में कई वहाबी प्रचारक आए और लोगों को कट्टरपंथी विचारधारा की ओर प्रभावित करने की कोशिश की।
विजयवाड़ा मामले में जांच एजेंसियों को क्या मिला?
केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां इस समय आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा से जुड़े एक बड़े कट्टरपंथ के मामले की जांच कर रही हैं। इसमें करीब 12 लोगों के शामिल होने की बात सामने आई है। खास बात यह है कि इन लोगों का किसी आतंकवादी संगठन से सीधा संबंध नहीं मिला है। जांच में पता चला है कि ये लोग ऑनलाइन बैठकों के दौरान इस्लामिक स्टेट (आईएस) और अल-कायदा जैसे संगठनों की विचारधारा का प्रचार करते थे।
सोशल मीडिया के जरिये कैसे फैला रहे कट्टरपंथ?
- राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के अनुसार यह पूरा नेटवर्क केवल कट्टरपंथ फैलाने के उद्देश्य से काम कर रहा था।
- मामले में नामजद सभी 13 लोगों को पहले सोशल मीडिया के जरिये कट्टरपंथी बनाया गया और बाद में उन्हें एन्क्रिप्टेड ऑनलाइन माध्यमों से अन्य लोगों को भी इसी विचारधारा से जोड़ने का काम सौंपा गया। जांच एजेंसियों के अनुसार, इसका मुख्य फोकस दक्षिण भारत था।
- उत्तर भारत में सुरक्षा एजेंसियां लगातार अंडरवर्ल्ड से जुड़े आतंकवादी नेटवर्क का खुलासा कर रही हैं।
- हाल की जांच में सामने आया कि ऐसे मामलों में लगभग 99 फीसदी लोगों को पैसों का लालच देकर भर्ती किया गया।
हाशमी की गिरफ्तारी से क्या खुलासा हुआ?
एक अधिकारी ने बताया कि इस नेटवर्क को संभालने वाले अंडरवर्ल्ड ने कट्टरपंथ की बजाय केवल पैसे को भर्ती का माध्यम बनाया। उत्तर भारत में अपनाई गई इस रणनीति की जानकारी मुंबई के पास भायंदर से हुफैजा फारूक अहमद हाशमी की गिरफ्तारी के बाद सामने आई। उसे महाराष्ट्र एटीएस और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने संयुक्त अभियान में गिरफ्तार किया था। उस पर आरोप है कि वह ऐसे युवाओं की टीम तैयार कर रहा था, जिन्हें दिल्ली भेजकर चुनिंदा लोगों की हत्या कराई जानी थी।