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केपीएससी भर्ती घोटाले पर कर्नाटक सरकार सख्त: सीएम शिवकुमार बोले- आयोग बंद करने पर ले रहा कानूनी सलाह
Tue, 22 Sep 2026 04:57 PM IST
देवेश त्रिपाठी
आईएएनस, बंगलूरू
आईएएनस, बंगलूरू
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Tue, 22 Sep 2026 04:57 PM IST
सार
कर्नाटक लोक सेवा आयोग से जुड़ी कथित भर्ती अनियमितताओं के बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने आयोग के भविष्य को लेकर कानूनी विकल्पों पर विचार करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी फैसले से पहले तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करेगी। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि जांच के दौरान अवैध गतिविधियों से जुड़े लोगों और भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के सबूत मिले हैं।
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कर्नाटक के सीएम डीके शिवकुमार
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
विस्तार
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मंगलवार को कहा कि उनकी सरकार कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) को बंद करने के लिए कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है। यह बयान कर्नाटक हाईकोर्ट की ओर से कथित पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती घोटाले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने के फैसले के बाद आया है।
बंगलूरू में पत्रकारों से बातचीत के दौरान शिवकुमार ने भाजपा पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि जांच में केपीएससी से जुड़े लोगों की कथित अवैध गतिविधियों के सबूत मिले हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इन लोगों की नियुक्ति किसने की और कथित नेटवर्क को कौन चला रहा था।
केपीएससी को क्यों बंद करना चाहते हैं डीके शिवकुमार?
शिवकुमार ने कहा, "केपीएससी को बंद कर देना चाहिए। वहां कई ऐसे लोग हैं जो अवैध गतिविधियों में शामिल हैं। हमारी पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया है और सबूत जुटाए हैं। हमें पता लगाना होगा कि उन्हें किसने नियुक्त किया और इसे कौन चला रहा था।" उन्होंने कहा कि आयोग के भविष्य को लेकर कोई भी फैसला लेने से पहले सरकार को कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा।
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मुख्यमंत्री ने कहा, "हमें कानूनी तरीके से सोचना होगा। जिस तरह भारत के राष्ट्रपति या हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने के लिए एक प्रक्रिया होती है, उसी तरह यहां भी तय प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई शुरू करनी होगी। इसलिए हम कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।"
आयोग के सदस्यों को लेकर क्या बोले कर्नाटक सीएम?
शिवकुमार ने कहा कि सरकार छात्रों और नौकरी के इच्छुक युवाओं के भविष्य को लेकर चिंतित है। उन्होंने कहा, "हमारे लिए हमारे बच्चों का भविष्य महत्वपूर्ण है।" केपीएससी के कामकाज का जिक्र करते हुए शिवकुमार ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के कार्यकाल में आयोग के सदस्यों की संख्या 16 थी, जिसे अब कम कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लोगों की नियुक्ति कर सकती है, लेकिन बाद में नियुक्त लोग गलत गतिविधियों में शामिल हो जाएं तो कार्रवाई करना मुश्किल हो जाता है।
शिवकुमार ने बिजली विभाग में हुई भर्तियों का क्यों किया जिक्र?
शिवकुमार ने कहा, "हम चाहे कितनी भी पारदर्शिता के साथ काम करें, अगर हमारे द्वारा नियुक्त लोग ऐसी गतिविधियों में शामिल हो जाएं तो क्या किया जा सकता है? हम उन्हें नियुक्त करते हैं, लेकिन अगर अधिकारी खुद ऐसी गतिविधियों में शामिल हो जाएं, केपीएससी के उन सदस्यों को छोड़िए जिन्होंने अपनी दुकानें खोल रखी हैं, तो यह एक बड़ा मुद्दा है।"
मुख्यमंत्री ने अपने बिजली मंत्री के कार्यकाल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस दौरान बिजली क्षेत्र में कर्मचारियों की भर्ती में उन्होंने सतर्कता बरती थी। उन्होंने कहा, "मैं बिजली मंत्री था और मैंने 23,000 लाइनमैन और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति की थी। मैं बहुत सतर्क था और ऐसी चीजों के लिए कोई जगह नहीं दी।" शिवकुमार ने कहा कि वह कानूनी दायरे में केपीएससी के खिलाफ क्या कार्रवाई की जा सकती है, इसकी समीक्षा कर रहे हैं।
केपीएससी भर्ती मामले में सीआईडी की रिपोर्ट में क्या आया सामने?
इससे पहले सीआईडी ने केपीएससी भर्ती मामले की जांच में हुई प्रगति पर अपनी रिपोर्ट कर्नाटक सरकार और ट्रायल कोर्ट को सौंपी थी। सीआईडी की रिपोर्ट में कथित धन के लेनदेन, गिरफ्तार भाजपा नेता बसवराज कन्नाले समेत बिचौलियों की कथित भूमिका और भर्ती प्रक्रिया में अधिकारियों की कथित हेरफेर का विवरण दिया गया है।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में केपीएससी में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए एसआईटी गठित करने का आदेश दिया था। जांच में भर्ती प्रक्रिया में कथित हेरफेर और अधिकारियों, उम्मीदवारों तथा बिचौलियों की भूमिका की जांच किए जाने की उम्मीद है।
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बंगलूरू में पत्रकारों से बातचीत के दौरान शिवकुमार ने भाजपा पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि जांच में केपीएससी से जुड़े लोगों की कथित अवैध गतिविधियों के सबूत मिले हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इन लोगों की नियुक्ति किसने की और कथित नेटवर्क को कौन चला रहा था।
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केपीएससी को क्यों बंद करना चाहते हैं डीके शिवकुमार?
शिवकुमार ने कहा, "केपीएससी को बंद कर देना चाहिए। वहां कई ऐसे लोग हैं जो अवैध गतिविधियों में शामिल हैं। हमारी पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया है और सबूत जुटाए हैं। हमें पता लगाना होगा कि उन्हें किसने नियुक्त किया और इसे कौन चला रहा था।" उन्होंने कहा कि आयोग के भविष्य को लेकर कोई भी फैसला लेने से पहले सरकार को कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा।
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मुख्यमंत्री ने कहा, "हमें कानूनी तरीके से सोचना होगा। जिस तरह भारत के राष्ट्रपति या हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने के लिए एक प्रक्रिया होती है, उसी तरह यहां भी तय प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई शुरू करनी होगी। इसलिए हम कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।"
आयोग के सदस्यों को लेकर क्या बोले कर्नाटक सीएम?
शिवकुमार ने कहा कि सरकार छात्रों और नौकरी के इच्छुक युवाओं के भविष्य को लेकर चिंतित है। उन्होंने कहा, "हमारे लिए हमारे बच्चों का भविष्य महत्वपूर्ण है।" केपीएससी के कामकाज का जिक्र करते हुए शिवकुमार ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के कार्यकाल में आयोग के सदस्यों की संख्या 16 थी, जिसे अब कम कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लोगों की नियुक्ति कर सकती है, लेकिन बाद में नियुक्त लोग गलत गतिविधियों में शामिल हो जाएं तो कार्रवाई करना मुश्किल हो जाता है।
शिवकुमार ने बिजली विभाग में हुई भर्तियों का क्यों किया जिक्र?
शिवकुमार ने कहा, "हम चाहे कितनी भी पारदर्शिता के साथ काम करें, अगर हमारे द्वारा नियुक्त लोग ऐसी गतिविधियों में शामिल हो जाएं तो क्या किया जा सकता है? हम उन्हें नियुक्त करते हैं, लेकिन अगर अधिकारी खुद ऐसी गतिविधियों में शामिल हो जाएं, केपीएससी के उन सदस्यों को छोड़िए जिन्होंने अपनी दुकानें खोल रखी हैं, तो यह एक बड़ा मुद्दा है।"
मुख्यमंत्री ने अपने बिजली मंत्री के कार्यकाल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस दौरान बिजली क्षेत्र में कर्मचारियों की भर्ती में उन्होंने सतर्कता बरती थी। उन्होंने कहा, "मैं बिजली मंत्री था और मैंने 23,000 लाइनमैन और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति की थी। मैं बहुत सतर्क था और ऐसी चीजों के लिए कोई जगह नहीं दी।" शिवकुमार ने कहा कि वह कानूनी दायरे में केपीएससी के खिलाफ क्या कार्रवाई की जा सकती है, इसकी समीक्षा कर रहे हैं।
केपीएससी भर्ती मामले में सीआईडी की रिपोर्ट में क्या आया सामने?
इससे पहले सीआईडी ने केपीएससी भर्ती मामले की जांच में हुई प्रगति पर अपनी रिपोर्ट कर्नाटक सरकार और ट्रायल कोर्ट को सौंपी थी। सीआईडी की रिपोर्ट में कथित धन के लेनदेन, गिरफ्तार भाजपा नेता बसवराज कन्नाले समेत बिचौलियों की कथित भूमिका और भर्ती प्रक्रिया में अधिकारियों की कथित हेरफेर का विवरण दिया गया है।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में केपीएससी में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए एसआईटी गठित करने का आदेश दिया था। जांच में भर्ती प्रक्रिया में कथित हेरफेर और अधिकारियों, उम्मीदवारों तथा बिचौलियों की भूमिका की जांच किए जाने की उम्मीद है।