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Karnataka Election: BJP और कांग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र में कितना अंतर, बजरंग दल पर बैन के वादे का क्या मतलब?
Tue, 02 May 2023 05:13 PM IST
हिमांशु मिश्रा
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Tue, 02 May 2023 05:13 PM IST
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कर्नाटक विधानसभा चुनाव
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के लिए अब महज आठ दिन बचे हैं। इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बाद कांग्रेस ने भी चुनावी घोषणा पत्र जारी कर दिया है। दोनों ही पार्टियों ने कई बड़े वादे किए हैं। एक-दूसरे के घोषणाओं पर सवाल भी उठाने लगे हैं। भाजपा ने अपने घोषणा पत्र को ‘प्रजा ध्वनि' नाम दिया है। वहीं, कांग्रेस ने अपने चुनावी वादों को 'संकल्प पत्र' नाम दिया है।भाजपा के घोषणा पत्र में गरीबों के लिए साल में तीन बार गरीबों को मुफ्त गैस सिलेंडर से लेकर किसानों, महिलाओं और बच्चों तक के लिए कई योजनाओं का जिक्र किया गया है। वहीं, कांग्रेस के घोषणा में 200 यूनिट बिजली मुफ्त से लेकर परिवार की प्रत्येक महिला मुखिया को हर महीने 2,000 रुपये देने तक का वादा किया गया है।
कांग्रेस ने नफरत फैलाने वाले संगठनों पर बैन लगाने का भी वादा किया है। इसमें सबसे बड़ा नाम बजरंग दल का है। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि आखिर कांग्रेस ने बजरंग दल पर बैन लगाने का एलान क्यों किया? इसका चुनाव में पार्टी को कितना फायदा मिलेगा? भाजपा और कांग्रेस के चुनावी घोषणा पत्रों में कितना अंतर है? आइए जानते हैं...
पहले जानिए भाजपा की बड़ी घोषणाएं
भारतीय जनता पार्टी ने गरीबों को साल में तीन बार गरीबों को मुफ्त गैस सिलेंडर देने का वादा किया है। भाजपा के घोषणा पत्र में कहा गया है कि ये सिलेंडर उगाड़ी, गणेश चतुर्थी और दीपावली में दिया जाएगा। इसके अलावा कर्नाटक के हर वार्ड में अटल आहार केंद्र खोलने का वादा भी किया है। इसके जरिए गरीबों को सस्ता और अच्छा भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।
भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में एलान किया है कि अगर चुनाव में उनकी पार्टी जीत हासिल करती है तो बीपीएल कार्ड धारकों को प्रतिदिन पोषण स्कीम के तहत आधा लीटर नंदिनी दूध दिया जाएगा। नंदिनी दूध को लेकर पहले से ही सूबे में खूब सियासत चल रही है।
10 लाख गरीबों को घर, दलित महिलाओं के नाम 10 हजार की एफडी, हर महीने गरीबों को पांच किलो राशन, सूबे में समान नागरिक संहिता लागू करने का भी वादा किया है। भाजपा के बड़े वादों में पांच लाख तक के लोन पर किसी तरह का ब्याज न लेना, किसानों को बीज के लिए 10 हजार रुपये देना और वरिष्ठ नागरिकों का साल में एक बार मुफ्त हेल्थ चेकअप कराना भी शामिल है।
भारतीय जनता पार्टी ने गरीबों को साल में तीन बार गरीबों को मुफ्त गैस सिलेंडर देने का वादा किया है। भाजपा के घोषणा पत्र में कहा गया है कि ये सिलेंडर उगाड़ी, गणेश चतुर्थी और दीपावली में दिया जाएगा। इसके अलावा कर्नाटक के हर वार्ड में अटल आहार केंद्र खोलने का वादा भी किया है। इसके जरिए गरीबों को सस्ता और अच्छा भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।
भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में एलान किया है कि अगर चुनाव में उनकी पार्टी जीत हासिल करती है तो बीपीएल कार्ड धारकों को प्रतिदिन पोषण स्कीम के तहत आधा लीटर नंदिनी दूध दिया जाएगा। नंदिनी दूध को लेकर पहले से ही सूबे में खूब सियासत चल रही है।
10 लाख गरीबों को घर, दलित महिलाओं के नाम 10 हजार की एफडी, हर महीने गरीबों को पांच किलो राशन, सूबे में समान नागरिक संहिता लागू करने का भी वादा किया है। भाजपा के बड़े वादों में पांच लाख तक के लोन पर किसी तरह का ब्याज न लेना, किसानों को बीज के लिए 10 हजार रुपये देना और वरिष्ठ नागरिकों का साल में एक बार मुफ्त हेल्थ चेकअप कराना भी शामिल है।
कांग्रेस ने क्या वादा किया है?
कांग्रेस ने सरकार बनने पर कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम में सभी महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा, न्यू एजुकेशन पॉलिसी को रद्द करके राज्य में नई शिक्षा नीति लागू करने, 63 सीमावर्ती तालुकों में कन्नड़ भाषा और संस्कृति का विकास, आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने, 200 यूनिट बिजली मुफ्त देने जैसे वादे किए गए हैं।
कांग्रेस ने प्रत्येक परिवार के महिला मुखिया को हर महीने दो हजार रुपये, बेरोजगार स्नातकों को दो साल तक प्रतिमाह दो हजार रुपये, बेरोजगार डिप्लोमा धारकों को डेढ़ हजार रुपये, रात में ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों को प्रतिमाह पांच हजार रुपये विशेष भत्ता देने का भी वादा किया है। हालांकि, घोषणा पत्र में सबसे ज्यादा चर्चा सूबे में नफरत फैलाने वाले संगठनों को बैन लगाने के वादे की हो रही है।
कांग्रेस ने सरकार बनने पर कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम में सभी महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा, न्यू एजुकेशन पॉलिसी को रद्द करके राज्य में नई शिक्षा नीति लागू करने, 63 सीमावर्ती तालुकों में कन्नड़ भाषा और संस्कृति का विकास, आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने, 200 यूनिट बिजली मुफ्त देने जैसे वादे किए गए हैं।
कांग्रेस ने प्रत्येक परिवार के महिला मुखिया को हर महीने दो हजार रुपये, बेरोजगार स्नातकों को दो साल तक प्रतिमाह दो हजार रुपये, बेरोजगार डिप्लोमा धारकों को डेढ़ हजार रुपये, रात में ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों को प्रतिमाह पांच हजार रुपये विशेष भत्ता देने का भी वादा किया है। हालांकि, घोषणा पत्र में सबसे ज्यादा चर्चा सूबे में नफरत फैलाने वाले संगठनों को बैन लगाने के वादे की हो रही है।
दोनों के चुनावी घोषणा पत्रों में क्या अंतर है?
इसे समझने के लिए हमने राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अजय कुमार सिंह से बात की। उन्होंने कहा,, 'कांग्रेस जानती है कि अगर चुनाव जीतना है तो बड़े वादे करने ही होंगे। यही कारण है कि इस बार पार्टी ने महिलाओं से लेकर युवाओं तक को लुभाने के लिए भत्ता का एलान किया है। 200 यूनिट बिजली मुफ्त देने का एलान भी काफी बढ़ा है। सबसे बड़ा दांव आरक्षण की सीमा को बढ़ाने का है। आरक्षण अगर 50 से 75 प्रतिशत तक हो जाता है तो ये बड़ा बदलाव होगा।'
वहीं, भाजपा ने गरीब वर्ग के लिए तो कई एलान किए हैं। भाजपा ने चार प्रतिशत मुस्लिम आरक्षण खत्म करके दलित-ओबीसी व अन्य वर्ग के आरक्षण में भी बड़ा बदलाव किया था। भाजपा के इस दांव को काटने के लिए कांग्रेस ने आरक्षण के दायरे को 50 से बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने का एलान कर दिया है।
इसे समझने के लिए हमने राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अजय कुमार सिंह से बात की। उन्होंने कहा,, 'कांग्रेस जानती है कि अगर चुनाव जीतना है तो बड़े वादे करने ही होंगे। यही कारण है कि इस बार पार्टी ने महिलाओं से लेकर युवाओं तक को लुभाने के लिए भत्ता का एलान किया है। 200 यूनिट बिजली मुफ्त देने का एलान भी काफी बढ़ा है। सबसे बड़ा दांव आरक्षण की सीमा को बढ़ाने का है। आरक्षण अगर 50 से 75 प्रतिशत तक हो जाता है तो ये बड़ा बदलाव होगा।'
वहीं, भाजपा ने गरीब वर्ग के लिए तो कई एलान किए हैं। भाजपा ने चार प्रतिशत मुस्लिम आरक्षण खत्म करके दलित-ओबीसी व अन्य वर्ग के आरक्षण में भी बड़ा बदलाव किया था। भाजपा के इस दांव को काटने के लिए कांग्रेस ने आरक्षण के दायरे को 50 से बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने का एलान कर दिया है।
बजरंग दल पर बैन के वादे का क्या मतलब?
प्रो. अजय सिंह कहते हैं, 'कर्नाटक में ध्रुवीकरण भी एक अहम मुद्दा है। कांग्रेस ने सत्ता में आने पर मुस्लिम आरक्षण फिर शुरू करने का वादा किया है। जेडीएस ने भी इसी तरह का वादा किया है। लेकिन अब बजरंग दल पर बैन का वादा करके कांग्रेस ने ध्रुवीकरण के मामले में बढ़त बनाने की कोशिश कर रही है।'
प्रो. अजय के अनुसार, 'कांग्रेस ने बजरंग दल के साथ-साथ पीएफआई का भी जिक्र किया। पीएफआई पर पहले से ही केंद्र सरकार ने बैन लगा रखा है। ऐसे में अगर कांग्रेस ने पीएफआई का नाम नहीं लिया होता तो उनके वादे भी एकतरफा दिखाई देते। यही कारण है कि कांग्रेस ने बजरंग दल के साथ-साथ पीएफआई पर भी बैन का जिक्र कर दिया।’
प्रो. अजय सिंह कहते हैं, 'कर्नाटक में ध्रुवीकरण भी एक अहम मुद्दा है। कांग्रेस ने सत्ता में आने पर मुस्लिम आरक्षण फिर शुरू करने का वादा किया है। जेडीएस ने भी इसी तरह का वादा किया है। लेकिन अब बजरंग दल पर बैन का वादा करके कांग्रेस ने ध्रुवीकरण के मामले में बढ़त बनाने की कोशिश कर रही है।'
प्रो. अजय के अनुसार, 'कांग्रेस ने बजरंग दल के साथ-साथ पीएफआई का भी जिक्र किया। पीएफआई पर पहले से ही केंद्र सरकार ने बैन लगा रखा है। ऐसे में अगर कांग्रेस ने पीएफआई का नाम नहीं लिया होता तो उनके वादे भी एकतरफा दिखाई देते। यही कारण है कि कांग्रेस ने बजरंग दल के साथ-साथ पीएफआई पर भी बैन का जिक्र कर दिया।’