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Karnataka Election: बीते पांच साल में कितनी बदली कर्नाटक की राजनीति, क्या हैं यहां के मौजूदा समीकरण? जानें
Wed, 29 Mar 2023 02:38 PM IST
हिमांशु मिश्रा
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Wed, 29 Mar 2023 02:38 PM IST
सार
चुनाव की तारीखों के एलान होने के बाद सबकी निगाहें मौजूदा राजनीतिक समीकरण पर है। आखिर मौजूदा समय कर्नाटक में क्या चल रहा है? कांग्रेस, भाजपा के अलावा कौन-कौन सी पार्टियां चुनाव लड़ेंगी? 2018 में हुए चुनाव में क्या हुआ था? कैसे कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सरकार गिरी? आइए समझते हैं...
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कर्नाटक विधानसभा चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कर्नाटक में विधानसभा चुनाव का एलान हो चुका है। 10 मई को एक चरण में सूबे की सभी 224 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। 13 मई को नतीजे आएंगे। चुनाव आयोग के अनुसार, कर्नाटक में 5.21 करोड़ मतदाता हैं। इनमें 9.17 लाख वोटर्स पहली बार वोट डालेंगे। एक अप्रैल 2023 को जो लोग 18 साल के होंगे, वो भी वोट डाल सकेंगे। इसके लिए एडवांस एप्लीकेशन मंगवाई गई थी।
चुनाव की तारीखों के एलान होने के बाद सबकी निगाहें मौजूदा राजनीतिक समीकरण पर है। आखिर मौजूदा समय कर्नाटक में क्या चल रहा है? कांग्रेस, भाजपा के अलावा कौन-कौन सी पार्टियां चुनाव लड़ेंगी? 2018 में हुए चुनाव में क्या हुआ था? कैसे कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सरकार गिरी? आइए समझते हैं...
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चुनाव की तारीखों के एलान होने के बाद सबकी निगाहें मौजूदा राजनीतिक समीकरण पर है। आखिर मौजूदा समय कर्नाटक में क्या चल रहा है? कांग्रेस, भाजपा के अलावा कौन-कौन सी पार्टियां चुनाव लड़ेंगी? 2018 में हुए चुनाव में क्या हुआ था? कैसे कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सरकार गिरी? आइए समझते हैं...
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पहले जानिए 2018 में क्या हुआ था?
कर्नाटक में पिछली बार 12 मई 2018 को विधानसभा चुनाव हुए थे। चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं था। भाजपा के 104 प्रत्याशी चुनाव जीत गए थे। कांग्रेस को 78 और JDS को 37 सीटों पर जीत मिली थी। सबसे बड़ी पार्टी होने के चलते भाजपा के बीएस येदियुरप्पा ने 17 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। हालांकि, वह सदन में बहुमत साबित नहीं कर पाए।
23 मई को उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद कांग्रेस-JDS की गठबंधन सरकार बनी। कांग्रेस ने ज्यादा सीटें जीतने के बावजूद जेडीएस के एचडी कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री पद का ऑफर दे दिया। कुमारस्वामी एक साल 64 दिन तक सूबे के मुख्यमंत्री रहे। हालांकि, बाद में कांग्रेस और जेडीएस के कई विधायकों ने बगावत कर दी। ये बागी भाजपा में शामिल हो गए।
26 जुलाई 2019 को बीएस येदियुरप्पा फिर से मुख्यमंत्री बन गए। हालांकि, दो साल बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और बसवराज बोम्मई मुख्यमंत्री बने। भाजपा के पास 119 विधायकों का समर्थन था। मौजूदा समय में विधानसभा अध्यक्ष को छोड़कर भाजपा के 117 विधायक हैं। वहीं, कांग्रेस के विधायकों की संख्या 80 से घटकर 69 हो गई है। वहीं जेडीएस के विधायकों की संख्या भी 37 से घटकर 32 रह गई है।
कर्नाटक में पिछली बार 12 मई 2018 को विधानसभा चुनाव हुए थे। चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं था। भाजपा के 104 प्रत्याशी चुनाव जीत गए थे। कांग्रेस को 78 और JDS को 37 सीटों पर जीत मिली थी। सबसे बड़ी पार्टी होने के चलते भाजपा के बीएस येदियुरप्पा ने 17 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। हालांकि, वह सदन में बहुमत साबित नहीं कर पाए।
23 मई को उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद कांग्रेस-JDS की गठबंधन सरकार बनी। कांग्रेस ने ज्यादा सीटें जीतने के बावजूद जेडीएस के एचडी कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री पद का ऑफर दे दिया। कुमारस्वामी एक साल 64 दिन तक सूबे के मुख्यमंत्री रहे। हालांकि, बाद में कांग्रेस और जेडीएस के कई विधायकों ने बगावत कर दी। ये बागी भाजपा में शामिल हो गए।
26 जुलाई 2019 को बीएस येदियुरप्पा फिर से मुख्यमंत्री बन गए। हालांकि, दो साल बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और बसवराज बोम्मई मुख्यमंत्री बने। भाजपा के पास 119 विधायकों का समर्थन था। मौजूदा समय में विधानसभा अध्यक्ष को छोड़कर भाजपा के 117 विधायक हैं। वहीं, कांग्रेस के विधायकों की संख्या 80 से घटकर 69 हो गई है। वहीं जेडीएस के विधायकों की संख्या भी 37 से घटकर 32 रह गई है।
अभी कर्नाटक में राजनीतिक समीकरण क्या है?
अभी कर्नाटक में भाजपा की सरकार है। मौजूदा सरकार का कार्यकाल 24 मई को खत्म हो रहा है। यही कारण है कि इससे पहले चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इस बार भी मुख्य मुकाबला भाजपा, कांग्रेस और JDS के बीच रहेगा। पिछली बार यानी 2018 में जेडीएस और कांग्रेस ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। चुनाव नतीजों के बाद दोनों दलों ने गठबंधन कर लिया था। हालांकि, सत्ता जाने के बाद जेडीएस-कांग्रेस का गठबंधन टूट गया है। दोनों एक बार फिर अलग-अलग चुनाव लड़ेंगे।
अभी कर्नाटक में भाजपा की सरकार है। मौजूदा सरकार का कार्यकाल 24 मई को खत्म हो रहा है। यही कारण है कि इससे पहले चुनाव की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इस बार भी मुख्य मुकाबला भाजपा, कांग्रेस और JDS के बीच रहेगा। पिछली बार यानी 2018 में जेडीएस और कांग्रेस ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। चुनाव नतीजों के बाद दोनों दलों ने गठबंधन कर लिया था। हालांकि, सत्ता जाने के बाद जेडीएस-कांग्रेस का गठबंधन टूट गया है। दोनों एक बार फिर अलग-अलग चुनाव लड़ेंगे।
भाजपा : अंदरूनी लड़ाई जारी, लेकिन पीएम-शाह ने संभाली कमान
भाजपा ने कर्नाटक में 150 से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। लेकिन पार्टी के अंदर गुटबाजी भी काफी अधिक है। पहली बार है जब भाजपा बीएस येदियुरप्पा के बगैर चुनावी मैदान में होगी। इसके अलावा भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष भी कर्नाटक से ही आते हैं। वह भी चुनाव को लेकर काफी सक्रिय बताए जा रहे हैं। हालांकि, इसी को लेकर गुटबाजी भी है। इसे देखते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने खुद कर्नाटक चुनाव की कमान संभाल ली है। पीएम मोदी भी काफी सक्रिय हो गए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन महीने में सात बार कर्नाटक का दौरा किया है। पिछले दौरे में बीएस येदियुरप्पा और मोदी की मुलाकात चर्चा का विषय रही है। मोदी 27 फरवरी को शिवमोगा पहुंचे थे और यहीं उन्होंने येदियुपप्पा का झुककर अभिवादन किया था। येदियुरप्पा राजनीति से संन्यास का ऐलान कर चुके हैं। चार बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे येदियुरप्पा को इलेक्शन कैम्पेन कमेटी का प्रमुख बनाया जा सकता है।
कहा ये भी जा रहा है कि लिंगायत समुदाय पर अच्छी पकड़ रखने वाले येदियुरप्पा अपने बेटों के लिए राजनीति में रास्ता बनाने में जुटे हैं। इसकी बानगी हाल ही में देखी गई थी, जब गृहमंत्री शाह कर्नाटक पहुंचे थे। यहां शाह के स्वागत के लिए बीएस येदियुरप्पा और उनके बेटे भी मौजूद थे। येदियुरप्पा के हाथों में फूलों का बुके था। इसपर शाह ने इशारा करके बुके येदियुरप्पा से अपने बेटे को देने के लिए कहा और फिर उनके बेटे से ही वह बुके लिया। इससे साफ संदेश जाता है कि भाजपा में येदियुरप्पा के बेटे को आगे बढ़ाया जाएगा। कर्नाटक में लिंगायत समुदाय की संख्या काफी अधिक है।
भाजपा ने कर्नाटक में 150 से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। लेकिन पार्टी के अंदर गुटबाजी भी काफी अधिक है। पहली बार है जब भाजपा बीएस येदियुरप्पा के बगैर चुनावी मैदान में होगी। इसके अलावा भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष भी कर्नाटक से ही आते हैं। वह भी चुनाव को लेकर काफी सक्रिय बताए जा रहे हैं। हालांकि, इसी को लेकर गुटबाजी भी है। इसे देखते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने खुद कर्नाटक चुनाव की कमान संभाल ली है। पीएम मोदी भी काफी सक्रिय हो गए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन महीने में सात बार कर्नाटक का दौरा किया है। पिछले दौरे में बीएस येदियुरप्पा और मोदी की मुलाकात चर्चा का विषय रही है। मोदी 27 फरवरी को शिवमोगा पहुंचे थे और यहीं उन्होंने येदियुपप्पा का झुककर अभिवादन किया था। येदियुरप्पा राजनीति से संन्यास का ऐलान कर चुके हैं। चार बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे येदियुरप्पा को इलेक्शन कैम्पेन कमेटी का प्रमुख बनाया जा सकता है।
कहा ये भी जा रहा है कि लिंगायत समुदाय पर अच्छी पकड़ रखने वाले येदियुरप्पा अपने बेटों के लिए राजनीति में रास्ता बनाने में जुटे हैं। इसकी बानगी हाल ही में देखी गई थी, जब गृहमंत्री शाह कर्नाटक पहुंचे थे। यहां शाह के स्वागत के लिए बीएस येदियुरप्पा और उनके बेटे भी मौजूद थे। येदियुरप्पा के हाथों में फूलों का बुके था। इसपर शाह ने इशारा करके बुके येदियुरप्पा से अपने बेटे को देने के लिए कहा और फिर उनके बेटे से ही वह बुके लिया। इससे साफ संदेश जाता है कि भाजपा में येदियुरप्पा के बेटे को आगे बढ़ाया जाएगा। कर्नाटक में लिंगायत समुदाय की संख्या काफी अधिक है।
कांग्रेस: सिद्धारमैया ने कहा ये मेरा आखिरी चुनाव
कांग्रेस अब तक 124 उम्मीदवारों का एलान किया है। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया वरुणा विधानसभा और कर्नाटक कांग्रेस चीफ डीके शिवकुमार कनकपुरा से चुनाव लड़ेंगे। सिद्धारमैया भी बोल चुके हैं कि ये उनका आखिरी चुनाव है। राहुल गांधी ने 20 मार्च को कर्नाटक के बेलगावी में रैली की थी। उन्होंने सरकारी भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया। कहा था कि कर्नाटक सरकार देश की सबसे भ्रष्ट सरकार है, कुछ भी करवाना हो तो 40% कमीशन देना पड़ता है। उन्होंने आरक्षण को चुनावी मुद्दा भी बनाया और कहा कि सत्ता में आए तो एससी-एसटी को मिलने वाले आरक्षण का कोटा बढ़ा दिया जाएगा।
कांग्रेस अब तक 124 उम्मीदवारों का एलान किया है। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया वरुणा विधानसभा और कर्नाटक कांग्रेस चीफ डीके शिवकुमार कनकपुरा से चुनाव लड़ेंगे। सिद्धारमैया भी बोल चुके हैं कि ये उनका आखिरी चुनाव है। राहुल गांधी ने 20 मार्च को कर्नाटक के बेलगावी में रैली की थी। उन्होंने सरकारी भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया। कहा था कि कर्नाटक सरकार देश की सबसे भ्रष्ट सरकार है, कुछ भी करवाना हो तो 40% कमीशन देना पड़ता है। उन्होंने आरक्षण को चुनावी मुद्दा भी बनाया और कहा कि सत्ता में आए तो एससी-एसटी को मिलने वाले आरक्षण का कोटा बढ़ा दिया जाएगा।
जेडीएस : क्या अकेले कमाल कर पाएगी?
जनता दल सेक्यूलर (JDS) पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा की पार्टी है। 2018 विधानसभा चुनाव में जेडीएस से गठबंधन करके ही कांग्रेस ने भाजपा को सत्ता से दूर किया था। चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। बीएस येदियुरप्पा मुख्यमंत्री बने, लेकिन कांग्रेस-जेडीएस ने गठबंधन करके सारे समीकरण बिगाड़ दिए। इसके बाद देवेगौड़ा के बेटे एचडी कुमारस्वामी मुख्यमंत्री बने थे। हालांकि, बाद में भाजपा ने फिर से पलटवार करते हुए कांग्रेस और जेडीएस में सेंध लगा दी। दोनों पार्टियों के कई विधायकों ने पाला बदल लिया और भाजपा में शामिल हो गए। इसके बाद फिर से बीएस येदियुरप्पा मुख्यमंत्री बन गए।
अब जेडीएस अकेले चुनावी मैदान में है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अकेले कमाल कर पाएंगे कुमारस्वामी? पिछले दिनों जेडीएस प्रमुख कुमारस्वामी का एक बयान भी आया था। इसमें उन्होंने कहा कि मोदी और शाह 100 बार भी कर्नाटक आ जाएं तो भी भाजपा की सरकार नहीं बनने वाली है।
विशेषज्ञों की मानें तो दक्षिणी कर्नाटक जिसे पुराना मैसूर भी कहा जाता है, वहां जेडीएस की अच्छी पकड़ है। 2018 में इस क्षेत्र की 66 सीटों में से JDS को 30 सीटें मिली थीं। इसके अलावा कांग्रेस को 20 और भाजपा को 15 सीटें मिली थीं। अब भाजपा की नजर इन्हीं दक्षिणी कर्नाटक की सीटों पर है। वहीं, जेडीएस को एक बार फिर अपने गढ़ में परचम फहराने की उम्मीद है।
जनता दल सेक्यूलर (JDS) पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा की पार्टी है। 2018 विधानसभा चुनाव में जेडीएस से गठबंधन करके ही कांग्रेस ने भाजपा को सत्ता से दूर किया था। चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। बीएस येदियुरप्पा मुख्यमंत्री बने, लेकिन कांग्रेस-जेडीएस ने गठबंधन करके सारे समीकरण बिगाड़ दिए। इसके बाद देवेगौड़ा के बेटे एचडी कुमारस्वामी मुख्यमंत्री बने थे। हालांकि, बाद में भाजपा ने फिर से पलटवार करते हुए कांग्रेस और जेडीएस में सेंध लगा दी। दोनों पार्टियों के कई विधायकों ने पाला बदल लिया और भाजपा में शामिल हो गए। इसके बाद फिर से बीएस येदियुरप्पा मुख्यमंत्री बन गए।
अब जेडीएस अकेले चुनावी मैदान में है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अकेले कमाल कर पाएंगे कुमारस्वामी? पिछले दिनों जेडीएस प्रमुख कुमारस्वामी का एक बयान भी आया था। इसमें उन्होंने कहा कि मोदी और शाह 100 बार भी कर्नाटक आ जाएं तो भी भाजपा की सरकार नहीं बनने वाली है।
विशेषज्ञों की मानें तो दक्षिणी कर्नाटक जिसे पुराना मैसूर भी कहा जाता है, वहां जेडीएस की अच्छी पकड़ है। 2018 में इस क्षेत्र की 66 सीटों में से JDS को 30 सीटें मिली थीं। इसके अलावा कांग्रेस को 20 और भाजपा को 15 सीटें मिली थीं। अब भाजपा की नजर इन्हीं दक्षिणी कर्नाटक की सीटों पर है। वहीं, जेडीएस को एक बार फिर अपने गढ़ में परचम फहराने की उम्मीद है।