फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Kolkata Violence: ‘Painful Past Should Not Be Hidden,’ Governor RN Ravi on the 1946 Violence; What Is History

Kolkata Violence: 'दर्दनाक अतीत छिपाना नहीं चाहिए', 1946 की हिंसा पर बोले राज्यपाल आरएन रवि; क्या है इतिहास?

Wed, 19 Aug 2026 01:54 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Wed, 19 Aug 2026 01:54 AM IST
सार

1946 के डायरेक्ट एक्शन डे के दौरान कोलकाता में हुई हिंसा को बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि ने भारतीय सभ्यता पर हमला बताया है। उन्होंने कहा कि इसे केवल दो समुदायों के बीच सांप्रदायिक संघर्ष मानना घटना की गंभीरता को कम करना है। रवि ने उस दौर में हिंदुओं पर व्यवस्थित हिंसा का आरोप लगाया और इतिहास की इस घटना को नई पीढ़ी को समझाने की जरूरत बताई। आखिर 1946 की उस हिंसा को लेकर फिर बहस क्यों तेज हुई? आखिर क्या है 1946 की हिंसा का इतिहास? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

विज्ञापन
Kolkata Violence: ‘Painful Past Should Not Be Hidden,’ Governor RN Ravi on the 1946 Violence; What Is History
राज्यपाल रवि के बयान से क्यों गरमाई सियासत? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

1946 के डायरेक्ट एक्शन डे के दौरान कोलकाता में हुई हिंसा को लेकर बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि के बयान से एक बार फिर इतिहास और राजनीति दोनों पर बहस तेज हो गई है। कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम में रवि ने इस हिंसा को केवल दो समुदायों के बीच हुआ संघर्ष मानने से इनकार किया। उन्होंने इसे भारतीय सभ्यता पर हमला बताया और कहा कि इस घटना को उसके व्यापक ऐतिहासिक संदर्भ में समझने की जरूरत है।

विज्ञापन

क्या था 1946 का डायरेक्ट एक्शन डे?

राज्यपाल रवि ने कहा कि 16 से 19 अगस्त 1946 के बीच कोलकाता में हिंसा उस समय हुई, जब मुस्लिम लीग ने अलग पाकिस्तान की मांग के समर्थन में ‘डायरेक्ट एक्शन’ का आह्वान किया था। उनके अनुसार, इसके बाद हिंसा भड़क गई और बड़ी संख्या में लोग मारे गए। रवि ने विभिन्न अनुमानों का हवाला देते हुए दावा किया कि चार दिनों की हिंसा में 10 हजार से ज्यादा हिंदू मारे गए। उन्होंने तत्कालीन हुसैन शहीद सुहरावर्दी सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाया।

विज्ञापन


ये भी पढ़ें- Jharkhand: रांची के कोकर पेट्रोल पंप पर जोरदार धमाका, दुकान के शीशे टूटे; बाल-बाल बचे लोग, कैसे हुआ विस्फोट?

विज्ञापन
विज्ञापन

रवि ने इसे सिर्फ सांप्रदायिक हिंसा मानने से क्यों किया इनकार?

रवि ने कहा कि 1946 की घटना को केवल सांप्रदायिक हिंसा कहना उसकी गंभीरता को कम करना होगा। उनका आरोप है कि आजादी के बाद लगातार सरकारों और इतिहासकारों ने इस घटना को पर्याप्त महत्व नहीं दिया। उन्होंने कहा कि इस हिंसा को भारत के विभाजन और उस दौर की राजनीतिक परिस्थितियों के बड़े संदर्भ में देखने की जरूरत है। उनके मुताबिक, भारत की पहचान नफरत और बंटवारे पर आधारित नहीं रही है।

नई पीढ़ी को 1946 की हिंसा याद रखने की जरूरत क्यों?

राज्यपाल ने कहा कि युवाओं को देश के इतिहास के कठिन और दर्दनाक अध्यायों की जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने चीन में नई पीढ़ी को ‘अपमान के एक सदी’ के इतिहास के बारे में पढ़ाए जाने का उदाहरण दिया। रवि ने कहा कि भारत को भी अपने अतीत के दर्दनाक हिस्सों को छिपाना नहीं चाहिए। उनके मुताबिक, 1946 की हिंसा और उसके परिणामों को समझना भविष्य में पैदा होने वाले खतरों के प्रति सतर्क रहने के लिए जरूरी है।

राज्यपाल ने देश की एकता पर क्या कहा?

रवि ने कहा कि भारत की सभ्यतागत सोच ‘वसुधैव कुटुंबकम’, विविधता में एकता, अहिंसा और सार्वभौमिक भाईचारे जैसे मूल्यों पर आधारित रही है। उन्होंने देश के भीतर विभाजन पैदा करने वाली ताकतों को लेकर भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि देश के सामने खतरे बाहर से भी हो सकते हैं और भीतर से भी। राज्यपाल ने 1946 की घटनाओं को याद रखने को इसी व्यापक संदर्भ से जोड़ते हुए देश की एकता और सतर्कता पर जोर दिया।

क्या है 1946 की हिंसा का इतिहास?

  • डायरेक्ट एक्शन डे क्या था?
16 अगस्त 1946 को मुस्लिम लीग ने अलग पाकिस्तान की मांग के समर्थन में ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ मनाने और हड़ताल का आह्वान किया था।
  • कलकत्ता में क्या हुआ?
16 अगस्त से 19 अगस्त 1946 के बीच कलकत्ता में हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच बड़े पैमाने पर हिंसा हुई। शहर के कई हिस्सों में हत्या, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं।
  • हिंसा के पीछे राजनीतिक वजह क्या थी?
उस समय कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच भारत के भविष्य और सत्ता हस्तांतरण को लेकर गंभीर मतभेद थे। मुस्लिम लीग अलग पाकिस्तान की मांग पर जोर दे रही थी।
  • कितने लोगों की मौत हुई?
मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग ऐतिहासिक आंकड़े हैं। विभिन्न अनुमानों में करीब 5,000 से 10,000 लोगों की मौत और हजारों लोगों के घायल होने की बात कही गई है।
  • क्या हिंसा सिर्फ कलकत्ता तक सीमित रही?
कलकत्ता की हिंसा सिर्फ कलकत्ता तक सीमित नहीं रही। इसके बाद बंगाल के दूसरे इलाकों के साथ भी बिहार और नोआखली में भी सांप्रदायिक हिंसा हुई। इससे देश में हिंदू-मुस्लिम तनाव और गहरा गया।

रवि के बयान पर क्यों उठे सवाल?

राज्यपाल के बयान की आलोचना भी सामने आई है। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया और कलकत्ता यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन ने ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ की घटना की राज्यपाल की व्याख्या पर सवाल उठाए हैं। दोनों संगठनों ने विश्वविद्यालय के मंच पर राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़े इस तरह के विचार रखने की उपयुक्तता पर भी सवाल किया। इस तरह 1946 की हिंसा पर रवि के बयान ने इतिहास की व्याख्या, राजनीतिक जिम्मेदारी और विश्वविद्यालयों की भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed