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आंदोलन की बरसी: 30 दिन खुफिया एजेंसियों की नजर में अब लद्दाख, क्या लॉ एंड ऑर्डर के लिए चुनौती बनेंगे जेन जी?

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 31 Aug 2026 08:40 PM IST
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Ladakh Under 30-Day Intelligence Watch as Social Media, Gen Z Emerge as Law and Order Challenges
लद्दाख में तैनात सुरक्षाबल। (फाइल फोटो) - फोटो : आईएएनएस

केंद्रीय गृह मंत्रालय और लद्दाख प्रशासन के लिए सितंबर माह, चुनौतियों से भरा रह सकता है। लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक संरक्षण प्रदान करना, ये मांग प्रबल होती जा रही है। पिछले साल 24 सितंबर को लद्दाख में हुए हिंसक प्रदर्शन में चार लोग मारे गए थे, जबकि दर्जनों प्रदर्शनकारी घायल हुए थे। हिंसक आंदोलन की पहली बरसी पर लद्दाख में कई तरह के  आयोजन, जैसे प्रदर्शन, शांति मार्च और जनसभा आदि प्रस्तावित हैं। इसके मद्देनजर अगले 30 दिन तक 'लद्दाख' पर 'खुफिया' नजर रहेगी। लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखने की चुनौती के केंद्र में 'सोशल मीडिया' और 'जेन जी' रहेंगे। लोकल मशीनरी के अलावा केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां भी इन पर पैनी नजर रखेंगी। 

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केंद्र शासित प्रदेश 'लद्दाख' में कानून व्यवस्था की स्थिति के मद्देनजर सीआरपीएफ की 12 कंपनियों को भेजा गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की स्वीकृति मिलने के बाद 'सीआरपीएफ' और इसकी दंगारोधी इकाई 'आरएएफ', 31 अगस्त से 30 सितंबर तक लद्दाख में कानून व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग देंगी। गृह मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि लद्दाख के गृह विभाग के स्पेशल सेक्रेटरी ने अगस्त माह के दूसरे सप्ताह में केंद्रीय बल की तैनाती के लिए आग्रह किया था। उन्होंने 12 कंपनियां भेजने की बात कही थी। तैनाती की वजह 'कानून व्यवस्था' बनाए रखना बताई गई। 
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लद्दाख के लिए क्यों अहम है सितंबर महीना
लंबे समय से लद्दाख को राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक संरक्षण दिलाने की मांग हो रही है। पिछले साल सितंबर में इन्हीं मुद्दों को लेकर विशाल प्रदर्शन आयोजित हुआ था। हालांकि वह प्रदर्शन हिंसक हो गया। सोनम वांगचुक के खिलाफ रासुका के तहत केस दर्ज हुआ और उन्हें जेल में जाना पड़ा। इसके अलावा अस्सी से ज्यादा लोगों पर विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किए गए। इस बार विभिन्न संगठनों ने लद्दाख में कई तरह के कार्यक्रम/प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा की है। कारगिल से लेह तक दो सप्ताह का शांति मार्च निकाला जाएगा। इसे 'लद्दाख पीस एंड जस्टिस मार्च' का नाम दिया गया है। यह मार्च दस सितंबर को कारगिल से प्रारंभ होकर 24 सितंबर को लेह में समाप्त होगा। इस मौके पर लेह में सार्वजनिक सभा की जाएगी।  
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लद्दाख के मामले पर गृह मंत्रालय में होगी बैठक
केंद्रीय गृह मंत्रालय में सितंबर माह के दौरान ही अहम बैठक होंगी। तीन साल से जारी इन बैठकों में लद्दाख को लेकर उठाई जा रही मांगों का कोई स्थायी हल नहीं निकल सका है। अभी तक ऐसी आधा दर्जन बैठक हो चुकी हैं। लद्दाख में 'लेह एपेक्स बॉडी' (एलएबी) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) के प्रतिनिधियों का कहना है कि हर बार उनकी मांगों पर सहानुभूति के साथ विचार करने का आश्वासन मिलता है। दो बड़ी मांगें हैं, केंद्र सरकार को सबसे पहले उन्हीं को पूरा करना चाहिए। लद्दाख प्रशासन ने अभी तक पिछले वर्ष हुई हिंसा के 25 मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है। बाकी केसों की समीक्षा की जा रही है। लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस, सभी मामलों को बिना शर्त वापस लेने की मांग पर अड़ा है। 


'सोशल मीडिया' और 'जेन जी' पर रहेगी नजर
लद्दाख में कानून व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए 'सोशल मीडिया' और 'जेन जी' पर खास नजर रहेगी। सोशल मीडिया पर किस तरह के संदेश भेजे जा रहे हैं या प्राप्त हो रहे हैं और सीमा पार के मुल्कों से प्रदर्शन/यात्रा को समर्थन मिलना, खुफिया एजेंसी की इन सब पर पैनी निगाह होगी। कोई भी आयोजन हिंसक न हो, इसके लिए पुख्ता सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। केंद्रीय बलों के अलावा जम्मू कश्मीर पुलिस को भी लद्दाख में तैनात किया गया है। तीस दिन तक लद्दाख में चप्पे चप्पे पर तैनात सुरक्षा बल यह सुनिश्चित करेंगे कि वहां किसी भी तरह की हिंसा न होने पाए। जो भी आयोजन हो, वह शांतिपूर्वक रहे। 

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