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लखीमपुर हिंसा: आरोपियों को बचाकर फंसे पीठासीन अधिकारी, सुप्रीम कोर्ट ने जांच तेज करने के हाईकोर्ट को दिए आदेश
Mon, 05 Oct 2026 02:49 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Mon, 05 Oct 2026 02:49 PM IST
सार
लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से पीठासीन अधिकारी पर लगे आरोपों पर तेजी से कार्रवाई करने को कहा है। आरोप है कि जज ने कई मामले खुद के पास ट्रांसफर कर आरोपियों को बरी किया।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से कहा कि वे 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के पीठासीन अधिकारी के खिलाफ लगे आरोपों पर तेजी से कार्रवाई करें। इन आरोपों में कहा गया है कि अधिकारी ने कई मामले खुद के पास ट्रांसफर कर लिए और आरोपियों को बरी कर दिया।
बेंच ने क्या कहा?
भारत के चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार से यह भी कहा कि वह इस चर्चित मामले में ट्रायल चलाने के लिए जल्द से जल्द एक नया पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त करे। बेंच ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से कहा था कि वे मामले की जांच करें और सुधारात्मक कदम उठाने के बाद सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट सौंपें।
पीड़ितों की ओर से क्या तर्क है?
22 सितंबर को, सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ितों की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण की दलीलों पर ध्यान दिया था। भूषण ने कहा था कि 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के पीठासीन अधिकारी का व्यवहार आपत्तिजनक था, क्योंकि उन्होंने कई आपराधिक मामले खुद के पास ट्रांसफर कर लिए थे और आरोपियों को बरी कर दिया था।
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'प्रशासनिक समिति बनाई जानी चाहिए'
सोमवार को, बेंच ने हाई कोर्ट रजिस्ट्री की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट राकेश द्विवेदी की दलीलों पर ध्यान दिया। द्विवेदी ने कहा था कि जज के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए एक प्रशासनिक समिति बनाई जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?
बेंच ने कहा, 'हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को 22 सितंबर, 2026 के हमारे आदेश के पैरा तीन के अनुसार उचित कार्रवाई करनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था, 'हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार (सतर्कता) एक सीलबंद लिफाफे में इस कोर्ट को एक रिपोर्ट भेजेंगे, जिसमें उस कार्रवाई का जिक्र होगा जो हाई कोर्ट के माननीय चीफ जस्टिस द्वारा की जा सकती है।'
आरोपी की ओर से क्या कहा गया है?
आरोपी आशीष मिश्रा की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ दवे, जिन्होंने जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने कहा कि भूषण को इस मामले से जुड़े हर व्यक्ति से समस्या थी, चाहे वह ट्रायल जज हों, पब्लिक प्रॉसिक्यूटर हों या आरोपी हों। उन्होंने कहा कि जज ने मुख्य मामले में कुल 130 से ज्यादा गवाहों में से 86 गवाहों से पूछताछ की थी।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, 3 अक्तूबर 2021 को, उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया में, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के दौरे के खिलाफ़ किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी। एक एसयूवी ने चार किसानों को कुचल दिया था। इसके बाद, कथित तौर पर नाराज किसानों ने एक ड्राइवर और दो भाजपा कार्यकर्ताओं की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। हिंसा में एक पत्रकार की भी मौत हो गई थी। दिसंबर 2023 में, ट्रायल कोर्ट ने मिश्रा और 12 अन्य लोगों के खिलाफ हत्या, आपराधिक साजिश और अन्य अपराधों के आरोप तय किए, जिससे मुख्य मामले में ट्रायल शुरू होने का रास्ता साफ हो गया।
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बेंच ने क्या कहा?
भारत के चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने उत्तर प्रदेश सरकार से यह भी कहा कि वह इस चर्चित मामले में ट्रायल चलाने के लिए जल्द से जल्द एक नया पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त करे। बेंच ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से कहा था कि वे मामले की जांच करें और सुधारात्मक कदम उठाने के बाद सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट सौंपें।
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पीड़ितों की ओर से क्या तर्क है?
22 सितंबर को, सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ितों की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण की दलीलों पर ध्यान दिया था। भूषण ने कहा था कि 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के पीठासीन अधिकारी का व्यवहार आपत्तिजनक था, क्योंकि उन्होंने कई आपराधिक मामले खुद के पास ट्रांसफर कर लिए थे और आरोपियों को बरी कर दिया था।
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'प्रशासनिक समिति बनाई जानी चाहिए'
सोमवार को, बेंच ने हाई कोर्ट रजिस्ट्री की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट राकेश द्विवेदी की दलीलों पर ध्यान दिया। द्विवेदी ने कहा था कि जज के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए एक प्रशासनिक समिति बनाई जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?
बेंच ने कहा, 'हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को 22 सितंबर, 2026 के हमारे आदेश के पैरा तीन के अनुसार उचित कार्रवाई करनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था, 'हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार (सतर्कता) एक सीलबंद लिफाफे में इस कोर्ट को एक रिपोर्ट भेजेंगे, जिसमें उस कार्रवाई का जिक्र होगा जो हाई कोर्ट के माननीय चीफ जस्टिस द्वारा की जा सकती है।'
आरोपी की ओर से क्या कहा गया है?
आरोपी आशीष मिश्रा की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ दवे, जिन्होंने जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने कहा कि भूषण को इस मामले से जुड़े हर व्यक्ति से समस्या थी, चाहे वह ट्रायल जज हों, पब्लिक प्रॉसिक्यूटर हों या आरोपी हों। उन्होंने कहा कि जज ने मुख्य मामले में कुल 130 से ज्यादा गवाहों में से 86 गवाहों से पूछताछ की थी।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, 3 अक्तूबर 2021 को, उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया में, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के दौरे के खिलाफ़ किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी। एक एसयूवी ने चार किसानों को कुचल दिया था। इसके बाद, कथित तौर पर नाराज किसानों ने एक ड्राइवर और दो भाजपा कार्यकर्ताओं की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। हिंसा में एक पत्रकार की भी मौत हो गई थी। दिसंबर 2023 में, ट्रायल कोर्ट ने मिश्रा और 12 अन्य लोगों के खिलाफ हत्या, आपराधिक साजिश और अन्य अपराधों के आरोप तय किए, जिससे मुख्य मामले में ट्रायल शुरू होने का रास्ता साफ हो गया।