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Karnataka: जिस कार्यक्रम को कर्नाटक सरकार ने किया रद्द, KSOU ने किया आयोजित; उपराष्ट्रपति-राज्यपाल हुए शामिल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मैसूर (कर्नाटक) Published by: Nirmal Kant Updated Wed, 25 Mar 2026 10:59 PM IST
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सार

Karnataka: कर्नाटक सरकार ने तीन दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला रद्द कर दी थी, लेकिन केएसओयू ने इसे आयोजित किया। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कार्यक्रम में भाग लिया और 'एकात्म मानव दर्शन' की प्रासंगिकता पर जोर दिया। सरकार ने इसे प्रोटोकॉल उल्लंघन बताया। पढ़िए रिपोर्ट-

Lecture series on RSS ideologue organised at varsity despite Karnataka govt ordering cancellation
कार्यक्रम में राज्यपाल थावरचंद गहलोत - फोटो : एक्स/राजेश पदमार, आरएसएस प्रांत प्रचारक
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विस्तार

कर्नाटक सरकार ने तीन दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला रद्द कर दी थी। लेकिन, मैसूर स्थिर कर्नाटक राज्य मुक्त विश्वविद्यालय (केएसओयू) ने इसे आयोजित किया। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कार्यक्रम का ऑनलाइन उद्घाटन किया। जबकि, राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने  शारीरिक रूप से कार्यक्रम में हिस्सा लिया। 
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सरकार ने मंगलवार को आयोजन रद्द करते हुए कहा था कि विश्वविद्यालय ने पूर्व सूचना दिए बिना यह कार्यक्रम आयोजित किया और इसमें प्रोटोकॉल एवं दिशा-निर्देशों का उल्लंघन हुआ।
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वीडियो संदेश में उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कहा,'एकात्म मानव दर्शन' एक ऐसा मार्गदर्शन प्रदान करता है, जो विकास को नैतिक मूल्यों और कर्तव्यों के साथ जोड़ता है। उन्होंने इस दर्शन की आधुनिक समय में प्रासंगिकता को भी बताया।

वहीं, राज्यपाल गहलोत ने कहा कि 'एकात्म मानव दर्शन' भारत की सांस्कृतिक आत्मा का आधार है और यह दर्शन मानव, समाज और प्रकृति के बीच सामंजस्य को महत्व देता है। उन्होंने कहा कि समाज एक जीवित संरचना है और सभी वर्गों के बीच सहयोग जरूरी है।

सुत्तर मठ के शिवरात्रि देशिकेंद्र महास्वामीजी ने कहा, मैसूर में आयोजित कार्यक्रम देशभर में दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को सामाजिक और शैक्षणिक रूप से लागू करने के प्रयास का हिस्सा है। वक्ताओं ने कहा कि यह दर्शन भौतिक प्रगति और आध्यात्मिक मूल्यों को जोड़ता है और अंत्योदय की अवधारणा ग्रामीण विकास और मूल्य आधारित राजनीति को बढ़ावा दे सकती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर शरणप्पा वी हलेस ने की, जिसमें प्रज्ञा प्रवाह, शिक्षाविद और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन के सदस्य शामिल हुए।

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सरकार ने कार्यक्रम रद्द करते समय कहा कि कुलपति के आयोजन की अध्यक्षता और निजी संगठन को अनुमति देना गंभीर प्रोटोकॉल उल्लंघन था। उच्च शिक्षा मंत्री एमसी सुधाकर ने बताया कि सार्वजनिक विश्वविद्यालय को राजनीति या किसी विचारधारा से प्रभावित नहीं होना चाहिए।

कर्नाटक विधानसभा में भी विपक्ष ने इस मुद्दे को उठाया। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि वह मंत्री सुधाकर से इस पर जवाब लेने को कहेंगे। सूत्रों के अनुसार, गहलोत ने सुबह केएसओयू के कुलपति से पूछा कि क्या कार्यक्रम हो रहा है। पुष्टि होने के बाद ही राज्यपाल मैसूर गए। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक पदाधिकारी ने कहा कि मंत्री को यह नहीं पता था कि कार्यक्रम में कौन शामिल होगा और प्रोटोकॉल क्या होगा।





 
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