फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Madhya Pradesh Moves Closer to UCC: Here's What the Draft Says on Marriage, Divorce and Live-in

Explainer: मध्य प्रदेश में यूसीसी बिल पास, शादी-तलाक से लेकर लिव-इन पर जानें क्या होंगे नए नियम?

Tue, 21 Jul 2026 03:30 PM IST
रिया दुबे स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Tue, 21 Jul 2026 03:30 PM IST
सार

मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) बिल विधानसभा से पास हो गया है। इसमें शादी, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े एक समान नियम प्रस्तावित किए गए हैं। आइए जानते हैं, इस ड्राफ्ट में क्या-क्या बदलाव किए गए हैं और इनका लोगों पर क्या असर पड़ सकता है।

विज्ञापन
Madhya Pradesh Moves Closer to UCC: Here's What the Draft Says on Marriage, Divorce and Live-in
यूसीसी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश विधानसभा ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक को मंजूरी दे दी है। यह विधेयक सोमवार को मानसून सत्र में सदन में पेश किया गया था, जिसे मंगलवार को चर्चा के बाद पारित कर दिया गया। सरकार इसे सभी नागरिकों को बिना किसी भेदभाव के समान अधिकार देने वाला बिल बता रही है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश भी गोवा, उत्तराखंड, गुजरात जैसे राज्यों में शामिल हो गया है। 

विज्ञापन


ऐसे में आइए जानते हैं कि समान नागरिक संहिता (UCC) क्या है? संविधान इस पर क्या कहता है? यूसीसी का इतिहास क्या है? मध्य प्रदेश में UCC लागू करने की तैयारी कैसे हुई? ड्राफ्ट बिल में क्या-क्या शामिल किया गया है? भारत के किन-किन राज्यों में यह लागू किया जा चुका है?

विज्ञापन

Madhya Pradesh Moves Closer to UCC: Here's What the Draft Says on Marriage, Divorce and Live-in
पर्सन लॉ - फोटो : Amar Ujala

समान नागरिक संहिता क्या है?

समान नागरिक संहिता का अर्थ है हर नागरिक के लिए एक समान कानून, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का क्यों न हो। इसके लागू होने के बाद संबंधित राज्य में शादी, तलाक, गोद लेने और जमीन-जायदाद के बंटवारे में सभी धर्मों के लिए एक ही कानून लागू होते हैं। 

यह मुद्दा कई दशकों से राजनीतिक बहस के केंद्र में रहा है। UCC केंद्र की मौजूदा सत्ताधारी भाजपा के लिए जनसंघ के जमाने से प्राथमिकता वाला एजेंडा रहा है। भाजपा सत्ता में आने पर UCC को लागू करने का वादा करने वाली पहली पार्टी थी और यह मुद्दा उसके 2019 के लोकसभा चुनाव के घोषणापत्र का भी हिस्सा था। इसके साथ ही उसके शासन वाले राज्यों में इसे जोर-शोर से लागू भी कराया जा रहा है। मध्य प्रदेश की कैबिनेट से इसकी मंजूरी इसी कड़ी का हिस्सा है।  

संविधान इस पर क्या कहता है?

देश में संविधान के अनुच्छेद 44 में समान नागरिक संहिता को लेकर प्रावधान है। इसमें कहा गया है कि राज्य इसे लागू कर सकता है। इसका उद्देश्य धर्म के आधार पर किसी भी वर्ग विशेष के साथ होने वाले भेदभाव या पक्षपात को खत्म करना और विविध सांस्कृतिक समूहों के बीच सामंजस्य स्थापित करना था। संविधान निर्माता डॉ. बीआर आम्बेडकर ने कहा था कि UCC जरूरी है, लेकिन फिलहाल यह स्वैच्छिक रहना चाहिए।

संविधान के मसौदे के अनुच्छेद 35 को भारत के संविधान के भाग IV में अनुच्छेद 44 के रूप में राज्य नीति के निदेशक सिद्धांतों के हिस्से के रूप में जोड़ा गया था। इसे संविधान में इस नजरिए के रूप में शामिल किया गया था जो तब पूरा होगा जब राष्ट्र इसे स्वीकार करने के लिए तैयार होगा और UCC को सामाजिक स्वीकृति दी जा सकती है।

Madhya Pradesh Moves Closer to UCC: Here's What the Draft Says on Marriage, Divorce and Live-in
यूसीसी - फोटो : Amar Ujala

इसका इतिहास क्या है?

UCC की उत्पत्ति औपनिवेशिक भारत में हुई जब ब्रिटिश सरकार ने 1835 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट में अपराधों, सबूतों और अनुबंधों से संबंधित भारतीय कानूनों की एकरूपता की आवश्यकता पर जोर दिया गया था। विशेष रूप से इसमें यह सिफारिश की गई थी कि हिंदुओं और मुसलमानों के व्यक्तिगत कानूनों (पर्सनल लॉ) को  इस तरह के संहिताकरण के बाहर रखा जाए। 

ब्रिटिश सरकार को 1941 में हिंदू कानून को संहिताबद्ध करने के लिए बी एन राव समिति बनाई। समिति ने शास्त्रों के अनुसार, एक संहिताबद्ध हिंदू कानून की सिफारिश की, जो महिलाओं को समान अधिकार देगा। इसके साथ ही समिति ने हिंदुओं के लिए विवाह और उत्तराधिकार के मुद्दों में भी नागरिक संहिता की सिफारिश की।

विज्ञापन

Madhya Pradesh Moves Closer to UCC: Here's What the Draft Says on Marriage, Divorce and Live-in
मध्यप्रदेश में यूसीसी - फोटो : Amar Ujala

मध्य प्रदेश में UCC लागू करने की तैयारी कैसे हुई?

मध्य प्रदेश सरकार के अनुसार, राज्य में अभी विवाह, विवाह-विच्छेद, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण, लिव-इन संबंध और अन्य पारिवारिक मामलों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं। सरकार का कहना है कि इन सभी कानूनों का समग्र अध्ययन कर एक समान, संतुलित और व्यावहारिक कानूनी व्यवस्था तैयार करने की आवश्यकता महसूस की गई।

इसी उद्देश्य से 27 अप्रैल 2026 को न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति का गठन किया गया। समिति में शिक्षाविद, विधि विशेषज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे।

समिति ने राज्य में लागू विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों का अध्ययन किया। साथ ही उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों में अपनाए गए मॉडल का भी परीक्षण किया। समिति ने आम नागरिकों, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों और शिक्षाविदों से सुझाव और आपत्तियां मांगीं। महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा, समानता और संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सुझाव तैयार किए गए। लिव-इन संबंधों के पंजीकरण और उनसे जुड़े अधिकारों एवं दायित्वों पर भी समिति ने विचार किया। साथ ही प्रस्तावित कानून के कानूनी, प्रशासनिक और क्रियान्वयन संबंधी पहलुओं का अध्ययन किया, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी जटिलता न हो। समिति को 60 दिनों के भीतर ड्राफ्ट बिल और विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपने की जिम्मेदारी दी गई।

जनता से सुझाव कैसे लिए गए?

जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए 22 मई 2026 को एक वेब पोर्टल शुरू किया गया।

  • इस दौरान लगभग 3.49 करोड़ एसएमएस भेजे गए।
  • वेब पोर्टल पर 9,58,675 सुझाव प्राप्त हुए।
  • जिला और राज्य स्तर पर 50 से अधिक जनपरामर्श बैठकें आयोजित की गईं।
  • इन बैठकों से 10,134 से अधिक सुझाव मिले।

जन परामर्श में क्या सामने आया?

  • सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 93.54% लोगों ने प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने का समर्थन किया।
  • 92.20% लोगों ने कहा कि सभी समुदायों में महिला और पुरुष के लिए समान कानून होना चाहिए।
  • 91.32% लोगों ने माना कि भेदभावपूर्ण तलाक कानून समाप्त होने चाहिए।
  • 92.66% लोगों ने कहा कि महिलाओं और पुरुषों को संपत्ति में समान अधिकार मिलने चाहिए।
  • 90.96% लोगों ने माना कि अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों से कानूनी जटिलताएं बढ़ती हैं।
  • 86.78% लोगों ने कहा कि मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किए बिना समान नागरिक संहिता लागू की जा सकती है।

Madhya Pradesh Moves Closer to UCC: Here's What the Draft Says on Marriage, Divorce and Live-in
यूसीसी - फोटो : Amar Ujala

ड्राफ्ट बिल के प्रमुख प्रावधान क्या है?

ड्राफ्ट बिल में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं।

  • विवाह के बाद दूसरा विवाह तब तक नहीं किया जा सकेगा, जब तक पहला विवाह कानूनी रूप से समाप्त न हो जाए।
  • केवल तलाक, तलाक, तलाक कह देने से विवाह समाप्त नहीं होगा। तलाक तभी प्रभावी होगा जब कानूनी प्रक्रिया पूरी होगी।
  • महिलाओं और पुरुषों को उत्तराधिकार में समान अधिकार मिलेंगे।
  • जिन कानूनों में महिलाओं के अधिकार कम थे, वहां भाई और बहनों को समान अधिकार दिए जाएंगे।
  • सरकार के अनुसार यह कानून सभी धर्मों का सम्मान करता है और किसी धर्म को नीचा नहीं दिखाता।
  • महिलाओं की गरिमा, सम्मान और नारी सशक्तिकरण को इस कानून का प्रमुख उद्देश्य बताया गया है।
  • अनुसूचित जनजातियों और संरक्षित रूढ़िगत समूहों को इस कानून से बाहर रखा गया है।
  • धार्मिक समारोह, अनुष्ठान और परंपराएं पहले की तरह जारी रहेंगी।
  • विवाह का पंजीकरण पंचायत से लेकर नगरीय निकाय तक अनिवार्य होगा।
  • एक जीवनसाथी के रहते दूसरा विवाह करने की अनुमति नहीं होगी।
  • न्यायालय के बाहर विवाह विच्छेद मान्य नहीं होगा।
  • पुत्र और पुत्रियों को समान अधिकार प्राप्त होंगे।
  • महिलाओं को संपत्ति में वही अधिकार मिलेंगे जो पुरुषों को प्राप्त हैं।

Madhya Pradesh Moves Closer to UCC: Here's What the Draft Says on Marriage, Divorce and Live-in
यूसीसी - फोटो : Amar Ujala

लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर क्या नियम?

  • लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए एक महीने के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
  • लिव-इन संबंध के लिए पुरुष की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिला की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होगी।
  • अगर कोई व्यक्ति पहले से विवाहित है तो वह इस व्यवस्था के तहत लिव-इन संबंध में नहीं आ सकेगा।
  • अगर कोई विवाहित व्यक्ति लिव-इन संबंध बनाता है तो उसे पांच वर्ष तक की सजा हो सकती है।

देश के किन राज्यों में यूसीसी लागू है या लागू होने की प्रक्रिया में है?

  • गोवा- राज्य में 1867 से समान सिविल कोड लागू है।
  • उत्तराखंड- राज्य में 27 जनवरी 2025 से यूसीसी लागू है। 
  • गुजरात- यूसीसी बिल 24 मार्च 2026 को विधानसभा से पारित हो चुका है। कानून लागू करने की प्रक्रिया पूरी की गई।
  • पश्चिम बंगाल- राज्य सरकार ने यूसीसी लागू करने की घोषणा की है। सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में समिति बनाई गई है, जो ड्राफ्ट विधेयक की समीक्षा कर रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि समिति की रिपोर्ट के आधार पर विधेयक आगे बढ़ाया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed