{"_id":"6a926433075e76698b027685","slug":"maharashtra-bribe-case-two-officers-arrested-action-against-cgst-officials-illegal-release-order-know-detail-2026-08-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"1.5 करोड़ की घूस, दो अफसर गिरफ्तार: कोर्ट ने सीजीएसटी के अधिकारियों पर कार्रवाई अवैध बताई, छोड़ने का आदेश","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
1.5 करोड़ की घूस, दो अफसर गिरफ्तार: कोर्ट ने सीजीएसटी के अधिकारियों पर कार्रवाई अवैध बताई, छोड़ने का आदेश
Sat, 29 Aug 2026 10:17 AM IST
ज्योति भास्कर
एजेंसी, ठाणे/नई दिल्ली।
एजेंसी, ठाणे/नई दिल्ली।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sat, 29 Aug 2026 10:17 AM IST
विज्ञापन
सीबीआई (सांकेतिक)
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सीबीआई ने महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) के अतिरिक्त आयुक्त आईआरएस अधिकारी विनय कुमार कंथेती, सीजीएसटी के अधीक्षक राकेश कुमार सिन्हा समेत तीन आरोपियों को 1.5 करोड़ रुपये की घूसखोरी में गिरफ्तार कर लिया। हालांकि कुछ घंटे बाद ही अदालत ने इस गिरफ्तारी को अवैध करार देते हुए तीनों को 15-15 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया।
विज्ञापन
ठाणे की अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। कोर्ट ने सीबीआई की आरोपियों की हिरासत में पूछताछ की मांग को भी खारिज कर दिया और कहा कि घूस की रकम पहले ही बरामद की जा चुकी है। हिरासत के लिए संतोषजनक कारण नहीं बनता है। वहीं, सूत्रों ने कहा कि सीबीआई कोर्ट में फिर से अर्जी देगी।
विज्ञापन
सीबीआई ने 40 लाख रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा था
- सीबीआई के मुताबिक,पत्थर खनन फर्म से जुड़े जीएसटी और रॉयल्टी मामले को रफा-दफा करने के लिए डेढ़ करोड़ रुपये की घूस की मांगी गई थी। एजेंसी ने बृहस्पतिवार को नरेंद्र राजपूत को 40 लाख लेते रंगे हाथों पकड़ा।
- इसके बाद 2009 बैच के आईआरएस के अधिकारी कंथेती और सिन्हा को भी दबोच लिया। आरोपियों के ठिकानों से 43 लाख नकद और करीब 90 लाख रुपये के आभूषण बरामद किए।
- अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एमएस लोने ने आदेश में कहा कि जांच अधिकारी ने ऐसी केस डायरी सौंपी थी, जिसमें कागजात टैग से बंधे थे और वे ढीले रूप से कसे हुए थे। ये दस्तावेज कानून में तय प्रावधानों के अनुसार नहीं थे।
विज्ञापन