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क्या हम सपने नहीं देख सकते?: छठी की छात्रा ने उपमुख्यमंत्री को लिखा पत्र, खोली स्कूल की पोल; जांच समिति गठित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Thu, 22 Jan 2026 05:34 PM IST
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सार
महाराष्ट्र के बीड जिले की छठी कक्षा की छात्रा अंकिता कवचाट ने अपने जिला परिषद स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर उपमुख्यमंत्री अजित पवार को पत्र लिखा। पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। छात्रा ने गन्ना मजदूरों के बच्चों के सपनों की बात उठाई। आइए जानते हैं छात्रा ने पत्र में क्या कुछ लिखा।
अजित पवार, डिप्टी सीएम, महाराष्ट्र
- फोटो : ANI
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विस्तार
महाराष्ट्र के बीड जिले से शिक्षा व्यवस्था को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां छठी कक्षा में पढ़ने वाली एक छात्रा ने अपने गांव के जिला परिषद स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर सीधे राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार को पत्र लिखा है। छात्रा के इस पत्र ने प्रशासन और समाज दोनों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
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बीड जिले के परभणी केसापुरी गांव की रहने वाली छात्रा अंकिता कवचाट ने अपने पत्र में साफ शब्दों में लिखा कि उसके स्कूल में पीने का साफ पानी, शौचालय, हाथ धोने की व्यवस्था और बच्चों के खेलने के खिलौने तक नहीं हैं। उसने सवाल उठाया कि जब ये सुविधाएं कागजों में दिखाई जाती हैं, तो हकीकत में बच्चों को क्यों नहीं मिलतीं।
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छात्रा ने बयां किया दर्द
अंकिता ने अपने पत्र में लिखा कि वह और उसके जैसे कई बच्चे गन्ना काटने वाले मजदूर परिवारों से आते हैं। उसने सवाल किया कि क्या ऐसे बच्चों को बड़े सपने देखने का हक नहीं है। उसने लिखा कि शिक्षक मेहनत करते हैं, लेकिन सुविधाओं की कमी के कारण पढ़ाई में परेशानी होती है। इसके बावजूद बच्चे स्कूल इसलिए आते हैं क्योंकि वे पढ़ना चाहते हैं और आगे बढ़ना चाहते हैं।
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छात्रा ने पत्र में कहा कि वह कोई बड़ी मांग नहीं कर रही है। केवल साफ शौचालय, पीने का पानी, खिलौने और ईमानदारी से काम करने वाला प्रबंधन चाहिए। उसने उपमुख्यमंत्री से अपील की कि उनका एक फैसला कई बच्चों की जिंदगी बदल सकता है। यह पत्र गुरुवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद मामला और गंभीर हो गया।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
पत्र सामने आने के बाद जिला परिषद प्रशासन हरकत में आ गया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई जा रही है। समिति स्कूल की स्थिति की जांच करेगी और रिपोर्ट सौंपेगी। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि यदि लापरवाही पाई गई तो जिम्मेदारों पर कदम उठाए जाएंगे।
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