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Freedom of Religion Bill: महाराष्ट्र में भी जबरन धर्मांतरण अपराध होगा, CM बोले- विधेयक किसी धर्म के खिलाफ नहीं
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: अमन तिवारी
Updated Tue, 17 Mar 2026 10:39 AM IST
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सार
महाराष्ट्र विधानसभा ने जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 पास कर दिया है। इसमें दोषियों को 10 साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है। शिवसेना (यूबीटी) ने सरकार का साथ दिया, जबकि कांग्रेस और एनसीपी ने विरोध किया। अब इस बिल पर विधान परिषद में चर्चा होगी।
देवेंद्र फडणवीस, सीएम, महाराष्ट्र
- फोटो : ANI
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विस्तार
महाराष्ट्र विधानसभा में सोमवार देर रात लंबी बहस के बाद 'धर्म स्वतंत्रता विधेयक-2026' पास हो गया। सरकार ने कहा कि गैरकानूनी और जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए यह कानून बहुत जरूरी है। इस मुद्दे पर विपक्षी गठबंधन 'महा विकास अघाड़ी' में फूट दिखाई दी। शिवसेना (यूबीटी) ने इस बिल का समर्थन किया, जबकि कांग्रेस, एनसीपी (एसपी) और समाजवादी पार्टी ने इसका कड़ा विरोध किया। अब मंगलवार को इस बिल पर विधान परिषद में चर्चा होगी।
नए कानून में सजा के कड़े प्रावधान
इस नए कानून में सजा के कड़े प्रावधान किए गए हैं। अगर कोई व्यक्ति शादी का झांसा देकर किसी का धर्म बदलवाता है, तो उसे 7 साल की जेल और 1 लाख रुपये का जुर्माना भरना होगा। यदि यह अपराध किसी नाबालिग, महिला या अनुसूचित जाति-जनजाति (एससी-एसटी) के व्यक्ति के साथ होता है, तो जुर्माना 5 लाख रुपये होगा। सामूहिक धर्मांतरण के मामले में भी 7 साल की जेल और 5 लाख रुपये जुर्माने का नियम है। जो लोग बार-बार यह अपराध करेंगे, उन्हें 10 साल तक की जेल और 5 लाख रुपये जुर्माना हो सकता है।
क्या बोले सीएम फडणवीस?
विधानसभा से पारित होने के बाद अब यह विधेयक पारित करने के लिए विधान परिषद को भेजा गया है। मंगलवार को विधान परिषद में इस पर चर्चा होगी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सदन में कहा कि यह कानून किसी खास धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं है। इसका एकमात्र मकसद धोखे और लालच से होने वाले धर्मांतरण को रोकना है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश और हरियाणा जैसे कई राज्यों में पहले से ही ऐसे कानून लागू हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान हर व्यक्ति को अपना धर्म मानने की आजादी देता है, लेकिन किसी को डरा-धमकाकर या लालच देकर धर्म बदलवाने का अधिकार किसी के पास नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कई महिलाओं को प्रेम जाल में फंसाकर शादी की जाती है और बाद में उन्हें छोड़ दिया जाता है, यह कानून ऐसी घटनाओं को रोकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 25 सबको अपना धर्म मानने और प्रचार करने का अधिकार देता है, लेकिन किसी को मजबूर करना गलत है।
ये भी पढ़ें: 11.4 करोड़ का छात्रवृत्ति घोटाला: पांच राज्यों के नोडल अधिकारियों, फर्जी संस्थानों और छात्रों पर CBI की एफआईआर
बिल का मकसद जबरन धर्मांतरण को रोकना
विधानसभा में बोलते हुए सीएम फडणवीस ने यह भी कहा, मामले में प्रभावित व्यक्ति या करीबी रिश्तेदार शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जबकि पुलिस भी कुछ मामलों में कार्रवाई कर सकती है। बिल पास कराने के लिए समर्थन मांगते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि बिल का मकसद नागरिकों को गैर-कानूनी धर्म बदलने से बचाना और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में मदद करना है।
धर्म परिवर्तन से पहले देनी होगी जानकारी
बिल के अनुसार, जो व्यक्ति अपना धर्म बदलना चाहता है, उसे 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को नोटिस देना होगा। धर्म बदलने के 21 दिनों के भीतर प्रशासन को जानकारी देना भी जरूरी है। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो वह धर्मांतरण अवैध माना जाएगा। एक खास प्रावधान यह भी है कि अगर अवैध धर्मांतरण के आधार पर हुई शादी से कोई बच्चा पैदा होता है, तो उस बच्चे को उसकी मां के मूल धर्म (धर्मांतरण से पहले वाला धर्म) का माना जाएगा।
शिवसेना (यूबीटी) ने किया समर्थन
शिवसेना (यूबीटी) ने इस बिल का समर्थन किया है। विधायक भास्कर जाधव ने कहा कि यह कानून सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होता है और इसका उद्देश्य गलत प्रथाओं को रोकना है। हालांकि, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कुछ विधायकों ने इसका विरोध किया। उन्होंने इसे निजता के अधिकार का उल्लंघन बताया और आशंका जताई कि इससे समाज में आपसी तनाव बढ़ सकता है। बहस के दौरान एनसीपी (एसपी) विधायक जितेंद्र आव्हाड की एक टिप्पणी पर सदन में भारी हंगामा हुआ। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक का जिक्र किया था, जिस पर विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने सदन से माफी मांगी।
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नए कानून में सजा के कड़े प्रावधान
इस नए कानून में सजा के कड़े प्रावधान किए गए हैं। अगर कोई व्यक्ति शादी का झांसा देकर किसी का धर्म बदलवाता है, तो उसे 7 साल की जेल और 1 लाख रुपये का जुर्माना भरना होगा। यदि यह अपराध किसी नाबालिग, महिला या अनुसूचित जाति-जनजाति (एससी-एसटी) के व्यक्ति के साथ होता है, तो जुर्माना 5 लाख रुपये होगा। सामूहिक धर्मांतरण के मामले में भी 7 साल की जेल और 5 लाख रुपये जुर्माने का नियम है। जो लोग बार-बार यह अपराध करेंगे, उन्हें 10 साल तक की जेल और 5 लाख रुपये जुर्माना हो सकता है।
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क्या बोले सीएम फडणवीस?
विधानसभा से पारित होने के बाद अब यह विधेयक पारित करने के लिए विधान परिषद को भेजा गया है। मंगलवार को विधान परिषद में इस पर चर्चा होगी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सदन में कहा कि यह कानून किसी खास धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं है। इसका एकमात्र मकसद धोखे और लालच से होने वाले धर्मांतरण को रोकना है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश और हरियाणा जैसे कई राज्यों में पहले से ही ऐसे कानून लागू हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान हर व्यक्ति को अपना धर्म मानने की आजादी देता है, लेकिन किसी को डरा-धमकाकर या लालच देकर धर्म बदलवाने का अधिकार किसी के पास नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कई महिलाओं को प्रेम जाल में फंसाकर शादी की जाती है और बाद में उन्हें छोड़ दिया जाता है, यह कानून ऐसी घटनाओं को रोकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 25 सबको अपना धर्म मानने और प्रचार करने का अधिकार देता है, लेकिन किसी को मजबूर करना गलत है।
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बिल का मकसद जबरन धर्मांतरण को रोकना
विधानसभा में बोलते हुए सीएम फडणवीस ने यह भी कहा, मामले में प्रभावित व्यक्ति या करीबी रिश्तेदार शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जबकि पुलिस भी कुछ मामलों में कार्रवाई कर सकती है। बिल पास कराने के लिए समर्थन मांगते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि बिल का मकसद नागरिकों को गैर-कानूनी धर्म बदलने से बचाना और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में मदद करना है।
धर्म परिवर्तन से पहले देनी होगी जानकारी
बिल के अनुसार, जो व्यक्ति अपना धर्म बदलना चाहता है, उसे 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को नोटिस देना होगा। धर्म बदलने के 21 दिनों के भीतर प्रशासन को जानकारी देना भी जरूरी है। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो वह धर्मांतरण अवैध माना जाएगा। एक खास प्रावधान यह भी है कि अगर अवैध धर्मांतरण के आधार पर हुई शादी से कोई बच्चा पैदा होता है, तो उस बच्चे को उसकी मां के मूल धर्म (धर्मांतरण से पहले वाला धर्म) का माना जाएगा।
शिवसेना (यूबीटी) ने किया समर्थन
शिवसेना (यूबीटी) ने इस बिल का समर्थन किया है। विधायक भास्कर जाधव ने कहा कि यह कानून सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होता है और इसका उद्देश्य गलत प्रथाओं को रोकना है। हालांकि, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कुछ विधायकों ने इसका विरोध किया। उन्होंने इसे निजता के अधिकार का उल्लंघन बताया और आशंका जताई कि इससे समाज में आपसी तनाव बढ़ सकता है। बहस के दौरान एनसीपी (एसपी) विधायक जितेंद्र आव्हाड की एक टिप्पणी पर सदन में भारी हंगामा हुआ। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक का जिक्र किया था, जिस पर विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने सदन से माफी मांगी।
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