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Maharashtra: नागपुर विस्फोट में लापरवाही उजागर, कंपनी के नौ निदेशक गिरफ्तार; 2600+ लोग सुरक्षित जगह भेजे गए
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: Himanshu Singh Chandel
Updated Mon, 02 Mar 2026 08:19 PM IST
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सार
नागपुर जिले की विस्फोटक फैक्ट्री में हुए भीषण धमाके में 19 मजदूरों की मौत के बाद पुलिस ने सुरक्षा लापरवाही के आरोप में कंपनी के नौ निदेशकों को गिरफ्तार किया है। जांच में फैक्ट्री में गंभीर सुरक्षा खामियां सामने आई हैं। मृतकों की पहचान डीएनए जांच से की जा रही है।
महाराष्ट्र के पालघर में पुलिस तैनात
- फोटो : ANI
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विस्तार
महाराष्ट्र के नागपुर जिले में विस्फोटक सामग्री बनाने वाली फैक्ट्री में हुए भीषण धमाके ने औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में अब तक 19 मजदूरों की मौत हो चुकी है जबकि 24 लोग घायल होकर अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि अब-तक 2600 से ज्यादा लोग सुरक्षित जगह पर भेजे जा चुके हैं।
शुरुआती जांच में सुरक्षा नियमों की अनदेखी सामने आने के बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कंपनी के नौ निदेशकों को गिरफ्तार किया है। प्रशासन ने मामले को गंभीर औद्योगिक लापरवाही का मामला माना है।
जांच एजेंसियों की प्रारंभिक रिपोर्ट में क्या?
नागपुर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक हर्ष पोद्दार ने बताया कि कटोल तहसील के राउलगांव स्थित एसबीएल एनर्जी लिमिटेड की डेटोनेटर पैकिंग यूनिट में यह शक्तिशाली विस्फोट हुआ था। जांच एजेंसियों की प्रारंभिक रिपोर्ट में फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों की कमी और संचालन में लापरवाही के संकेत मिले हैं। इसके आधार पर कंपनी के 21 निदेशकों और शेयरधारकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 यानी गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है।
ये भी पढ़ें- ईरान-इस्राइल युद्ध का असर: दिल्ली में फंसे पत्रकार ने सुनाई व्यथा, भारतीय ने बढ़ाए मदद के हाथ; वीडियो वायरल
सुरक्षा जांच में सामने आई गंभीर खामियां
पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन और औद्योगिक सुरक्षा व आरोग्य निदेशालय की शुरुआती जांच में कई सुरक्षा चूक सामने आई हैं। अधिकारियों के अनुसार फैक्ट्री में विस्फोटक सामग्री के संचालन और सुरक्षा प्रबंधन में गंभीर लापरवाही बरती गई थी। पुलिस ने कहा कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और बाकी आरोपियों की तलाश की जा रही है। हादसा इतना भयानक था कि कई शवों की पहचान तुरंत संभव नहीं हो सकी।
डीएनए जांच से होगी मृतकों की पहचान
प्रशासन ने बताया कि विस्फोट की तीव्रता के कारण कई मजदूरों के शव बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। इसलिए मृतकों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए परिजनों के डीएनए नमूने लिए जा रहे हैं। घायलों में कई की हालत गंभीर बताई जा रही है और उनका इलाज जारी है। प्रशासन ने अस्पतालों को विशेष निर्देश दिए हैं ताकि सभी घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सके।
मृतकों के परिवारों को आर्थिक मदद और जांच के आदेश
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने उच्चस्तरीय बैठक के बाद कहा कि प्रथम दृष्टया कंपनी की लापरवाही सामने आई है। कंपनी मृतकों के परिजनों को 75 लाख रुपये और घायलों को 25 लाख रुपये देगी। इसके अलावा राज्य सरकार की ओर से 5 लाख और केंद्र सरकार की ओर से 2 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। इस तरह प्रत्येक मृतक परिवार को कुल 82 लाख रुपये की मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने पूरे मामले की गहन जांच के आदेश देते हुए एक महीने में रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
क्या बोले स्थानीय अधिकारी?
अधिकारियों ने बताया कि मुंबई के बाहरी इलाके में बोइसर एमआईडीसी क्षेत्र में स्थित इकाई के पांच किलोमीटर के दायरे में ओलियम (फ्यूमिंग सल्फ्यूरिक एसिड) गैस का रिसाव हुआ, जिसके चलते एहतियात के तौर पर लोगों को वहां से निकाला गया। अपराह्न करीब दो बजे भगेरिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड की इकाई में हुए रिसाव से सफेद धुएं का एक घना बादल बन गया जो हवा की गति के कारण तेजी से फैल गया, जिससे औद्योगिक क्षेत्र में रहने वाले निवासियों और श्रमिकों के बीच दहशत फैल गई। अधिकारियों ने बताया कि कंपनी में इस्तेमाल का करीब 65 फीसदी गैस रिसाव होने से यह स्थिति उत्पन्न हुई। उस समय कंपनी में 158 कर्मचारी कार्यरत थे। हालांकि वे सभी सुरक्षित हैं।
पालघर की जिलाधिकारी डॉ. इंदु रानी जाखड़ ने कहा कि आपदा प्रबंधन योजना को तुरंत सक्रिय कर दिया गया है। बताया गया कि यह रिसाव 2,500 लीटर क्षमता वाले ओलियम डे टैंक से हुआ। हवा की दिशा के कारण धुआं आसपास के इलाकों में फैल गया, जिससे लगभग पांच किलोमीटर के दायरे पर असर पड़ा। एहतियात के तौर पर, अधिकारियों ने स्थानीय स्कूल तारापुर विद्यामंदिर से 1,600 छात्रों को तत्काल निकालने का आदेश दिया। इसके अलावा, भागेरिया इंडस्ट्रीज और आसपास की कंपनियों के 1,000 से अधिक श्रमिकों को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
बचाव दल ने गैस रिसाव का पता लगाया, स्थिति से निपटने में जुटी टीमें
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) और अग्निशमन दल की टीमों को शुरू में उस इकाई तक पहुंचने में बाधाओं का सामना करना पड़ा जहां गैस रिसाव हुआ था। अधिकारियों ने बताया कि रासायनिक विशेषज्ञों और एनडीआरएफ कर्मियों ने अंततः स्रोत का पता लगाया और सेल्फ-कंटेन्ड ब्रीदिंग अपेरटस (एससीबीए) का उपयोग करते हुए परिसर में प्रवेश किया। धुएं को नियंत्रित करने के लिए, बचाव दल ने रिसाव वाले टैंक के चारों ओर रेत की बोरियां लगा दी हैं। रिसाव स्थल पर मौजूद जिला पुलिस अधीक्षक यतीश देशमुख ने ग्रामीणों से कहा कि वे घबरायें नहीं क्योंकि अधिकारी स्थिति से निपटने के लिए हर संभव उपाय कर रहे थे।
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शुरुआती जांच में सुरक्षा नियमों की अनदेखी सामने आने के बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कंपनी के नौ निदेशकों को गिरफ्तार किया है। प्रशासन ने मामले को गंभीर औद्योगिक लापरवाही का मामला माना है।
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जांच एजेंसियों की प्रारंभिक रिपोर्ट में क्या?
नागपुर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक हर्ष पोद्दार ने बताया कि कटोल तहसील के राउलगांव स्थित एसबीएल एनर्जी लिमिटेड की डेटोनेटर पैकिंग यूनिट में यह शक्तिशाली विस्फोट हुआ था। जांच एजेंसियों की प्रारंभिक रिपोर्ट में फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों की कमी और संचालन में लापरवाही के संकेत मिले हैं। इसके आधार पर कंपनी के 21 निदेशकों और शेयरधारकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 यानी गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है।
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सुरक्षा जांच में सामने आई गंभीर खामियां
पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन और औद्योगिक सुरक्षा व आरोग्य निदेशालय की शुरुआती जांच में कई सुरक्षा चूक सामने आई हैं। अधिकारियों के अनुसार फैक्ट्री में विस्फोटक सामग्री के संचालन और सुरक्षा प्रबंधन में गंभीर लापरवाही बरती गई थी। पुलिस ने कहा कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और बाकी आरोपियों की तलाश की जा रही है। हादसा इतना भयानक था कि कई शवों की पहचान तुरंत संभव नहीं हो सकी।
डीएनए जांच से होगी मृतकों की पहचान
प्रशासन ने बताया कि विस्फोट की तीव्रता के कारण कई मजदूरों के शव बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। इसलिए मृतकों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए परिजनों के डीएनए नमूने लिए जा रहे हैं। घायलों में कई की हालत गंभीर बताई जा रही है और उनका इलाज जारी है। प्रशासन ने अस्पतालों को विशेष निर्देश दिए हैं ताकि सभी घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सके।
मृतकों के परिवारों को आर्थिक मदद और जांच के आदेश
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने उच्चस्तरीय बैठक के बाद कहा कि प्रथम दृष्टया कंपनी की लापरवाही सामने आई है। कंपनी मृतकों के परिजनों को 75 लाख रुपये और घायलों को 25 लाख रुपये देगी। इसके अलावा राज्य सरकार की ओर से 5 लाख और केंद्र सरकार की ओर से 2 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। इस तरह प्रत्येक मृतक परिवार को कुल 82 लाख रुपये की मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने पूरे मामले की गहन जांच के आदेश देते हुए एक महीने में रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
क्या बोले स्थानीय अधिकारी?
अधिकारियों ने बताया कि मुंबई के बाहरी इलाके में बोइसर एमआईडीसी क्षेत्र में स्थित इकाई के पांच किलोमीटर के दायरे में ओलियम (फ्यूमिंग सल्फ्यूरिक एसिड) गैस का रिसाव हुआ, जिसके चलते एहतियात के तौर पर लोगों को वहां से निकाला गया। अपराह्न करीब दो बजे भगेरिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड की इकाई में हुए रिसाव से सफेद धुएं का एक घना बादल बन गया जो हवा की गति के कारण तेजी से फैल गया, जिससे औद्योगिक क्षेत्र में रहने वाले निवासियों और श्रमिकों के बीच दहशत फैल गई। अधिकारियों ने बताया कि कंपनी में इस्तेमाल का करीब 65 फीसदी गैस रिसाव होने से यह स्थिति उत्पन्न हुई। उस समय कंपनी में 158 कर्मचारी कार्यरत थे। हालांकि वे सभी सुरक्षित हैं।
पालघर की जिलाधिकारी डॉ. इंदु रानी जाखड़ ने कहा कि आपदा प्रबंधन योजना को तुरंत सक्रिय कर दिया गया है। बताया गया कि यह रिसाव 2,500 लीटर क्षमता वाले ओलियम डे टैंक से हुआ। हवा की दिशा के कारण धुआं आसपास के इलाकों में फैल गया, जिससे लगभग पांच किलोमीटर के दायरे पर असर पड़ा। एहतियात के तौर पर, अधिकारियों ने स्थानीय स्कूल तारापुर विद्यामंदिर से 1,600 छात्रों को तत्काल निकालने का आदेश दिया। इसके अलावा, भागेरिया इंडस्ट्रीज और आसपास की कंपनियों के 1,000 से अधिक श्रमिकों को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।
बचाव दल ने गैस रिसाव का पता लगाया, स्थिति से निपटने में जुटी टीमें
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) और अग्निशमन दल की टीमों को शुरू में उस इकाई तक पहुंचने में बाधाओं का सामना करना पड़ा जहां गैस रिसाव हुआ था। अधिकारियों ने बताया कि रासायनिक विशेषज्ञों और एनडीआरएफ कर्मियों ने अंततः स्रोत का पता लगाया और सेल्फ-कंटेन्ड ब्रीदिंग अपेरटस (एससीबीए) का उपयोग करते हुए परिसर में प्रवेश किया। धुएं को नियंत्रित करने के लिए, बचाव दल ने रिसाव वाले टैंक के चारों ओर रेत की बोरियां लगा दी हैं। रिसाव स्थल पर मौजूद जिला पुलिस अधीक्षक यतीश देशमुख ने ग्रामीणों से कहा कि वे घबरायें नहीं क्योंकि अधिकारी स्थिति से निपटने के लिए हर संभव उपाय कर रहे थे।
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