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महाराष्ट्र: पड़ोसी ने पांच साल की बच्ची के साथ किया था दुष्कर्म, छह साल बाद अदालत ने सुनाई 20 साल की सजा

Wed, 28 Oct 2026 12:47 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी पीटीआई, ठाणे
पीटीआई, ठाणे Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Wed, 28 Oct 2026 12:47 PM IST
सार

महाराष्ट्र के ठाणे में विशेष पॉक्सो अदालत ने 2019 में पांच साल की बच्ची से यौन उत्पीड़न के मामले में आकाश बाबुराव थोरात को 20 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने बच्ची की गवाही को विश्वसनीय माना। 

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Maharashtra: Neighbor assault a five-year-old girl; court sentences him to 20 years in prison six years later
कोर्ट। (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

ठाणे की एक विशेष पॉक्सो अदालत ने 2019 में पांच साल की बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न करने के आरोप में एक व्यक्ति को 20 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने बच्ची की गवाही पर भरोसा किया। इसके साथ ही कहा कि बचाव पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा कि बच्ची को पहले से कुछ सिखाया-पढ़ाया (ट्यूटर) गया था।
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मंगलवार को सुनाए गए फैसले में विशेष अदालत के जज जी.टी. पवार ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने आरोपी, जिसकी पहचान आकाश बाबुराव थोरात के रूप में हुई है, के खिलाफ आरोप साबित कर दिए हैं।
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क्या है पूरा मामला? 
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना 1 दिसंबर 2019 की दोपहर को हुई थी। उस समय पांच साल की पीड़िता महाराष्ट्र के ठाणे जिले के मुंब्रा इलाके में एक चॉल में अपने पड़ोसी के घर खेलने गई थी।आरोपी, जो उसी पड़ोस में रहता था, बच्ची को बहला-फुसलाकर अपने घर ले गया, उसके लिए टीवी चलाया और फिर उसका यौन उत्पीड़न किया।
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किसने दी गवाही? 
अभियोजन पक्ष ने बताया कि डरी-सहमी बच्ची घर लौटी और अपनी मां को घटना के बारे में बताया। इसके बाद बच्ची की मां ने आरोपी से सवाल-जवाब किए और फिर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जांच के बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की। आरोपी पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत आरोप लगाए गए। मुकदमे के दौरान, अभियोजन पक्ष ने तीन मुख्य गवाहों - पीड़िता, उसकी मां और जांच अधिकारी - से पूछताछ की, साथ ही दस्तावेजी सबूत भी पेश किए।

जज ने क्या कहा? 
जज ने कहा, 'पीड़िता की गवाही बहुत विश्वसनीय है। बचाव पक्ष उसकी गवाही को गलत साबित करने या ऐसा कोई सबूत पेश करने में नाकाम रहा जिससे यह पता चले कि उसे कुछ सिखाया-पढ़ाया गया था। इसलिए, मैं उसकी गवाही पर भरोसा कर रहा हूं।'

उन्होंने आगे कहा, 'जांच में कुछ कमियां थीं, जैसे कि गलत जगह का 'स्पॉट पंचनामा' बनाना या पीड़िता को मेडिकल जांच के लिए न भेजना। लेकिन, चूंकि घटनास्थल से कोई सबूत नहीं मिला था, इसलिए इन कमियों का मामले पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ता।'

जज ने कितने जुर्माना लगाया? 
अदालत ने आरोपी को पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 (बच्चे के खिलाफ गंभीर यौन उत्पीड़न) के तहत दोषी ठहराते हुए 20 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही, उस पर 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न भरने की स्थिति में उसे 3 महीने की अतिरिक्त कठोर कारावास की सजा काटनी होगी। इसके अलावा, अदालत ने आरोपी को IPC की धारा 354A (यौन उत्पीड़न) के तहत तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई और उस पर 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया।


दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी, और आरोपी को उस अवधि का लाभ (सेट-ऑफ) मिलेगा जो वह पहले ही हिरासत में बिता चुका है। अदालत ने निर्देश दिया कि 6,000 रुपये की जुर्माना राशि पीड़िता को दी जाए, और ठाणे की जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) को उसे अतिरिक्त मुआवजा देने का निर्देश दिया।
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