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Maharashtra: जिला परिषद, पंचायत समिति चुनाव के लिए 20 हजार से ज्यादा उम्मीदवारों का नामांकन, 5 फरवरी को मतदान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: नितिन गौतम
Updated Sun, 25 Jan 2026 03:17 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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महाराष्ट्र में होने वाले जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों के लिए 20,718 उम्मीदवारों ने नामांकन किया है। राज्य में 12 जिला परिषदों और 125 पंचायत समितियों के लिए चुनाव 5 फरवरी को होंगे और वोटों की गिनती 7 फरवरी को होगी।
राज्य चुनाव आयोग (SEC) द्वारा शेयर किए गए डेटा के अनुसार, 731 जिला परिषद सीटों के लिए 7,695 उम्मीदवारों ने नामांकन दायर किए हैं, जबकि 1,462 पंचायत समिति सीटों के लिए 13,023 नामांकन पेपर फाइल किए गए। कोल्हापुर जिले में पंचायत समिति सीटों के लिए सबसे ज्यादा 1,529 नामांकन हुए, इसके बाद पुणे में 1,482, छत्रपति संभाजीनगर में 1,456 और सोलापुर में 1,371 नामांकन हुए।
जिला परिषद चुनावों के लिए, धाराशिव में 967 उम्मीदवारों ने नामांकन किया, इसके बाद कोल्हापुर में 907 उम्मीदवारों ने। अधिकारियों ने बताया कि उम्मीदवारों की फाइनल लिस्ट 27 जनवरी को प्रकाशित की जाएगी। 5 फरवरी को 25,482 मतदान केंद्रों पर सुबह 7.30 बजे से शाम 5.30 बजे तक मतदान होगा।
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राज्य चुनाव आयोग (SEC) द्वारा शेयर किए गए डेटा के अनुसार, 731 जिला परिषद सीटों के लिए 7,695 उम्मीदवारों ने नामांकन दायर किए हैं, जबकि 1,462 पंचायत समिति सीटों के लिए 13,023 नामांकन पेपर फाइल किए गए। कोल्हापुर जिले में पंचायत समिति सीटों के लिए सबसे ज्यादा 1,529 नामांकन हुए, इसके बाद पुणे में 1,482, छत्रपति संभाजीनगर में 1,456 और सोलापुर में 1,371 नामांकन हुए।
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जिला परिषद चुनावों के लिए, धाराशिव में 967 उम्मीदवारों ने नामांकन किया, इसके बाद कोल्हापुर में 907 उम्मीदवारों ने। अधिकारियों ने बताया कि उम्मीदवारों की फाइनल लिस्ट 27 जनवरी को प्रकाशित की जाएगी। 5 फरवरी को 25,482 मतदान केंद्रों पर सुबह 7.30 बजे से शाम 5.30 बजे तक मतदान होगा।
'मौजूदा व्यवस्था शिक्षा को निजीकरण की ओर धकेल रही'
सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने शनिवार को शिक्षा के निजीकरण पर चिंता जताई और कहा कि इससे आदिवासी और ग्रामीण इलाकों के छात्रों को शिक्षा के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। नांदेड़ एजुकेशन सोसाइटी के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मेधा पाटकर ने ये बात कही।
मेधा पाटकर ने आरोप लगाया कि संविधान के तहत शिक्षा को मौलिक अधिकार माने जाने के बावजूद, छात्रों की संख्या में कमी का हवाला देते हुए सरकारी स्कूलों को बंद किया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'मौजूदा सिस्टम शिक्षा को कमर्शियलाइज़ेशन की ओर धकेल रहा है, जिससे आदिवासी और ग्रामीण इलाकों के छात्रों को शिक्षा के अधिकार से वंचित किया जा रहा है।'
स्वामी रामानंद तीर्थ मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर डॉ. मनोहर चास्कर भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि लोगों की भागीदारी से शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव आ रहे हैं, और उन्होंने आधुनिक सिलेबस को शामिल करने की जरूरत पर जोर दिया।
मेधा पाटकर ने आरोप लगाया कि संविधान के तहत शिक्षा को मौलिक अधिकार माने जाने के बावजूद, छात्रों की संख्या में कमी का हवाला देते हुए सरकारी स्कूलों को बंद किया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'मौजूदा सिस्टम शिक्षा को कमर्शियलाइज़ेशन की ओर धकेल रहा है, जिससे आदिवासी और ग्रामीण इलाकों के छात्रों को शिक्षा के अधिकार से वंचित किया जा रहा है।'
स्वामी रामानंद तीर्थ मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर डॉ. मनोहर चास्कर भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि लोगों की भागीदारी से शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव आ रहे हैं, और उन्होंने आधुनिक सिलेबस को शामिल करने की जरूरत पर जोर दिया।