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Maharashtra: अवैध गैस निकासी की CBI जांच नहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका खारिज; मुंबई में दो विदेशी गिरफ्तार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: Pavan
Updated Fri, 27 Mar 2026 03:45 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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मुंबई में पुलिस ने एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जिसने कई लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगा। आरोपी का नाम तुषार संजय कदम है। पुलिस के अनुसार, उसने लोगों से कहा कि उसकी पहचान महाराष्ट्र के बड़े नेताओं और अधिकारियों से है और वह उन्हें फायर ब्रिगेड, नगर निगम और रेलवे में नौकरी दिला सकता है। इस झांसे में आकर कई लोगों ने उसे पैसे दिए।
आरोपी ने कुल मिलाकर करीब 42.5 लाख रुपये वसूल लिए। उसने लोगों को नकली नियुक्ति पत्र भी दे दिए, ताकि उन्हें लगे कि नौकरी पक्की हो गई है। एक शिकायतकर्ता दीपक यादव ने बताया कि आरोपी ने खुद को मंत्रालय में काम करने वाला बताया और नौकरी दिलाने का वादा किया, लेकिन पैसे लेने के बाद कुछ नहीं किया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि और कितने लोग इस ठगी का शिकार हुए हैं।
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आरोपी ने कुल मिलाकर करीब 42.5 लाख रुपये वसूल लिए। उसने लोगों को नकली नियुक्ति पत्र भी दे दिए, ताकि उन्हें लगे कि नौकरी पक्की हो गई है। एक शिकायतकर्ता दीपक यादव ने बताया कि आरोपी ने खुद को मंत्रालय में काम करने वाला बताया और नौकरी दिलाने का वादा किया, लेकिन पैसे लेने के बाद कुछ नहीं किया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि और कितने लोग इस ठगी का शिकार हुए हैं।
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मुंबई में दो विदेशी महिलाएं अवैध रूप से रहने पर पकड़ी गईं
मुंबई में पुलिस ने दो युगांडा की महिलाओं को अवैध रूप से रहने के आरोप में हिरासत में लिया है। इन महिलाओं के नाम नकायोंडो रोज (37) और केमिगिसा प्रोस्कोविया (26) हैं। पुलिस के अनुसार, ये दोनों कलिना इलाके में कई वर्षों से रह रही थीं, लेकिन इनके पास वैध वीजा और जरूरी दस्तावेज नहीं थे। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने छापा मारा और दोनों को पकड़ लिया। जांच में पता चला कि इनका वीजा पहले ही खत्म हो चुका था, लेकिन इसके बावजूद ये भारत में रह रही थीं। अब दोनों को उनके देश वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
मुंबई में पुलिस ने दो युगांडा की महिलाओं को अवैध रूप से रहने के आरोप में हिरासत में लिया है। इन महिलाओं के नाम नकायोंडो रोज (37) और केमिगिसा प्रोस्कोविया (26) हैं। पुलिस के अनुसार, ये दोनों कलिना इलाके में कई वर्षों से रह रही थीं, लेकिन इनके पास वैध वीजा और जरूरी दस्तावेज नहीं थे। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने छापा मारा और दोनों को पकड़ लिया। जांच में पता चला कि इनका वीजा पहले ही खत्म हो चुका था, लेकिन इसके बावजूद ये भारत में रह रही थीं। अब दोनों को उनके देश वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
अवैध गैस निकासी की CBI जांच नहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका खारिज
बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और इसके चेयरमैन मुकेश अंबानी के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि रिलायंस ने ओएनजीसी के कृष्णा-गोदावरी बेसिन से कथित तौर पर अवैध तरीके से प्राकृतिक गैस निकाली है। मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति सुमन श्याम की बेंच ने याचिकाकर्ता जितेंद्र मारू को राहत देने से इनकार कर दिया। मारू ने इस मामले में चोरी, बेईमानी और आपराधिक विश्वासघात जैसे आरोपों के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। हालांकि, कोर्ट के इस आदेश की कॉपी अभी उपलब्ध नहीं हो पाई है।
जितेंद्र मारू का आरोप है कि रिलायंस ने 2004 से 2013 के बीच एक बड़ा संगठित घोटाला किया। याचिका के अनुसार, कंपनी ने अपने गहरे समुद्र के कुओं से तिरछी ड्रिलिंग की और पास के ओएनजीसी के कुओं से गैस निकाल ली। याचिका में दावा किया गया कि ओएनजीसी ने 2013 में इस चोरी को पकड़ा था और भारत सरकार को इसकी रिपोर्ट दी थी। मारू ने अपनी याचिका में 'डीगोलियर एंड मैकनॉटोन' नाम के कंसल्टेंट्स की स्वतंत्र जांच का जिक्र किया। साथ ही उन्होंने सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति ए.पी. शाह समिति की रिपोर्ट का भी हवाला दिया। इन रिपोर्टों में यह निष्कर्ष निकला था कि रिलायंस ने ओएनजीसी के गैस भंडार में सेंध लगाई है।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और इसके चेयरमैन मुकेश अंबानी के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि रिलायंस ने ओएनजीसी के कृष्णा-गोदावरी बेसिन से कथित तौर पर अवैध तरीके से प्राकृतिक गैस निकाली है। मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति सुमन श्याम की बेंच ने याचिकाकर्ता जितेंद्र मारू को राहत देने से इनकार कर दिया। मारू ने इस मामले में चोरी, बेईमानी और आपराधिक विश्वासघात जैसे आरोपों के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। हालांकि, कोर्ट के इस आदेश की कॉपी अभी उपलब्ध नहीं हो पाई है।
जितेंद्र मारू का आरोप है कि रिलायंस ने 2004 से 2013 के बीच एक बड़ा संगठित घोटाला किया। याचिका के अनुसार, कंपनी ने अपने गहरे समुद्र के कुओं से तिरछी ड्रिलिंग की और पास के ओएनजीसी के कुओं से गैस निकाल ली। याचिका में दावा किया गया कि ओएनजीसी ने 2013 में इस चोरी को पकड़ा था और भारत सरकार को इसकी रिपोर्ट दी थी। मारू ने अपनी याचिका में 'डीगोलियर एंड मैकनॉटोन' नाम के कंसल्टेंट्स की स्वतंत्र जांच का जिक्र किया। साथ ही उन्होंने सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति ए.पी. शाह समिति की रिपोर्ट का भी हवाला दिया। इन रिपोर्टों में यह निष्कर्ष निकला था कि रिलायंस ने ओएनजीसी के गैस भंडार में सेंध लगाई है।