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उद्धव के छह सांसद शिवसेना में शामिल: एकनाथ शिंदे ने दिलाई पार्टी की सदस्यता, कहा- ऑपरेशन टाइगर अब पूरा और सफल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Mon, 22 Jun 2026 05:16 PM IST
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सार

महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद सोमवार को राज्य के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए। इसके साथ ही लोकसभा में शिंदे गुट की संख्या सात से बढ़कर 13 हो गई। पढ़ें, किन-किन सांसदों ने शिवसेना का दामन थामा है...

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सांसदों का उद्धव से मोहभंग - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

महाराष्ट्र में शिवसेना यूबीटी को बड़ा झटका लगा है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में उद्धव गुट के छह सांसदों ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है। शिवसेना यूबीटी सांसद संजय हरिभाऊ जाधव, भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे, ओमप्रकाश भूपालसिंह निंबालकर, संजय दीना पाटिल, संजय उत्तमराव देशमुख और नागेश बापुराव पाटिल अष्टीकर ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ मंच साझा किया। वहीं, इसके बाद डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा- ऑपरेशन टाइगर अब पूरा और सफल हो गया।


 





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इन सांसदों ने शिंदे गुट का थामा दामन
इस सूची में यवतमाल-वाशिम से संजय देशमुख, हिंगोली से नागेश पाटिल अष्टीकर, परभणी से संजय जाधव, शिरडी से भाऊसाहेब वाकचौरे, मुंबई उत्तर-पूर्व से संजय दिना पाटिल और धाराशिव से ओमप्रकाश राजे निंबालकर का नाम शामिल है। ये सभी सांसद हाल ही में शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय दल की बैठक में शामिल नहीं हुए थे। इसके बाद से ही उनके पार्टी छोड़ने की अटकलें तेज हो गई थीं।




'यह 2022 में शुरू हुई बगावत का दूसरा चरण है'
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने रविवार को शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के उनकी पार्टी में शामिल होने पर इसे 'ऑपरेशन टाइगर' की सफलता बताते हुए कहा कि यह 2022 में शुरू हुई बगावत का दूसरा चरण है। उन्होंने दावा किया कि सभी सांसद बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा को आगे बढ़ाने और अपने-अपने क्षेत्रों के विकास के लिए शिवसेना में आए हैं। उन्होंने आगे कहा कि आज छह 'कट्टर शिवसैनिक' सांसदों का बालासाहेब ठाकरे और आनंद दिघे की मूल शिवसेना में स्वागत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 2022 में 40 विधायकों ने उनके साथ आकर बगावत की थी, जिसका उद्देश्य बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना को बचाना था। अब यह उसी आंदोलन का दूसरा चरण है।

'मैं आज भी कार्यकर्ता की तरह ही काम कर रहा हूं'
शिंदे ने कहा, 'जब मैं मुख्यमंत्री था तब भी एक कार्यकर्ता की तरह काम करता था और आज भी कार्यकर्ता की तरह ही काम कर रहा हूं। मैं इन छह सांसदों से भी कहना चाहता हूं कि उन्हें सामान्य कार्यकर्ता की तरह जनता के बीच रहकर काम करना होगा। पार्टी सभी को सम्मान देगी। हमारे मंत्री उनके साथ बैठेंगे और उनके संसदीय क्षेत्रों की समस्याओं का समाधान करेंगे'। उन्होंने आगे कहा, 'मैं कोई काम अधूरा नहीं छोड़ता। ऑपरेशन टाइगर की सफलता आज आपके सामने है'।

डिप्टी सीएम शिंदे ने की निंबालकर की तारीफ
सांसद ओमराजे निंबालकर का विशेष उल्लेख करते हुए शिंदे ने कहा कि उन्होंने बड़े दिल के साथ यह फैसला लिया है। उन्होंने कहा, 'कुछ लोग उन्हें रील स्टार कहते थे, लेकिन मेरे लिए वे रियल स्टार हैं। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से चर्चा करने के बाद यह निर्णय लिया। ये सभी लोग किसी व्यक्तिगत लाभ या स्वार्थ के लिए नहीं आए हैं, बल्कि अपने क्षेत्रों के विकास और जनता की भलाई के लिए हमारे साथ जुड़े हैं'। शिंदे ने यह भी कहा कि 2022 में लिए गए फैसले को जनता ने स्वीकार किया था और बाद में हुए चुनावों में उनकी पार्टी को जनसमर्थन मिला। उन्होंने कहा, 'जब हमने बगावत की थी तब हमारे साथ 40 विधायक थे, लेकिन चुनाव के बाद यह संख्या बढ़कर 60 हो गई'।

क्रमांक

संभावित सांसद

लोकसभा क्षेत्र

1

संजय देशमुख

यवतमाल-वाशिम

2

नागेश पाटिल अष्टीकर

हिंगोली

3

संजय जाधव

परभणी

4

भाऊसाहेब वाकचौरे

शिरडी

5

संजय दिना पाटिल

मुंबई उत्तर-पूर्व

6

ओमप्रकाश राजे निंबालकर

धाराशिव


इससे पहले मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा था कि आज छह सांसद आधिकारिक तौर पर शिवसेना की सदस्यता ग्रहण करेंगे। उन्होंने दावा किया कि इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भी सौंप दिया है। सरनाईक ने इसे 'ऑपरेशन टाइगर' का हिस्सा बताया और कहा कि यह अभियान साल के 365 दिन चलता है। उन्होंने कहा कि बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा को मानने वाले सांसद अब शिंदे गुट के साथ आ रहे हैं।

क्या है 'ऑपरेशन टाइगर' और किसने किया दावा?
प्रताप सरनाईक ने कहा कि 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत लगातार शिवसैनिक और जनप्रतिनिधि शिंदे गुट में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा, "हम संजय राउत का धन्यवाद करते हैं, क्योंकि पहले विधायक हमारी पार्टी में आए और अब सांसद भी आ रहे हैं।" सरनाईक के इस बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। हालांकि, शिवसेना (यूबीटी) की ओर से इस दावे पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

यूबीटी और शिंदे गुट के नेताओं ने क्या कहा?
शिवसेना (यूबीटी) विधायक महेश सावंत ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "जाने वाले गए।" वहीं, शिवसेना एमएलसी डॉ. मनीषा कायंदे ने कहा कि उन्हें अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि जो लोग आ रहे हैं, वे बागी नहीं बल्कि शिवसैनिक हैं और एकनाथ शिंदे ने उनका स्वागत किया है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सोमवार को कुछ अच्छी खबर मिल सकती है।

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मंत्रियों ने क्या दी प्रतिक्रिया
इस मौके पर महाराष्ट्र सरकार में मंत्री दादाजी भुसे ने कहा कि एकनाथ शिंदे जिस तरह राज्य को आगे ले जा रहे हैं, उससे कार्यकर्ताओं में विश्वास बढ़ा है। उन्होंने कहा कि शिवसेना उन सभी कार्यकर्ताओं का स्वागत करती है जो पार्टी से जुड़ना चाहते हैं। वहीं मंत्री योगेश कदम ने भी शिवसेना (यूबीटी) और उसके मुखपत्र सामना पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आज लोग सामना को पहले की तरह नहीं पढ़ते। उनके अनुसार, बालासाहेब ठाकरे के समय अखबार की दिशा और मुद्दे तय करने में उनकी सीधी भूमिका होती थी, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। कदम ने दावा किया कि वर्तमान में अपनाया जा रहा रुख जनता को स्वीकार नहीं है।

शिवसेना नेताओं की प्रतिक्रिया
महाराष्ट्र विधान परिषद की एमएलसी और डिप्टी चेयरपर्सन डॉ. नीलम गोरहे ने कहा कि, 'हम बहुत खुश हैं क्योंकि एकनाथ शिंदे बालासाहेब ठाकरे की विरासत का सम्मान करते हुए शिवसेना के काम को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। जब विधानसभा चुनाव हुए, तो हमारे 60 विधायक चुने गए। उनके चुने जाने के बाद भी, 'UBT' गुट के सदस्यों ने बार-बार उन्हें गद्दार कहा। अगर हमारे विधायक पहले ही चुने जा चुके थे, तो उन्हें गद्दार क्यों कहा गया? अब उन्होंने उन्हें गद्दार कहना बंद कर दिया है क्योंकि उन्हें जनता ने चुना था... हम NDA में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर इस असर से हम बहुत खुश हैं। हमेशा धोखा देने या पैसे लेने का आरोप लगाया जाता है। हालांकि, जब सांसद चुनाव लड़ते हैं, तो पोस्टर और प्रचार जैसे खर्च तो होते ही हैं। इन दावों में कोई सच्चाई नहीं है; इनका कोई सबूत भी नहीं है'। शिवसेना प्रवक्ता शायना एनसी ने कहा, 'UBT' को इस बात पर सोचना चाहिए कि उनके विधायक, सांसद और पार्षद उनसे क्यों नाखुश हैं; अगर वे थोड़ा आत्म-मंथन करें, तो उन्हें जवाब मिल जाएगा। पार्टी छह बार टूट चुकी है। संविधान एक मौका देता है - खासकर दलबदल विरोधी कानून के तहत विलय का प्रावधान। आज जो सांसद शामिल हो रहे हैं, वे इसलिए ऐसा कर रहे हैं क्योंकि एकनाथ शिंदे एक जन-नेता हैं; वे ज़मीनी स्तर पर काम करते हैं, पार्टी कार्यकर्ताओं का सम्मान करते हैं और एक दूरदर्शी नेता हैं जो सचमुच महाराष्ट्र के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं'।

उद्धव ठाकरे की अगली रणनीति क्या है?
इस सियासी संकट के बीच उद्धव ठाकरे ने पार्टी कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करने का फैसला किया है। शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत द्वारा साझा कार्यक्रम के मुताबिक, उद्धव ठाकरे 27 जून से महाराष्ट्रव्यापी जनसंपर्क अभियान शुरू करेंगे। वह यवतमाल, वाशिम, हिंगोली, परभणी, धाराशिव और शिरडी का दौरा करेंगे। माना जा रहा है कि यह दौरा पार्टी संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने की कोशिश है। ऐसे समय में जब पार्टी के कई सांसदों के शिंदे गुट में जाने की चर्चा है, उद्धव ठाकरे का यह अभियान राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।

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