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थरूर की चुनौती पर बोले खरगे: यह वक्त डीबेट करने का नहीं, एक होकर भाजपा की चुनौती से लड़ने का है

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Published by: सुभाष कुमार Updated Sun, 02 Oct 2022 06:04 PM IST
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सार

खरगे से पूछा गया कि इस आरोप पर क्या कहेंगे कि अध्यक्ष कोई भी हो, लेकिन परदे के पीछे से असली फैसला तो गांधी परिवार ही करेगा, खरगे ने सफाई दी कि भाजपा ऐसे दुष्प्रचार करती रहती है।

Mallikarjun Kharge said on tharoor challenge not the time for debate its time to fight bjp
मल्लिकार्जुन खरगे। - फोटो : ANI
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विस्तार

कांग्रेस अध्यक्ष पद के प्रमुख दावेदार खरगे ने गांधी-शास्त्री को याद कर प्रचार अभियान की औपचारिक शुरुआत की। कांग्रेस की विचारधारा को मजबूत करने के साथ भाजपा की चुनौती का मुकाबला करना मुख्य लक्ष्य बताया। बार बार दलित नेता कहे जाने पर जताई आपत्ति। थरूर से कहा, परिवार को साथ चलने की जरूरत। जीत का भरोसा जताया और कहा गांधी परिवार के त्याग और बलिदान को नहीं भूला जा सकता, उनसे और सभी वरिष्ठों का सहयोग और मार्गदर्शन जरूरी।

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कांग्रेस अध्यक्ष पद के मुख्य दावेदार मल्लिकार्जुन खरगे के आवास 10, राजाजी मार्ग पर रविवार को ज्यादा चहल पहल नजर आ रही है। सुबह से ही पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का आना जाना लगा हुआ है। जयराम रमेश लगातार वहां मौजूद हैं। खरगे ने पहली बार अपने आवास पर कोई प्रेस कांफ्रेंस बुलाई है। रविवार का दिन है, नवरात्र चल रहे हैं, ऐसे में कम ही पत्रकारों के आने की संभावना है। बावजूद इसके वहां तकरीबन 25-30 संवाददाता पहुंचे हैं, चैनलों के कैमरामैन ज्यादा हैं। आम तौर पर अब प्रेस कांफ्रेंस में वरिष्ठ पत्रकार कम ही जाते हैं, घर बैठे लाइव देख-सुन लेते हैं। ऐसे में पत्रकारों को प्रेस कांफ्रेंस के बाद लंच का भी न्यौता है। नवरात्र के लिए अलग से खाने का स्टॉल है।
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लेकिन इन तमाम इंतजामों के बावजूद कांग्रेस अध्यक्ष पद के आधिकारिक उम्मीदवार के तौर पर पेश किए जा रहे खरगे साहब की प्रेस कांफ्रेंस में बहुत कम पत्रकार पहुंचे। सवाल भी गिनती के सात आठ पूछे गए। नामांकन के बाद से मल्लिकार्जुन खरगे की कोशिश है कि वो ज्यादातर हिन्दी में बोलें ताकि उनपर जो गैर हिन्दी भाषी होने का ठप्पा लगाया जाता है, वह न लगे। इस प्रेस कांफ्रेंस को भी खरगे साहब ने पूरी तरह हिन्दी में संबोधित किया। उनका कहना था कि कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है और ये चुनाव भी पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया से हो रहा है। उनके सहयोगियों ने, पार्टी के नेताओं ने लगातार उन्हें सुझाव दिया कि जब गांधी परिवार का कोई भी सदस्य चुनाव नहीं लड़ रहा तो उन्हें लड़ना चाहिए।

बार-बार उन्होंने कांग्रेस को एक परिवार कहा और ये भी कहा कि मैं किसी के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ रहा। शशि थरूर को भी उन्होंने अपने ही परिवार का सदस्य बताया और कहा कि घरेलू मामले हम मिल बैठकर सुलझा लेंगे। अभी पहला मकसद कांग्रेस की विचारधारा को आगे लेकर चलना है, अमीर गरीब का फासले को मिटाना है, महंगाई और बेरोज़गारी के खिलाफ लड़ना है और पिछले आठ सालों में भाजपा सरकार ने जो हालात पैदा किए हैं उसके खिलाफ मजबूती से खड़ा होना है। इसके लिए सबको मिलकर लड़ना है और पार्टी को मजबूत बनाना है। अपनी जीत के लिए उन्होंने सबका समर्थन मांगा। महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर उन्हें याद करते हुए खरगे ने औपचारिक तौर पर अपने चुनाव अभियान की शुरुआत की। प्रेस कांफ्रेंस में उनके साथ पार्टी के प्रवक्ता पद से इस्तीफे की घोषणा करते हुए खरगे के समर्थन में प्रचार करने का ऐलान करने वाले दीपेन्द्र सिंह हुड्डा, गौरव बल्लभ और नासिर हुसैन भी थे। इन तीनों युवा नेताओं ने माना कि कांग्रेस अध्यक्ष के कहने पर उन्होंने प्रवक्ता पद छोड़कर खरगे का साथ देने का फैसला किया है।

उनसे पूछा गया कि इस आरोप पर क्या कहेंगे कि अध्यक्ष कोई भी हो, लेकिन परदे के पीछे से असली फैसला तो गांधी परिवार ही करेगा, खरगे ने सफाई दी कि भाजपा ऐसे दुष्प्रचार करती रहती है। गांधी परिवार ने इस पार्टी और देश के लिए कुर्बानियां दी हैं, इसे कैसे भूला जा सकता है। सोनिया गांधी कभी राजनीति में नहीं आना चाहती थीं, हमलोग उन्हें लेकर आए, उन्होंने कभी खुद प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहा और न ही राहुल गांधी को बनाने के लिए दबाव डाला। इस परिवार ने हमेशा देश की बात की है और आज भी राहुल गांधी देश को जोड़ने के लिए भारत जोड़ो यात्रा कर रहे हैं। ऐसे में गांधी परिवार और पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेताओं से हर मसले पर सलाह तो लिया ही जाना चाहिए।

कांग्रेस को लोकतांत्रिक प्रक्रिया वाली पार्टी बताते हुए खरगे ने भाजपा पर आरोप लगाया कि उनका अद्यक्ष कैसे बन जाता है, पता भी नहीं चलता। जेपी नड्डा कैसे बन गए किसी को पता नहीं। भाजपा ने अपना एक भी वादा पूरा नहीं किया और देश में नफरत का माहौल बनाया।

खुद को दलित नेता कहने और उनके बहाने कांग्रेस के दलित कार्ड खेलने के सवाल पर खरगे कुछ नाराज़ हुए और कहा कि आप दलितों को अलग खांचे में बांटकर क्यों देखते हैं, दलित भी आपकी ही तरह इंसान है, वैसी ही शक्लोसूरत है, वैसे ही बोलता है, फिर आदमी आदमी को इस तरह बांटकर देखने का काम क्यों किया जाता है। उन्होंने कहा कि वह पूरे देश और पूरी पार्टी के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। थरूर की ओर से किसी भी मुद्दे पर डीबेट करने की चुनौती पर खरगे ने कहा कि माना कि वो बहुत पढ़े लिखे हैं, लेकिन ये समय आपस में डिबेट करने का नहीं, देश को बचाने का है, पार्टी को मजबूत बनाने का है। उन्होंने मीडिया से भी समर्थन मांगा।

आम तौर पर कोई नेता, मंत्री अपने घर या ऐसे किसी मौके पर प्रेस कांफ्रेंस करने के बाद अनौपचारिक तौर पर पत्रकारों के बीच रहता है, अपने घर खाने पर आमंत्रित कर वह बतौर मेजबान भी वह बातचीत और तमाम मसलों पर चर्चाएं भी करता है, लेकिन खरगे ने ऐसा नहीं किया। सच कहा जाए तो उन्हें ऐसा करने नहीं दिया गया। पार्टी के नेता प्रेस कांफ्रेंस के बाद उन्हें भीतर ले गए। जयराम रमेश जरूर कुछ देर वहां टहलते रहे, लेकिन कुछ देर बाद वह भी भीतर चले गए।

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